प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं, उनके भावार्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं। स्तंभ 1 की पंक्तियों का स्तंभ 2 की उपयुक्त पंक्तियों से मिलान कीजिए — स्तंभ 1: 1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं 2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब 3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते 4. फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते 5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है 6. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | स्तंभ 2: 1. वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं। 2. वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं। 3. वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं। 4. हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं। 5. वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं। 6. ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं।
उत्तर
सही मिलान इस प्रकार है —
| स्तंभ 1 (कविता की पंक्ति) | मिलान | स्तंभ 2 (भावार्थ) |
|---|---|---|
| 1. पानी बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं | → 2 | वर्षा हो रही है और झरने बह रहे हैं। |
| 2. चलती हवा है ठंडी, हिलती हैं डालियाँ सब | → 6 | ठंडी हवाओं के कारण पेड़ों की सभी शाखाएँ हिल रही हैं। |
| 3. तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते | → 1 | वर्षा ऋतु में तालाबों के जीव-जंतु अति प्रसन्न हैं। |
| 4. फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते | → 3 | वर्षा आने पर लाखों पपीहे गर्मी से राहत पाते हैं। |
| 5. खिलता गुलाब कैसा, सौरभ उड़ा रहा है | → 5 | वर्षा में खिले हुए फूल जैसे गुलाब प्रकृति में सुगंध और ताजगी फैला रहे हैं। |
| 6. चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर | → 4 | हंसों की कतारें प्रकृति की सुंदरता और अनुशासन को दर्शाती हैं। |
मिलान कैसे पहचानें: हर पंक्ति में एक कुंजी-शब्द होता है — झरने, डालियाँ, जलचर, पपीहे, गुलाब, हंस। स्तंभ 2 में उसी शब्द को ढूँढ़ लीजिए, मिलान अपने आप हो जाएगा।
ध्यान दीजिए: स्तंभ 2 की तीसरी पंक्ति में ‘लाखों पपीहे’ लिखा है। कविता का ‘लखो’ वास्तव में ‘देखो’ है, ‘लाखों’ नहीं। मिलान तो 4 → 3 ही रहेगा, पर सही अर्थ है — “देखो, पपीहे इधर-उधर फिर रहे हैं और गरमी का ताप भूल रहे हैं।”