प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय। काम बिगारे आपनो जग में होत हँसाय॥”
उत्तर
अर्थ — जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे कोई काम कर डालता है, उसे बाद में पछताना पड़ता है। वह अपना बना-बनाया काम भी बिगाड़ लेता है और दुनिया में हँसी का पात्र बन जाता है।
शब्द-दर-शब्द —
“बिना बिचारे जो करै” = जो बिना विचार किए काम करता है
“सो पाछे पछिताय” = वह बाद में पछताता है
“काम बिगारे आपनो” = अपना ही काम बिगाड़ लेता है
“जग में होत हँसाय” = संसार में उसकी हँसी होती है
“बिना बिचारे जो करै” = जो बिना विचार किए काम करता है
“सो पाछे पछिताय” = वह बाद में पछताता है
“काम बिगारे आपनो” = अपना ही काम बिगाड़ लेता है
“जग में होत हँसाय” = संसार में उसकी हँसी होती है
इन दो पंक्तियों में तीन बातें एक साथ कही गई हैं —
- पछतावा — जो काम हो चुका, उसे लौटाया नहीं जा सकता; बचता है सिर्फ़ अफ़सोस।
- अपनी हानि — नुकसान किसी और का नहीं, “आपनो” यानी अपना ही होता है।
- सामाजिक हानि — लोगों के बीच साख गिर जाती है।
विचार: कवि ने काम बिगड़ने से पहले “पछिताय” रखा है — यानी सबसे पहले चोट मन पर लगती है, फिर काम पर, फिर समाज में। यह क्रम ही पंक्ति को गहरा बनाता है। एक और सुंदरता देखिए — “बिना बिचारे” और “बिगारे”, “पछिताय” और “हँसाय” — पूरी पंक्ति ‘ब’ और ‘आय’ की ध्वनियों से बँधी हुई है।
आज के जीवन से उदाहरण: बिना पढ़े परीक्षा में उत्तर लिख देना, बिना जाँचे कोई संदेश आगे भेज देना, गुस्से में कोई बात कह देना — तीनों में पहले जल्दबाज़ी होती है, फिर पछतावा।