प्र1.
पाठ को एक बार पुन: पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए। (क) “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” कविता में बिना विचार किए कार्य करने के क्या नुकसान बताए गए हैं?
उत्तर
कविता में पाँच नुकसान गिनाए गए हैं। ये सब पहली कुंडलिया में एक के बाद एक आते हैं —
| क्रम | नुकसान | कविता की पंक्ति |
|---|---|---|
| 1 | पछतावा — बाद में अफ़सोस करना पड़ता है। | “सो पाछे पछिताय” |
| 2 | अपना काम बिगड़ जाना — हानि किसी और की नहीं, अपनी ही होती है। | “काम बिगारे आपनो” |
| 3 | संसार में हँसी — लोग मज़ाक उड़ाते हैं, साख गिरती है। | “जग में होत हँसाय” |
| 4 | मन की बेचैनी — चित्त को चैन नहीं मिलता; खान-पान, सम्मान, राग-रंग कुछ भी अच्छा नहीं लगता। | “चित्त में चैन न पावै। खान पान सन्मान राग रंग मनहिं न भावै॥” |
| 5 | न टलने वाला दुख — वह पीड़ा टालने पर भी नहीं टलती, मन में काँटे-सी खटकती रहती है। | “दुःख कछु टरत न टारे। खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे॥” |
ध्यान देने की बात: कवि ने नुकसानों को एक सीढ़ी की तरह रखा है — पहले काम बिगड़ता है, फिर समाज हँसता है, फिर मन अशांत होता है, और अंत में वह अशांति स्थायी दुख बन जाती है। इसी क्रम के कारण छोटी-सी कुंडलिया इतनी असरदार लगती है।