मल्हार अध्याय 7 अनुमान और कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए— (क) “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर” कविता में कहा गया है कि वर्षा पर सारे संसार की शोभा निर्भर है। वर्षा के अभाव में मानव जीवन और पशु-पक्षियों पर क्या-क्या प्रभाव पड़ सकता है?
उत्तर

वर्षा न हो तो सूखा (अकाल) पड़ जाता है और उसका असर हर जीव पर पड़ता है।

किस परक्या-क्या प्रभाव
मानव जीवन परपीने के पानी की कमी; कुएँ, हैंडपंप और नल सूखना; खेतों में बुवाई न हो पाना; फ़सल सूखना और अनाज महँगा हो जाना; किसानों पर कर्ज़ और तंगी; काम की तलाश में गाँव से शहर की ओर पलायन; गंदे पानी से बीमारियाँ; बच्चों की पढ़ाई छूट जाना।
पशुओं परचरागाहों की घास सूख जाना, चारे का संकट; तालाब सूखने से प्यास; दूध का उत्पादन घटना; कमज़ोरी और बीमारी से पशुओं की मृत्यु।
पक्षियों परपीने के पानी और कीड़े-मकोड़ों का न मिलना; घोंसला बनाने और अंडे देने का समय बिगड़ना; कई पक्षियों का दूसरे क्षेत्रों में उड़ जाना; पपीहा और मोर जैसे वर्षा-प्रिय पक्षियों का दिखना बंद हो जाना।
जलचर जीवों परताल-पोखर सूखते ही मछलियाँ, कछुए और मेंढक सबसे पहले मरते हैं — इनके पास जाने के लिए दूसरी जगह नहीं होती।
पेड़-पौधों परपत्ते झड़ना, फूल-फल न आना, नए पौधों का न उगना, हरियाली की जगह धूल और सूखी ज़मीन।
यही कवि की बात है: कविता के सारे सुंदर दृश्य — नाचता मोर, महकता गुलाब, गाता किसान — पानी के बिना एक भी नहीं बचेगा। इसीलिए कवि ने कहा कि जगत की शोभा वर्षा पर निर्भर है।
Check it yourself: अपने क्षेत्र में पिछले किसी सूखे या कम बारिश वाले साल के बारे में घर के बड़ों से पूछिए — पानी कहाँ से लाना पड़ा, फ़सल का क्या हुआ, पशुओं को चारा कैसे मिला। यह असली जानकारी आपके उत्तर को बहुत मज़बूत बना देगी।
प्र2.
(ख) “बिजली चमक रही है, बादल गरज रहे हैं” – बिजली चमकना और बादल का गरजना प्राकृतिक घटनाएँ हैं। इन घटनाओं का लोगों के जीवन पर क्या-क्या प्रभाव हो सकता है? (संकेत— आप सकारात्मक और नकारात्मक यानी अच्छे और बुरे, दोनों प्रकार के प्रभावों के बारे में सोच सकते हैं।)
उत्तर

इन घटनाओं के अच्छे और बुरे — दोनों तरह के प्रभाव होते हैं।

सकारात्मक (अच्छे) प्रभावनकारात्मक (बुरे) प्रभाव
वर्षा आने की पहली सूचना मिल जाती है — किसान बुवाई की तैयारी शुरू कर देता है।खुले खेत में, पेड़ के नीचे या ऊँची जगह पर खड़े व्यक्ति पर बिजली गिरने का ख़तरा।
गरमी से राहत मिलने की आशा बँधती है; मन प्रसन्न हो जाता है।बिजली गिरने से पशुओं की मृत्यु, पेड़ों का जलना और घरों में आग लग जाना।
बिजली की चमक से हवा की नाइट्रोजन ऐसे रूप में बदल जाती है जो वर्षा के साथ मिट्टी में पहुँचकर खाद का काम करती है।बिजली के उपकरण, ट्रांसफ़ॉर्मर और मोबाइल टावर ख़राब हो जाना; बिजली की आपूर्ति बंद होना।
बच्चों और कवियों के लिए यह प्रकृति का सबसे रोमांचक दृश्य होता है — मल्हार जैसे राग और अनेक लोकगीत इसी से जन्मे हैं।तेज़ गरज से छोटे बच्चे और पशु डर जाते हैं; रात में यात्रा और खेत का काम रुक जाता है।
सुरक्षा की बात: बिजली कड़कने पर खुले मैदान में या अकेले खड़े पेड़ के नीचे मत रुकिए। पक्के घर के भीतर चले जाइए, खिड़की से दूर रहिए और बिजली के उपकरणों का प्लग निकाल दीजिए।
ध्यान दीजिए: कविता में कवि ने केवल सुंदर पक्ष लिया है, क्योंकि उसका उद्देश्य वर्षा का उत्सव दिखाना है। पर सच यही है कि एक ही घटना किसी के लिए वरदान और किसी के लिए ख़तरा हो सकती है।
प्र3.
(ग) “करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे”– इस पंक्ति को ध्यान में रखते हुए वर्षा आने पर पक्षियों और जीवों की खुशी का वर्णन कीजिए। वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते होंगे?
उत्तर

नमूना उत्तर —

पहली बूँद पड़ते ही मानो पूरे वन में खबर फैल जाती है। मोर अपने चमकीले पंख फैलाकर गोल-गोल घूमने लगता है और बीच-बीच में ‘म्याऊँ-म्याऊँ’ जैसी लंबी पुकार लगाता है। पपीहा डाल-डाल फिरता हुआ ‘पिऊ-पिऊ’ बोलता है — जिस पानी की वह प्रतीक्षा कर रहा था, वह आ गया। मेंढक कीचड़ और भरे हुए गड्ढों में कूद पड़ते हैं और सारी रात टर्र-टर्र का समवेत गान करते हैं। तालाब के भीतर मछलियाँ ऊपर आकर पानी की सतह पर छपाके मारती हैं। कोयल और बुलबुल भीगी डालियों पर बैठकर पंख फड़फड़ाती हैं और चोंच से पानी की बूँदें पीती हैं। चींटियाँ अपने अंडे लेकर ऊँची जगह की ओर पंक्ति बाँधकर चल पड़ती हैं। हिरन और नीलगाय, जो दिन भर छाया में छिपे रहते थे, अब खुले मैदान में निकल आते हैं और भीगी घास चरते हैं।

वे अपनी प्रसन्नता कैसे व्यक्त करते हैं —

  • आवाज़ से: मोर की पुकार, पपीहे की ‘पिऊ’, मेंढकों की टर्र-टर्र, पक्षियों का कलरव।
  • गति से: नाचना, उड़ान भरना, कूदना, पानी में छपाके मारना।
  • व्यवहार से: घोंसले बनाना, जोड़े बनाना, अंडे देने की तैयारी करना — क्योंकि वर्षा के बाद भोजन आसानी से मिलता है।
  • शरीर से: पंख फैलाना, पंख फड़फड़ाकर पानी झाड़ना, धूल में लोटने की जगह भीगी मिट्टी में बैठना।
ऐसा क्यों होता है: गरमी में इन जीवों के लिए पानी और भोजन दोनों की कमी हो जाती है। वर्षा आते ही घास उगती है, कीड़े-मकोड़े निकलते हैं और तालाब भर जाते हैं। यानी वर्षा उनके लिए भोजन, पानी और संतान — तीनों का मौसम है। उनकी खुशी केवल भाव नहीं, जीवन की ज़रूरत से जुड़ी है।
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ