कविता में तीन गीत गाने वाले हैं — मालिनें, मेंढक और किसान।
| कौन | कविता की पंक्ति | क्यों गा रहे हैं |
|---|---|---|
| मालिनें | “बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” | वर्षा से बाग़ हरे-भरे हो गए हैं और फूल खिल उठे हैं। जिस बाग़ को वे सँवारती हैं, वह सुंदर हो गया — इसी खुशी में वे गा रही हैं। |
| मेंढक | “मेंढक लुभा रहे हैं, गाकर सुगीत प्यारे” | वर्षा मेंढकों की अपनी ऋतु है। पानी भरते ही उनका जीवन-काल शुरू होता है, इसलिए वे टर्र-टर्र करते हैं — कवि को यही उनका ‘सुगीत’ लगता है। |
| किसान | “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर” | वर्षा किसान के लिए सबसे बड़ी खुशखबरी है। पानी आया तो बुवाई होगी और फ़सल होगी। खेत में काम करते हुए गीत गाने से थकान भी कम लगती है। |