प्र1.
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए— (क) आपने पढ़ा है कि “बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय...।” कल्पना कीजिए कि आपके एक मित्र ने बिना सोचे-समझे एक बड़ा निर्णय लिया है। वह निर्णय क्या था और उसका क्या प्रभाव पड़ा? इसके बारे में एक रोचक कहानी अपने साथियों के साथ मिलकर बनाइए और कक्षा में प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर
यह समूह-गतिविधि है। कहानी बनाते समय ये चार सीढ़ियाँ ध्यान में रखिए — इससे कहानी अपने आप रोचक बन जाती है।
- जल्दबाज़ी का क्षण — मित्र ने बिना सोचे क्या तय किया? (एक वाक्य में)
- तुरंत का असर — शुरू में तो सब ठीक लगा। यहीं पाठक की उत्सुकता बनती है।
- पछतावे का मोड़ — फिर वह चूक सामने आई जो उसने नहीं सोची थी।
- सीख — अंत में मित्र ने क्या समझा? कुंडलिया की एक पंक्ति यहाँ जोड़ दीजिए।
नमूना कहानी: “पाँच सौ रुपये का पौधा — मेरे मित्र रोहन को पौधों का बहुत शौक है। एक दिन मेले में एक आदमी बोला — ‘यह विदेशी पौधा है, महीने भर में फल दे देगा, केवल पाँच सौ रुपये।’ रोहन ने सोचा भी नहीं। उसने अपनी पूरी जमा-पूँजी — वह पैसा जो वह साइकिल की घंटी के लिए बचा रहा था — तुरंत दे दी। घर आकर उसने गमला सबसे अच्छी जगह रखा, रोज़ पानी दिया, तीन दिन तक दोस्तों को बुला-बुलाकर दिखाया। दसवें दिन पौधे की पत्तियाँ झड़ने लगीं। पंद्रहवें दिन माली चाचा ने देखकर कहा — ‘बेटा, यह तो साधारण झाड़ी है, इसकी जड़ ही काटकर लगाई गई थी। दो रुपये की चीज़ है।’ रोहन कुछ बोल नहीं पाया। उस रात उसे नींद नहीं आई — जैसा कवि ने कहा है, ‘खटकत है जिय माहिं कियो जो बिना बिचारे’। अगले दिन उसने अपनी कॉपी के पहले पन्ने पर लिखा — ‘कोई भी चीज़ खरीदने से पहले एक रात सोचूँगा।’ आज भी वह पन्ना वैसे ही लगा है।”
प्रस्तुति का सुझाव: कहानी को तीन भूमिकाओं में बाँट लीजिए — मित्र, विक्रेता और सुनाने वाला (सूत्रधार)। मंच पर संवाद बोलिए और अंत में कुंडलिया की पंक्ति सब मिलकर एक साथ बोलिए। इससे प्रस्तुति यादगार बन जाएगी।