वर्षा न हो तो सूखा (अकाल) पड़ जाता है और उसका असर हर जीव पर पड़ता है।
| किस पर | क्या-क्या प्रभाव |
|---|---|
| मानव जीवन पर | पीने के पानी की कमी; कुएँ, हैंडपंप और नल सूखना; खेतों में बुवाई न हो पाना; फ़सल सूखना और अनाज महँगा हो जाना; किसानों पर कर्ज़ और तंगी; काम की तलाश में गाँव से शहर की ओर पलायन; गंदे पानी से बीमारियाँ; बच्चों की पढ़ाई छूट जाना। |
| पशुओं पर | चरागाहों की घास सूख जाना, चारे का संकट; तालाब सूखने से प्यास; दूध का उत्पादन घटना; कमज़ोरी और बीमारी से पशुओं की मृत्यु। |
| पक्षियों पर | पीने के पानी और कीड़े-मकोड़ों का न मिलना; घोंसला बनाने और अंडे देने का समय बिगड़ना; कई पक्षियों का दूसरे क्षेत्रों में उड़ जाना; पपीहा और मोर जैसे वर्षा-प्रिय पक्षियों का दिखना बंद हो जाना। |
| जलचर जीवों पर | ताल-पोखर सूखते ही मछलियाँ, कछुए और मेंढक सबसे पहले मरते हैं — इनके पास जाने के लिए दूसरी जगह नहीं होती। |
| पेड़-पौधों पर | पत्ते झड़ना, फूल-फल न आना, नए पौधों का न उगना, हरियाली की जगह धूल और सूखी ज़मीन। |