कक्षा ७ हिंदी अध्याय 6 गिरिधर कविराय की कुंडलिया के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

पाठ में गिरिधर कविराय की दो कुंडलियाँ हैं। पहली कुंडलिया का संदेश है — बिना सोचे-समझे किया गया काम बाद में पछतावा देता है । ऐसा व्यक्ति अपना काम भी बिगाड़ लेता है और दुनिया में हँसी का पात्र भी बनता है। पहली कुंडलिया आगे कहती है कि जग की हँसी झेलने वाले का चित्त बेचैन रहता है। तब अच्छा खान-पान, सम्मान और राग-रंग — कुछ भी उसे अच्छा नहीं लगता। यह दुख टालने से भी नहीं टलता और मन में काँटे-सा खटकता रहता है। दूसरी कुंडलिया का संदेश है — बीती बातों को भुला दो और आगे की सुध लो । जो काम सहज रूप से बन रहा हो, मन उसी में लगाओ। ऐसा करने से कोई दुर्जन हँस नहीं पाएगा और मन में कोई खोट या अपराधबोध नहीं रहेगा। कुंडलिया छह पंक्तियों का छंद है — पहले दो पंक्तियों का दोहा , फिर चार पंक्तियों का रोला । इसकी सबसे बड़ी पहचान यह है कि जिस शब्द से कुंडलिया शुरू होती है, उसी शब्द पर वह समाप्त भी होती है — जैसे “ब

त्वरित पुनरावृत्ति
शब्द / पंक्तिअर्थकुंडलिया में प्रयोगअपने वाक्य में प्रयोग
बिचारेविचार करके, सोच-समझकर“बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय”बिना बिचारे लिया गया निर्णय अकसर उलटा पड़ता है।
पछितायपछताता है, अफ़सोस करता है“सो पाछे पछिताय”समय बीत जाने पर पछिताय कोई लाभ नहीं।
होत हँसायहँसी का पात्र बनता है“जग में होत हँसाय”बिना तैयारी मंच पर जाकर वह जग में होत हँसाय।
चित्तमन, अंतःकरण“चित्त में चैन न पावै”परीक्षा से पहले उसका चित्त कहीं नहीं लगता था।
सन्मानसम्मान, आदर“खान पान सन्मान राग रंग”गुरु का सन्मान करना विद्यार्थी का पहला धर्म है।
मनहिं न भावैमन को अच्छा नहीं लगता“राग रंग मनहिं न भावै”बुखार में उसे मीठा भी मनहिं न भावै।
टरत न टारेटालने से भी नहीं टलता“दुःख कछु टरत न टारे”गलती से हुआ नुकसान टरत न टारे।
खटकतचुभता है, अखरता है“खटकत है जिय माहिं”वह कड़वी बात आज भी मन में खटकत है।
जियजी, हृदय, मन“खटकत है जिय माहिं”माँ की याद जिय में बसी रहती है।
बीतीबीता हुआ समय, अतीत“बीती ताहि बिसारि दे”बीती बातों को याद करके दुखी होना बेकार है।
बिसारि देभुला दे“बीती ताहि बिसारि दे”पुराने झगड़े बिसारि दे और आगे बढ़।
सुधि लेइसुध ले, ध्यान दे, खबर रख“आगे की सुधि लेइ”अपने स्वास्थ्य की सुधि लेइ, तभी काम कर पाओगे।
चित देइमन लगा, ध्यान दे“ताही में चित देइ”पढ़ते समय पूरा चित देइ, तभी याद रहेगा।
दुर्जनबुरा व्यक्ति, दुष्ट“दुर्जन हँसै न कोइ”दुर्जन की बातों पर ध्यान मत दीजिए।
खतादोष, गलती, कमी“चित्त में खता न पावै”सच्चे मन से किए काम में कोई खता नहीं निकलती।
परतीतीप्रतीति, विश्वास, भरोसा“यहै करु मन परतीती”अपनी मेहनत पर परतीती रखिए।
  1. मेरी समझ से
  2. पंक्तियों पर चर्चा
  3. मिलकर करें मिलान
  4. सोच-विचार के लिए
  5. अनुमान और कल्पना से
  6. शब्द से जुड़े शब्द
  7. कविता की रचना
  8. काल से जुड़े शब्द
  9. आपकी बात
  10. हँसी
  11. सोच-समझकर
  12. आज की पहेली
  13. खोजबीन के लिए
क्या यह उपयोगी रहा?