मल्हार अध्याय 8 साक्षात्कार की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
प्रस्तुत ‘साक्षात्कार’ के आधार पर बताइए— (क) साक्षात्कार से पहले क्या-क्या तैयारियाँ की गई होंगी?
उत्तर

पाठ स्वयं कहता है — “साक्षात्कार की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि साक्षात्कारदाता के संदर्भ में कितना शोध किया गया है और प्रश्न किस प्रकार के बनाए गए हैं।” इस साक्षात्कार से पहले ये तैयारियाँ हुई होंगी —

  1. व्यक्ति के बारे में पढ़ाई — बिरजू महाराज कौन हैं, किस घराने के हैं, उनके गुरु कौन थे, उन्हें कौन-से सम्मान मिले (पद्मविभूषण) — यह सब पहले जान लिया गया, तभी बच्चे बाबूजी, चाचा, गंडा और घराने पर सीधे प्रश्न पूछ सके।
  2. विषय की समझ — कथक, लय, ताल, घराना, लहरा, लोक और शास्त्रीय नृत्य — इन शब्दों को समझे बिना ऐसे प्रश्न बन ही नहीं सकते थे।
  3. प्रश्नों की सूची बनाना और क्रम तय करना — ध्यान दीजिए, बातचीत बचपन से शुरू होती है, फिर तालीम, फिर कथक का इतिहास, फिर वर्तमान स्थिति और अंत में बच्चों-अभिभावकों के लिए संदेश। यह क्रम अपने-आप नहीं बना — पहले से सोचा गया।
  4. समय और स्थान तय करना — कब, कहाँ और कितनी देर मिलना है, इसकी अनुमति पहले ली गई होगी।
  5. साधन जुटाना — कॉपी-पेन या रिकॉर्डर, और बाद में बातचीत को लिखकर व्यवस्थित करना।
  6. मन की तैयारी — पाठ में तीन शब्द दिए हैं: पर्याप्त तैयारी, संवेदनशीलता और धैर्य। संघर्ष और गरीबी जैसे प्रश्न पूछते समय संवेदनशीलता ही सबसे बड़ी तैयारी है।
प्रमाण पाठ में ही है: श्रेया का पहला प्रश्न है — “सुना है कि आपका बचपन संघर्षों से भरा हुआ था।” यह वाक्य बताता है कि पूछने वाले को उत्तर की दिशा पहले से मालूम थी। बिना शोध के ऐसा प्रश्न बन ही नहीं सकता।
प्र2.
(ख) आप इस साक्षात्कार में और क्या-क्या प्रश्न जोड़ना चाहेंगे?
उत्तर

अच्छा प्रश्न वह है जिसका उत्तर ‘हाँ/नहीं’ में न हो, और जो पाठ में छूटी हुई किसी बात को खोले। ऐसे कुछ प्रश्न —

प्रश्नयह प्रश्न क्यों
आपके जीवन की सबसे यादगार प्रस्तुति कौन-सी रही और क्यों?कलाकार के मन का सबसे भीतरी क्षण सामने आता है।
मंच पर जाने से ठीक पहले आपके मन में क्या चलता है? क्या आपको कभी घबराहट हुई?बच्चों के अपने डर से जुड़ता है — बहुत उपयोगी उत्तर मिलता।
विदेशी दर्शक, जो हमारी कथाएँ नहीं जानते, आपके नृत्य को कैसे समझ पाते हैं?फ्रांस वाले प्रसंग को और आगे बढ़ाता।
एक नए विद्यार्थी को रोज़ कितने घंटे रियाज़ करना चाहिए और उसकी शुरुआत कैसे करनी चाहिए?व्यावहारिक मार्गदर्शन — पाठक तुरंत काम में ला सके।
क्या आपने कभी नृत्य छोड़ देने का मन बनाया? उस समय आपको किसने सँभाला?संघर्ष के दूसरे पक्ष — हार के क्षण — को छूता है।
आप नई रचना (कोरियोग्राफी) कैसे सोचते हैं — पहले संगीत बनता है या भाव?सृजन की प्रक्रिया समझ में आती है।
फिल्मों के लिए नृत्य-निर्देशन करना और मंच पर नाचना — दोनों में क्या अंतर लगता है?उनकी दूसरी दुनिया की जानकारी मिलती।
आप अपनी चित्रकारी और अपने नृत्य में कोई समानता देखते हैं?उनकी दो रुचियों को जोड़कर नया उत्तर निकलवाता।
प्रश्न बनाते समय बचें: “क्या आपको कथक पसंद है?” जैसे प्रश्नों से — इनका उत्तर एक शब्द में खत्म हो जाता है। ‘क्यों’, ‘कैसे’, ‘क्या-क्या’ से शुरू होने वाले प्रश्न ही बातचीत को आगे बढ़ाते हैं।
प्र3.
(ग) यह साक्षात्कार एक सुप्रसिद्ध कलाकार का है। यदि आपको किसी सब्जी विक्रेता, रिक्शा चालक, घरेलू सहायक या सहायिका का साक्षात्कार लेना हो तो आपके प्रश्न किस प्रकार के होंगे?
उत्तर

प्रश्न व्यक्ति के काम, दिनचर्या, कठिनाइयों और सपनों के आसपास होंगे — और सबसे बड़ी बात, वे सम्मानपूर्ण होंगे। किसी से उसकी गरीबी पर तरस खाते हुए प्रश्न पूछना साक्षात्कार नहीं, अपमान है।

किसका साक्षात्कारप्रश्न
सब्जी विक्रेताआपका दिन कितने बजे शुरू होता है? मंडी से सब्जी कैसे चुनते हैं — ताजगी कैसे पहचानते हैं? किस मौसम में काम सबसे कठिन होता है? दाम तय करते समय सबसे बड़ी मुश्किल क्या आती है? क्या आपने यह काम किसी से सीखा?
रिक्शा चालकआप रोज़ कितनी दूरी तय करते हैं? शहर का कौन-सा रास्ता आपको सबसे अच्छा लगता है और क्यों? गर्मी और बरसात में सवारी ढोना कैसा रहता है? कोई ऐसी सवारी जो आपको आज तक याद है? आप अपने बच्चों को क्या बनाना चाहते हैं?
घरेलू सहायक/सहायिकाआपके दिन की शुरुआत कैसे होती है? एक दिन में कितने घरों में काम होता है? आपको सबसे अच्छा कौन-सा काम लगता है? काम और अपने घर — दोनों को कैसे सँभालती हैं? आपको लोगों से किस तरह का व्यवहार अच्छा लगता है?
ध्यान रखने योग्य पाँच बातें: (1) पहले अपना परिचय दीजिए और अनुमति लीजिए। (2) उनके काम के समय में बाधा मत डालिए। (3) आमदनी जैसे निजी प्रश्न सीधे मत पूछिए। (4) उनकी बोली में ही बात कीजिए। (5) अंत में धन्यवाद कहिए — पाठ में लिखा है कि साक्षात्कार के लिए “संवेदनशीलता और धैर्य की आवश्यकता होती है”, और यह बात हर व्यक्ति के लिए बराबर लागू होती है, चाहे वह पद्मविभूषण हो या रिक्शा चालक।
नमूना आरंभ: “नमस्ते चाचा जी! मैं सातवीं कक्षा में पढ़ता हूँ। हमें विद्यालय से काम मिला है कि किसी कामकाजी व्यक्ति से बात करें। यदि आपके पास दस मिनट हों तो क्या मैं आपसे आपके काम के बारे में कुछ पूछ सकता हूँ?”
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