प्र1.
प्रस्तुत ‘साक्षात्कार’ के आधार पर बताइए— (क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
उत्तर
पाठ स्वयं कहता है — “साक्षात्कार की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि साक्षात्कारदाता के संदर्भ में कितना शोध किया गया है और प्रश्न किस प्रकार के बनाए गए हैं।” इस साक्षात्कार से पहले ये तैयारियाँ हुई होंगी —
- व्यक्ति के बारे में पढ़ाई — बिरजू महाराज कौन हैं, किस घराने के हैं, उनके गुरु कौन थे, उन्हें कौन-से सम्मान मिले (पद्मविभूषण) — यह सब पहले जान लिया गया, तभी बच्चे बाबूजी, चाचा, गंडा और घराने पर सीधे प्रश्न पूछ सके।
- विषय की समझ — कथक, लय, ताल, घराना, लहरा, लोक और शास्त्रीय नृत्य — इन शब्दों को समझे बिना ऐसे प्रश्न बन ही नहीं सकते थे।
- प्रश्नों की सूची बनाना और क्रम तय करना — ध्यान दीजिए, बातचीत बचपन से शुरू होती है, फिर तालीम, फिर कथक का इतिहास, फिर वर्तमान स्थिति और अंत में बच्चों-अभिभावकों के लिए संदेश। यह क्रम अपने-आप नहीं बना — पहले से सोचा गया।
- समय और स्थान तय करना — कब, कहाँ और कितनी देर मिलना है, इसकी अनुमति पहले ली गई होगी।
- साधन जुटाना — कॉपी-पेन या रिकॉर्डर, और बाद में बातचीत को लिखकर व्यवस्थित करना।
- मन की तैयारी — पाठ में तीन शब्द दिए हैं: पर्याप्त तैयारी, संवेदनशीलता और धैर्य। संघर्ष और गरीबी जैसे प्रश्न पूछते समय संवेदनशीलता ही सबसे बड़ी तैयारी है।
प्रमाण पाठ में ही है: श्रेया का पहला प्रश्न है — “सुना है कि आपका बचपन संघर्षों से भरा हुआ था।” यह वाक्य बताता है कि पूछने वाले को उत्तर की दिशा पहले से मालूम थी। बिना शोध के ऐसा प्रश्न बन ही नहीं सकता।