भावार्थ — देखो, पपीहे इधर-उधर उड़ते फिर रहे हैं और गरमी की तपन से उन्हें छुटकारा मिल गया है; उधर वन में सारे मोर नाच रहे हैं।
विस्तार से — ‘लखो’ का अर्थ है देखो। कवि पाठक को साथ लेकर दृश्य दिखा रहा है। पपीहा वह पक्षी है जो वर्षा की प्रतीक्षा में ‘पिऊ-पिऊ’ पुकारता रहता है; पानी बरसते ही उसकी पुकार पूरी हो जाती है — इसीलिए वह ‘ग्रीष्म ताप खोते’ यानी गरमी का कष्ट भूलते हुए उड़ रहा है। मोर का नाचना वर्षा के आगमन का सबसे जाना-पहचाना चिह्न है।