मल्हार अध्याय 6 पंक्तियों पर चर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”
उत्तर

अर्थ — जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम कर डालता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। वह अपना बना-बनाया काम भी बिगाड़ लेता है और दुनिया में हँसी का पात्र बन जाता है।

शब्द-दर-शब्द —
“बिना बिचारे जो करै” = जो बिना विचार किए काम करता है
“सो पाछे पछिताय” = वह बाद में पछताता है
“काम बिगारे आपनो” = अपना ही काम बिगाड़ लेता है
“जग में होत हँसाय” = संसार में उसकी हँसी होती है

इन दो पंक्तियों में तीन बातें एक साथ कही गई हैं

  • पछतावा — जो काम हो चुका, उसे लौटाया नहीं जा सकता; बचता है सिर्फ़ अफ़सोस।
  • अपनी हानि — नुकसान किसी और का नहीं, “आपनो” यानी अपना ही होता है।
  • सामाजिक हानि — लोगों के बीच साख गिर जाती है।
विचार: कवि ने काम बिगड़ने से पहले “पछिताय” रखा है — यानी सबसे पहले चोट मन पर लगती है, फिर काम पर, फिर समाज में। यह क्रम ही पंक्ति को गहरा बनाता है। एक और सुंदरता देखिए — “बिना बिचारे” और “बिगारे”, “पछिताय” और “हँसाय” — पूरी पंक्ति ‘ब’ और ‘आय’ की ध्वनियों से बँधी हुई है।
आज के जीवन से उदाहरण: बिना पढ़े परीक्षा में उत्तर लिख देना, बिना जाँचे कोई संदेश आगे भेज देना, गुस्से में कोई बात कह देना — तीनों में पहले जल्दबाज़ी होती है, फिर पछतावा।
प्र2.
(ख) “बीती ताहि बिसारि दे आगे की सुधि लेइ। जो बनि आवै सहज में ताही में चित देइ॥”
उत्तर

अर्थ — जो बीत गया उसे भुला दो और आने वाले समय की सुध लो। जो काम सहज रूप से बनता चला जाए, अपना पूरा मन उसी में लगाओ।

“बीती ताहि बिसारि दे” = बीती हुई बात को भुला दे
“आगे की सुधि लेइ” = आगे की सुध ले, भविष्य पर ध्यान दे
“जो बनि आवै सहज में” = जो काम सहज ही बन रहा हो
“ताही में चित देइ” = उसी में मन लगा

यह पंक्ति दो सलाहें एक साथ देती है — एक छोड़ने की, एक पकड़ने की। बीती बात पकड़े रहना मन की शक्ति व्यर्थ खर्च करना है; वही शक्ति यदि आगे के काम में लगे तो सफलता मिलती है।

विचार: ‘सहज’ शब्द यहाँ बहुत सोच-समझकर रखा गया है। इसका अर्थ आलस नहीं, स्वाभाविक है — यानी जो काम आपकी क्षमता, परिस्थिति और साधनों में बैठता हो। कवि यह नहीं कहता कि मेहनत मत करो; वह कहता है कि असंभव के पीछे भागकर मन मत बिखेरो।
अपने शब्दों में: “जो हो गया सो हो गया — अब आगे क्या करना है, यह सोचो। और जो काम अपने हाथ में है, उसमें पूरा मन लगाओ।”
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