मल्हार अध्याय 8 शब्दों की बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) पाठ में आए हुए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं, इन्हें ध्यान से पढ़िए— आजीविका, सीमित, प्रशिक्षण, सुंदरता, आधुनिक, पारंपरिक, भारतीय, सामूहिक, शास्त्रीय। आपने इन शब्दों पर ध्यान दिया होगा कि मूल शब्द के आगे या पीछे कोई शब्दांश जोड़कर नया शब्द बना है।
उत्तर

इन नौ शब्दों को खोलकर देखिए — हर शब्द में एक मूल शब्द है और उसके आगे या पीछे जुड़ा एक शब्दांश

शब्दविभाजनशब्दांशप्रकार
आजीविकाआ + जीविकाउपसर्ग
सीमितसीमा + इतइतप्रत्यय
प्रशिक्षणप्र + शिक्षणप्रउपसर्ग
सुंदरतासुंदर + ताताप्रत्यय
आधुनिकअधुना + इकइकप्रत्यय
पारंपरिकपरंपरा + इकइकप्रत्यय
भारतीयभारत + ईयईयप्रत्यय
सामूहिकसमूह + इकइकप्रत्यय
शास्त्रीयशास्त्र + ईयईयप्रत्यय
नियम याद रखिए: शब्द के आगे जुड़ने वाला शब्दांश उपसर्ग कहलाता है (अ + दृश्य = अदृश्य, आ + वरण = आवरण, प्र + शिक्षण = प्रशिक्षण) और शब्द के पीछे जुड़ने वाला शब्दांश प्रत्यय (सीमा + इत = सीमित, सुंदर + ता = सुंदरता, भारत + ईय = भारतीय, समूह + इक = सामूहिक)।
ध्यान दीजिए: ‘इक’ और ‘ईय’ प्रत्यय जुड़ते ही मूल शब्द की पहली मात्रा प्राय: बड़ी हो जाती है — समूह → सामूहिक, परंपरा → पारंपरिक, इतिहास → तिहासिक। इसे व्याकरण में ‘वृद्धि’ कहते हैं।
प्र2.
(ख) नीचे दो तबले हैं, एक में कुछ शब्दांश (उपसर्ग व प्रत्यय) हैं, दूसरे तबले में मूल शब्द हैं। इनकी सहायता से नए शब्द बनाइए— शब्दांश: आ, अ, ईय, सु, इक, आ, ता, इत। मूल शब्द: मर्म, गमन, राष्ट्र, खंड, श्रम, संस्कृति, कर्म, नाम, साधारण।
उत्तर

दोनों तबलों को जोड़कर बनने वाले शब्द —

मूल शब्द+ शब्दांशनया शब्दअर्थ
गमनआ (उपसर्ग)आगमनआना, पधारना
खंडअ (उपसर्ग)अखंडजिसके टुकड़े न हों, पूरा
श्रमआ (उपसर्ग)आश्रमसाधना और निवास का स्थान
कर्मसु (उपसर्ग)सुकर्मअच्छा काम
राष्ट्रईय (प्रत्यय)राष्ट्रीयराष्ट्र से संबंधित
संस्कृतिइक (प्रत्यय)सांस्कृतिकसंस्कृति से संबंधित
मर्मइक (प्रत्यय)मार्मिकमन को छू लेने वाला
साधारणता (प्रत्यय)साधारणतासामान्य होने का भाव
नामइत (प्रत्यय)नामितजिसका नाम रखा या चुना गया हो
वाक्य में प्रयोग:
  • अतिथियों के आगमन पर विद्यालय में कथक की प्रस्तुति हुई।
  • बिरजू महाराज ने कथक की परंपरा को अखंड रखते हुए उसकी प्रस्तुति बदल दी।
  • गुरुकुल के आश्रम में सुबह चार बजे से रियाज़ शुरू हो जाता था।
  • अम्मा का त्याग एक सुकर्म था, जिसने बेटे को महाराज बना दिया।
  • कथक हमारी राष्ट्रीय धरोहर है।
  • विद्यालय का सांस्कृतिक कार्यक्रम बहुत सफल रहा।
  • सुधा चंद्रन की कहानी बहुत मार्मिक है।
  • उनके व्यवहार की साधारणता ही उन्हें महान बनाती थी।
  • उन्हें इस वर्ष के पुरस्कार के लिए नामित किया गया।
सुझाव: तबले में ‘आ’ दो बार दिया गया है — इसलिए ‘आ’ से दो शब्द (आगमन, आश्रम) बनाना ही अपेक्षित है। आप और भी जोड़ सकते हैं, जैसे कर्म + इक = कार्मिक, नाम + ईय? नहीं — पर धर्म + इक = धार्मिक जैसे उदाहरण पहचानने का अभ्यास कीजिए।
प्र3.
(ग) इस पाठ में से उपसर्ग व प्रत्यय की सहायता से बने कुछ और शब्द छाँटकर उनसे वाक्य बनाइए।
उत्तर

क. उपसर्ग से बने शब्द

शब्दउपसर्ग + मूलअपना वाक्य
अदृश्यअ + दृश्यनृत्य के समय मानो कोई अदृश्य शक्ति नर्तक के भीतर उतर आती है।
अनौपचारिकअन + औपचारिकपहले कथक कथा कहने का एक अनौपचारिक ढंग था।
प्रचलितप्र + चलितयह पद हरिया गाँव में आज भी प्रचलित है।
परिवर्तनपरि + वर्तनउन्होंने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन किया।
अतिरिक्तअति + रिक्तनृत्य के अतिरिक्त उन्हें चित्रकला में भी रुचि थी।
आश्रयआ + श्रयपरंपरा उस वृक्ष की तरह है जो सबको आश्रय देती है।
सुप्रसिद्धसु + प्रसिद्धयह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है।
निमंत्रणनि + मंत्रणउन्हें विदेश से नृत्य का निमंत्रण मिला।

ख. प्रत्यय से बने शब्द

शब्दमूल + प्रत्ययअपना वाक्य
नर्तकनृत् + अकशास्त्रीय नृत्य में एक नर्तक अकेला ही काफ़ी होता है।
कलाकारकला + कारमंच पर चार कलाकार एक साथ आए।
मनमोहकमनमोह + कउनकी मनमोहक प्रस्तुतियाँ आज भी याद की जाती हैं।
लोकप्रियतालोकप्रिय + ताअब शास्त्रीय नृत्य की लोकप्रियता बढ़ रही है।
आत्मनिर्भरआत्म + निर्भरहुनर लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाता है।
दयनीयदया + नीयकुछ वर्ष पहले तक शास्त्रीय नृत्य की स्थिति दयनीय थी।
छाँटने की तरकीब: जिस शब्द के आरंभ में अ, अन, प्र, परि, वि, नि, सु, अति जैसे टुकड़े दिखें, वहाँ उपसर्ग की संभावना है; जिस शब्द के अंत में ता, इक, ईय, इत, अक, कार, नीय दिखे, वहाँ प्रत्यय की। फिर टुकड़ा हटाकर देखिए — यदि बचा हुआ शब्द अपने-आप में अर्थवान है, तो आपका विभाजन सही है।
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