मल्हार अध्याय 8 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सबसे सही उत्तर कौन-सा है? उनके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। (1) बिरजू महाराज ने गंडा बाँधने की परंपरा में परिवर्तन क्यों किया होगा? • वे गुरु के प्रति शिष्य के निष्ठा भाव को परखना चाहते थे। • वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्वपूर्ण नहीं मानते थे। • वे नृत्य के प्रति शिष्य के लगन व समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे। • वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।
उत्तर

सही उत्तर (★ लगाइए):

विकल्पसही / गलतकारण
वे गुरु के प्रति शिष्य के निष्ठा भाव को परखना चाहते थे।★ सहीगंडा गुरु और शिष्य के बीच का पवित्र रिश्ता है। वर्षों सिखाने के बाद ही गंडा बाँधने का अर्थ है — पहले शिष्य की निष्ठा देख लेना।
वे नृत्य शिक्षण के लिए इस परंपरा को महत्वपूर्ण नहीं मानते थे।गलतवे परंपरा को महत्वपूर्ण मानते थे, तभी तो उसे छोड़ा नहीं — केवल उसका क्रम बदला।
वे नृत्य के प्रति शिष्य के लगन व समर्पण भाव को जाँचना चाहते थे।★ सहीयह उत्तर पाठ में शब्दशः है — “जब देखता हूँ कि शिष्य में सच्ची लगन है तभी गंडा बाँधता हूँ।”
वे शिष्य की भेंट देने की सामर्थ्य को परखना चाहते थे।गलतभेंट की बात उनके अपने बचपन से जुड़ी है (अम्मा ने दो कार्यक्रमों की कमाई भेंट में दी थी)। वे स्वयं भेंट को कसौटी नहीं बनाते।
क्यों: पुरानी रस्म में गुरु तालीम के आरंभ में गंडा बाँधते थे। बिरजू महाराज ने इसे उल्टा कर दिया — गंडा अब सीखने की शुरुआत का नहीं, शिष्य की परख का प्रमाण-पत्र बन गया।
ध्यान दें: प्रश्न में ही कहा गया है कि एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं — इसलिए यहाँ पहला और तीसरा, दोनों विकल्प चुनना सही है। इनमें भी तीसरा विकल्प पाठ से सीधे प्रमाणित होता है।
प्र2.
(2) “जीवन में उतार चढ़ाव तो होता ही है।” बिरजू महाराज के जीवन में किस तरह के उतार-चढ़ाव आए? • पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा। • कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी। • किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी। • नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।
उत्तर

सही उत्तर (★ लगाइए): पहला और तीसरा विकल्प।

विकल्पसही / गलतपाठ का प्रमाण
पिता के देहांत के बाद आर्थिक अभावों का सामना करना पड़ा।★ सही“मेरे बाबूजी के देहांत के बाद आर्थिक परेशानियाँ बढ़ने लगीं।” — कर्ज लेना, ज़री की साड़ियाँ जलाकर तार बेचना, रात को कई बार न खाना। यही उतार है।
कोई भी संस्था नृत्य प्रस्तुतियों के लिए आमंत्रित नहीं करती थी।गलतउल्टा लिखा है — “नृत्य के कार्यक्रमों से भी कभी-कभी पैसा आ जाता था।” कार्यक्रम मिलते तो थे।
किसी समय विशेष में घर में सुख-समृद्धि थी।★ सही“एक जमाना था जब हमलोग छोटे नवाब कहलाते थे… आठ-आठ सिपाहियों का पहरा होता था… तीन-चार लाख की कीमत के हार।” यही चढ़ाव है।
नृत्य के औपचारिक प्रशिक्षण के अवसर बहुत ही सीमित हो गए थे।गलततालीम घर में ही चलती रही — पिता और चाचा ही गुरु थे। ऐसा कहीं नहीं कहा गया।
क्यों दोनों उत्तर चाहिए: ‘उतार-चढ़ाव’ एक जोड़ा शब्द है। केवल गरीबी बताने से आधी बात बनती है; समृद्धि वाला विकल्प चुनने पर ही वह ‘चढ़ाव’ पूरा होता है जिससे जीवन का ग्राफ ऊपर-नीचे दिखाई देता है।
प्र3.
(3) बिरजू महाराज के अनुसार बच्चों को लय के साथ खेलने की अनुशंसा क्यों की जानी चाहिए? • संगीत, नृत्य, नाटक और सभी कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं। • कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। • कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है। • वर्तमान समय में कला भी एक सफल माध्यम नहीं है।
उत्तर

सही उत्तर (★ लगाइए): दूसरा और तीसरा विकल्प।

विकल्पसही / गलतपाठ का प्रमाण
संगीत, नृत्य, नाटक और सभी कलाएँ बच्चों में मानवीय मूल्यों का विकास नहीं करती हैं।गलतबिरजू महाराज ठीक इसका उल्टा कहते हैं — “लय हमें अनुशासन सिखाती है, संतुलन सिखाती है।”
कला संबंधी विषयों से जुड़ाव बच्चों के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।★ सही“इस खेल की दुनिया में संतुलन, समय का अंदाजा व सदुपयोग बच्चे के बौद्धिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।”
कला भी एक खेल है, जिसमें बहुत कुछ सीखने को मिलता है।★ सही“जैसे अन्य खेल हैं वैसे ही यह भी एक खेल है, जिसमें बहुत-कुछ सीखने को मिलता है।”
वर्तमान समय में कला भी एक सफल माध्यम नहीं है।गलतवे कहते हैं कि शास्त्रीय नृत्य की लोकप्रियता अब बढ़ रही है; निराशा की बात कहीं नहीं है।
याद रखें: बिरजू महाराज कला को ‘बोझ’ नहीं, खेल कहते हैं। यही उनकी बात का सबसे सुंदर हिस्सा है — जो चीज खेल की तरह की जाए, वह मन पर दबाव नहीं बनाती और सीखना अपने-आप हो जाता है।
प्र4.
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?
उत्तर

यह कक्षा में मिलकर करने की गतिविधि है। चर्चा को दिशा देने के लिए तीन बातें ध्यान में रखिए:

  1. पाठ से प्रमाण दीजिए — हर उत्तर के साथ पाठ की वह पंक्ति पढ़कर सुनाइए जिससे वह उत्तर निकलता है। “मुझे ऐसा लगता है” से बात नहीं बनती; “पाठ में लिखा है कि…” से बनती है।
  2. गलत विकल्प भी समझाइए — केवल यह न बताइए कि कौन-सा उत्तर सही है, यह भी बताइए कि बाकी क्यों गलत हैं। इससे पता चलता है कि आपने पूरा पाठ पढ़ा है।
  3. असहमति का स्वागत कीजिए — यदि किसी मित्र ने कोई और विकल्प चुना है तो पहले उसका कारण सुनिए, फिर अपना प्रमाण रखिए।
नमूना उत्तर: “मैंने पहले प्रश्न में तीसरा विकल्प चुना, क्योंकि बिरजू महाराज खुद कहते हैं — ‘कई वर्षों तक नृत्य सिखाने के बाद जब देखता हूँ कि शिष्य में सच्ची लगन है तभी गंडा बाँधता हूँ।’ यहाँ ‘सच्ची लगन’ शब्द ही उत्तर है। दूसरा विकल्प मैंने इसलिए नहीं चुना, क्योंकि यदि वे परंपरा को महत्वपूर्ण न मानते तो गंडा बाँधना बिलकुल बंद कर देते — उन्होंने बंद नहीं किया, केवल समय बदला।”
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