कक्षा ७ हिंदी अध्याय 7 वर्षा-बहार के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
वर्षा-बहार मुकुटधर पाण्डेय की कविता है। ‘बहार’ का अर्थ है वसंत यानी सबसे सुहावना मौसम। कवि ने वर्षा ऋतु को ही ‘बहार’ कह दिया — यानी उसके लिए वर्षा भी उतनी ही सुंदर और उल्लासभरी ऋतु है। कविता आठ पद्यांशों में वर्षा के दृश्यों की एक शृंखला बनाती है — नभ में घनघोर घटा, बिजली और गरजते बादल, बरसता पानी और बहते झरने, ठंडी हवा में हिलती डालियाँ, बागों में गाती मालिनें, तालों में प्रसन्न जलचर, ताप खोते पपीहे, नाचते मोर, गाते मेंढक, महकते गुलाब, कतार में चलते हंस और गीत गाते किसान। कविता का मुख्य भाव आनंद और प्रसन्नता है। वर्षा किसी एक के लिए नहीं, सबके लिए सुख लाती है — मनुष्य, पशु-पक्षी, जल-जीव, पेड़-पौधे, सबके लिए। इसीलिए पहली ही पंक्ति में कवि कहता है — “वर्षा-बहार सब के , मन को लुभा रही है”। अंतिम पंक्ति कविता का निष्कर्ष है — “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर।” पानी के बिना हरियाली नहीं,
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | कविता की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| बहार | वसंत; सुंदरता और उल्लास से भरा समय | “वर्षा-बहार सब के, मन को लुभा रही है” | बारिश के बाद बगीचे में फूलों की बहार आ गई। |
| नभ | आकाश, गगन | “नभ में छटा अनूठी” | नभ में काले बादल घिर आए हैं। |
| छटा | सुंदर दृश्य, शोभा | “नभ में छटा अनूठी” | सूर्यास्त के समय आकाश की छटा देखते ही बनती थी। |
| अनूठी | अनोखी, निराली, जिसके जैसी और कोई न हो | “नभ में छटा अनूठी” | दादी की कहानी कहने की शैली अनूठी है। |
| घनघोर | बहुत घना और गहरा (बादलों के लिए) | “घनघोर छा रही है” | घनघोर घटा देखकर हम भागकर घर लौट आए। |
| जलचर | जल में रहने वाले जीव — मछली, कछुआ, मेंढक आदि | “तालों में जीव जलचर” | तालाब सूखने पर जलचर जीवों पर संकट आ जाता है। |
| ताल | तालाब, पोखर | “तालों में जीव जलचर” | गाँव के ताल में कमल खिले हुए थे। |
| लखो | देखो (‘लखना’ = देखना) | “फिरते लखो पपीहे” | लखो, कैसे बादल पहाड़ों से लिपट रहे हैं! |
| पपीहा | एक पक्षी, जो वर्षा के आने पर ‘पिऊ-पिऊ’ बोलता है | “फिरते लखो पपीहे” | पहली बूँद पड़ते ही पपीहा बोल उठा। |
| ग्रीष्म / ताप | गरमी की ऋतु / गरमी, तपन | “हैं ग्रीष्म ताप खोते” | ग्रीष्म के ताप से पूरा मैदान सूख गया था। |
| मालिन | माली की पत्नी; बाग़ में फूल चुनने-सँवारने वाली स्त्री | “गाती हैं मालिनें अब” | मालिन ने टोकरी में ताज़े गेंदे सजा दिए। |
| सुगीत | सुंदर गीत, मीठा गान | “गाकर सुगीत प्यारे” | बच्चों ने प्रार्थना-सभा में एक सुगीत सुनाया। |
| सौरभ | सुगंध, महक | “सौरभ उड़ा रहा है” | रातरानी का सौरभ पूरे आँगन में भर गया। |
| आमोद | आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता | “आमोद छा रहा है” | विजय की खबर सुनते ही गाँव में आमोद छा गया। |
| मनहर | मन को हरने वाला, मनोहर | “लेते किसान मनहर” | पहाड़ों का मनहर दृश्य भुलाए नहीं भूलता। |
| भाँति | तरह, प्रकार | “इस भाँति है अनोखी” | इस भाँति काम करोगे तो कभी पूरा नहीं होगा। |
| अवनी | पृथ्वी, धरती (कविता ‘ग्रीष्म’ में) | “अवनी आतप से लगी” | वर्षा की पहली बूँद पड़ते ही अवनी महक उठी। |
| मयूख | किरण (कविता ‘ग्रीष्म’ में) | “रवि मयूख के ताप से” | भोर की पहली मयूख पर्वत-शिखर पर पड़ी। |
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- अनुमान और कल्पना से
- आपकी रचनाएँ
- शब्द से जुड़े शब्द
- कविता की रचना
- कविता का सौंदर्य
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- आपकी बात
- साक्षात्कार
- वर्षा के दृश्य
- वर्षा में ध्वनियाँ
- वर्षा से जुड़े गीत
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