प्र1.
1. “कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला में इतना दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।” इस वाक्य में रेखांकित शब्द ‘इतना’ हटाकर वाक्य पढ़िए और पहचानिए कि क्या परिवर्तन आया है?
उत्तर
‘इतना’ हटाने पर वाक्य बनेगा: “कुछ कथिक डर गए किंतु उन कथिकों की कला में दम था कि डाकू सब कुछ भूलकर उन कथिकों के कथक में मग्न हो गए।”
क्या परिवर्तन आया:
| पहलू | ‘इतना’ के साथ | ‘इतना’ के बिना |
|---|---|---|
| मात्रा का बोध | कला में कितना दम था — यह नाप देता है | केवल इतना कि दम था; कितना, पता नहीं चलता |
| वाक्य की बनावट | ‘इतना… कि’ एक जोड़ी है, इसलिए दोनों हिस्से आपस में कस कर जुड़ जाते हैं | जोड़ी टूट जाती है, ‘कि’ अकेला रह जाता है और वाक्य अटपटा लगने लगता है |
| प्रभाव | चमत्कार का भाव — डाकुओं का ठिठक जाना विश्वसनीय लगता है | बात साधारण सूचना बनकर रह जाती है, अचरज गायब हो जाता है |
क्यों: ‘इतना’ एक परिमाणबोधक विशेषण है। यह अकेले नहीं आता, ‘कि’ के साथ जोड़ी बनाकर आता है — “इतना … कि …”। यह जोड़ी कारण और परिणाम को बाँध देती है: कला में इतना दम था — यही कारण; डाकू मग्न हो गए — यही परिणाम। ‘इतना’ हटते ही कारण की मात्रा गायब हो जाती है और परिणाम बेबुनियाद लगने लगता है।
स्वयं परखिए: इन जोड़ों को बोलकर देखिए — “वह इतना थक गया कि सो गया” / “वह थक गया कि सो गया”। दूसरा वाक्य कान को खटकता है। यही ‘इतना’ की ताकत है।