प्र1.
आपके विद्यालय में कथक नृत्य का आयोजन होने जा रहा है। (क) आप दर्शकों को कथक नृत्यकला के बारे में क्या-क्या बताएँगे? लिखिए।
उत्तर
दर्शकों को कथक का परिचय देते समय पाँच बातें अवश्य आनी चाहिए — नाम का अर्थ, उद्गम, घराने, विशेषताएँ और देखने का तरीका।
नमूना उत्तर (मंच से बोलने के लिए):
“आदरणीय अतिथियो और साथियो, आज आप जो नृत्य देखने जा रहे हैं, उसका नाम है कथक। ‘कथक’ शब्द ‘कथिक’ से बना है, जिसका अर्थ है कथावाचक — यानी कहानी सुनाने वाला। बहुत पहले मंदिरों में कथिक रामायण और महाभारत की कथाएँ संगीत और भाव-भंगिमाओं के साथ सुनाते थे; वही धीरे-धीरे कथक बन गया।
कथक ब्रजभूमि की रासलीला से उपजा है। इसके तीन प्रमुख घराने हैं — लखनऊ, जयपुर और बनारस। लखनऊ घराने के सबसे बड़े नाम रहे पंडित बिरजू महाराज, जिन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।
कथक की पहचान है — तेज चक्कर, पैरों का तत्कार यानी घुँघरुओं से निकलने वाली ताल, और चेहरे के कोमल भाव। इसमें गर्दन ‘चिराग की लौ के समान’ हल्के-से हिलती है और उँगलियाँ ऐसे चलती हैं जैसे घूँघट उठाया जा रहा हो। इसकी सबसे रोमांचक चीज है जुगलबंदी — जिसमें तबलावादक और नर्तक के बीच मानो प्रतियोगिता चलती है: तबला जो बोलता है, पैर वही दोहरा देते हैं।
आपसे निवेदन है कि प्रस्तुति के समय ताल पर ध्यान दीजिए — घुँघरू और तबला जब एक साथ रुकते हैं, वही क्षण कथक का सबसे सुंदर क्षण होता है। धन्यवाद!”
“आदरणीय अतिथियो और साथियो, आज आप जो नृत्य देखने जा रहे हैं, उसका नाम है कथक। ‘कथक’ शब्द ‘कथिक’ से बना है, जिसका अर्थ है कथावाचक — यानी कहानी सुनाने वाला। बहुत पहले मंदिरों में कथिक रामायण और महाभारत की कथाएँ संगीत और भाव-भंगिमाओं के साथ सुनाते थे; वही धीरे-धीरे कथक बन गया।
कथक ब्रजभूमि की रासलीला से उपजा है। इसके तीन प्रमुख घराने हैं — लखनऊ, जयपुर और बनारस। लखनऊ घराने के सबसे बड़े नाम रहे पंडित बिरजू महाराज, जिन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया।
कथक की पहचान है — तेज चक्कर, पैरों का तत्कार यानी घुँघरुओं से निकलने वाली ताल, और चेहरे के कोमल भाव। इसमें गर्दन ‘चिराग की लौ के समान’ हल्के-से हिलती है और उँगलियाँ ऐसे चलती हैं जैसे घूँघट उठाया जा रहा हो। इसकी सबसे रोमांचक चीज है जुगलबंदी — जिसमें तबलावादक और नर्तक के बीच मानो प्रतियोगिता चलती है: तबला जो बोलता है, पैर वही दोहरा देते हैं।
आपसे निवेदन है कि प्रस्तुति के समय ताल पर ध्यान दीजिए — घुँघरू और तबला जब एक साथ रुकते हैं, वही क्षण कथक का सबसे सुंदर क्षण होता है। धन्यवाद!”
अच्छे परिचय का ढाँचा: क्या → कहाँ से आया → कौन-कौन बड़े नाम → क्या खास देखना है → धन्यवाद। पाँच मिनट से लंबा परिचय दर्शकों को थका देता है।