मल्हार अध्याय 7 आपकी रचनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कविता में वर्णन है कि मोर नृत्य कर रहे हैं और मेंढक सुगीत गा रहे हैं। इस दृश्य को अपने शब्दों में चित्रित कीजिए।
उत्तर

यह अपने शब्दों में दृश्य-चित्रण (शब्द-चित्र) लिखने का प्रश्न है।

अच्छे उत्तर में क्या होना चाहिए —

  • कम-से-कम तीन इंद्रियों का प्रयोग — जो दिखाई दे, जो सुनाई दे, जो गंध या स्पर्श से महसूस हो।
  • कविता के अपने शब्द बीच-बीच में — मोर, वन, मेंढक, सुगीत।
  • अपने आस-पास की एक सच्ची बात जोड़ना — जिससे चित्र नकली न लगे।

नमूना उत्तर:

“आकाश में काले बादल घिर आए हैं और दिन में ही हल्का अँधेरा-सा हो गया है। ठंडी हवा का पहला झोंका आता है और आम के पेड़ की डालियाँ झूम उठती हैं। तभी वन के किनारे से एक मोर निकलता है। वह अपने नीले-हरे पंख धीरे-धीरे खोलता है — जैसे किसी ने रंगों का पंखा फैला दिया हो। बूँदें उसके पंखों पर मोती-सी चमकती हैं। वह गोल घूमता है, गरदन उठाकर लंबी पुकार लगाता है, और दूसरे मोर भी एक-एक करके नाचने लगते हैं। नीचे, गाँव के किनारे वाले गड्ढे में पानी भर गया है। वहाँ मेंढकों की पूरी मंडली बैठी है। पहले एक बोलता है — टर्र! फिर दस-बीस मिलकर टर्र-टर्र का ऐसा गान छेड़ते हैं कि लगता है वन में कोई उत्सव चल रहा हो। भीगी मिट्टी की सोंधी गंध चारों ओर फैली है। मोर का नृत्य और मेंढकों का गीत — मानो वर्षा के स्वागत में प्रकृति ने अपना अपना कार्यक्रम प्रस्तुत कर दिया हो।”

Tip: दृश्य-चित्रण में ‘बहुत सुंदर था’ जैसे शब्द मत लिखिए। उसकी जगह यह लिखिए कि क्या दिखा — पाठक स्वयं तय कर लेगा कि सुंदर था।
प्र2.
(ख) वर्षा से जुड़ी किसी प्राचीन कथा या लोककथा को इस कविता से जोड़कर एक कहानी तैयार कीजिए।
उत्तर

यह रचनात्मक लेखन का प्रश्न है। पहले कोई एक वर्षा-कथा चुनिए, फिर उसमें कविता के दृश्य पिरो दीजिए।

चुनने के लिए कुछ प्रसिद्ध कथाएँ —

  • तानसेन और राग मल्हार — गाने से वर्षा हो जाने की कथा (आपकी पुस्तक का नाम भी मल्हार इसी से जुड़ा है)।
  • इंद्र और गोवर्धन — मूसलधार वर्षा से गाँव को बचाने की कथा।
  • मेंढक-मेंढकी का विवाह — सूखे के समय गाँवों में की जाने वाली लोक-परंपरा।
  • चातक (पपीहा) की कथा — जो केवल स्वाति नक्षत्र की बूँद पीता है, इसीलिए वर्षा की प्रतीक्षा करता है।

कहानी बनाने का तरीका — (1) समय और जगह बताइए, (2) समस्या दिखाइए — सूखा, (3) कोई पात्र कुछ करे, (4) वर्षा आए और कविता के दृश्य दिखने लगें, (5) अंत में कविता की पंक्ति जोड़ दीजिए।

नमूना उत्तर (संक्षेप में):

“बहुत पुरानी बात है। एक गाँव में लगातार तीन वर्ष पानी नहीं बरसा। ताल सूख गए, मालिन के बाग़ के गुलाब मुरझा गए और वन का मोर नाचना भूल गया। गाँव की बूढ़ी दादी ने बताया कि पहले जब वर्षा रूठ जाती थी, तब लोग मिलकर मल्हार गाते थे। बच्चों ने ठान लिया — वे रोज़ शाम को ताल के किनारे बैठकर गाएँगे। पहले दिन कुछ नहीं हुआ। दूसरे दिन भी नहीं। सातवें दिन जब वे गा रहे थे, एक पपीहा पास की डाल पर आ बैठा और ‘पिऊ-पिऊ’ बोल उठा। बच्चों ने आकाश की ओर देखा — नभ में छटा अनूठी थी, घनघोर बादल छा रहे थे। बिजली चमकी, बादल गरजे और पहली बूँद माटी पर गिरी। उसी रात ताल भर गया, मेंढकों ने गीत छेड़ दिया और भोर होते-होते वन में मोर नाचने लगे। मालिन फिर से गाती हुई बाग़ में फूल चुनने आई और किसान गीत गाता हुआ खेत की ओर चला। दादी ने मुस्कराकर कहा — ‘देखा, सारे जगत की शोभा इसी वर्षा के ऊपर निर्भर है।’”

Tip: कहानी में कविता की कम-से-कम दो पंक्तियाँ ज्यों-की-त्यों रखिए। इससे कहानी और कविता का जोड़ साफ़ दिखाई देगा।
प्र3.
(ग) इस कविता से प्रेरणा लेकर एक चित्र बनाइए। उसमें आपने क्या-क्या बनाया है और क्यों?
उत्तर

यह चित्रकला और लेखन — दोनों का प्रश्न है। चित्र आप बनाइए; यहाँ यह बताया गया है कि उसमें क्या-क्या आना चाहिए और उसका विवरण कैसे लिखें।

चित्र का भागक्या बनाइएकविता की पंक्ति जिससे लिया
ऊपरी भाग (आकाश)गहरे काले-नीले बादल, एक टेढ़ी चमकती बिजली, तिरछी बरसती बूँदें“नभ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है”
पहाड़ी / पृष्ठभूमिपहाड़ से गिरता झरना, हरे-भरे पेड़ जिनकी डालियाँ एक ओर झुकी हों“झरने भी ये बहे हैं” / “हिलती हैं डालियाँ सब”
बीच का भागपंख फैलाकर नाचता मोर“करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे”
नीचे बाईं ओरपानी से भरा ताल, उसमें मछलियाँ और किनारे पत्थर पर बैठा मेंढक“तालों में जीव जलचर, अति हैं प्रसन्न होते”
नीचे दाईं ओरखेत में हल या रोपाई करता किसान, मुँह पर मुस्कान“गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर”
कोने मेंबाग़ का एक खिला हुआ गुलाब और टोकरी लिए मालिन; आकाश में कतार बाँधे उड़ते हंस“खिलता गुलाब कैसा…” / “बाँधे कतार सुंदर”

नमूना विवरण: “मैंने अपने चित्र में सबसे ऊपर घने बादल और एक चमकती बिजली बनाई, क्योंकि कविता वहीं से शुरू होती है। बीच में नाचता मोर इसलिए बनाया कि वही वर्षा की खुशी का सबसे बड़ा चिह्न है। नीचे भरा हुआ ताल और मेंढक बनाया, क्योंकि कवि कहता है कि जलचर जीव अति प्रसन्न होते हैं। दाईं ओर किसान इसलिए बनाया कि वर्षा का सबसे बड़ा लाभ उसी को मिलता है। मैंने पूरे चित्र में हरा, नीला और भूरा रंग अधिक भरा, क्योंकि ये तीनों वर्षा ऋतु के रंग हैं।”

Tip: चित्र के नीचे एक पंक्ति शीर्षक की तरह लिख दीजिए — “सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर।” चित्र का अर्थ तुरंत खुल जाएगा।
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