मल्हार अध्याय 6 गिरिधर कविराय की कुंडलिया के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ में गिरिधर कविराय की दो कुंडलियाँ हैं। पहली कुंडलिया का संदेश है — बिना सोचे-समझे किया गया काम बाद में पछतावा देता है । ऐसा व्यक्ति अपना काम भी बिगाड़ लेता है और दुनिया में हँसी का पात्र भी बनता है। पहली कुंडलिया आगे कहती है कि जग की हँसी झेलने वाले का चित्त बेचैन रहता है। तब अच्छा खान-पान, सम्मान और राग-रंग — कुछ भी उसे अच्छा नहीं लगता। यह दुख टालने से भी नहीं टलता और मन में काँटे-सा खटकता रहता है। दूसरी कुंडलिया का संदेश है — बीती बातों को भुला दो और आगे की सुध लो । जो काम सहज रूप से बन रहा हो, मन उसी में लगाओ। ऐसा करने से कोई दुर्जन हँस नहीं पाएगा और मन में कोई खोट या अपराधबोध नहीं रहेगा। कुंडलिया छह पंक्तियों का छंद है — पहले दो पंक्तियों का दोहा , फिर चार पंक्तियों का रोला । इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि जिस शब्द से कुंडलिया शुरू होती है, उसी शब्द पर वह समाप्त भी होती है — जैसे “ब

  1. मेरी समझ से
  2. पंक्तियों पर चर्चा
  3. मिलकर करें मिलान
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. शब्द से जुड़े शब्द
  7. कविता की रचना
  8. काल से जुड़े शब्द
  9. आपकी बात
  10. हँसी
  11. सोच-समझकर
  12. आज की पहेली
  13. खोजबीन के लिए
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