प्र1.
“बिना बिचारे जो करै सो पाछे पछिताय।” (क) आज के समय में कुछ लोग जल्दी में कार्य कर देते हैं या जल्दी में निर्णय ले लेते हैं। कुछ ऐसी स्थितियाँ बताइए जहाँ जल्दबाजी में निर्णय लेना या कार्य करना हानिकारक हो सकता है।
उत्तर
जल्दबाज़ी सबसे अधिक वहाँ नुकसान करती है जहाँ किया हुआ काम वापस नहीं लिया जा सकता। ऐसी कुछ स्थितियाँ —
| स्थिति | जल्दबाज़ी में क्या होता है | संभावित हानि |
|---|---|---|
| सड़क पार करना | बिना दाएँ-बाएँ देखे दौड़ लगाना; बिना हेलमेट बाइक चलाना | दुर्घटना — जिसकी भरपाई कोई नहीं कर सकता |
| मोबाइल पर आया संदेश | लिंक पर क्लिक करना, ओ.टी.पी. बता देना, अनजान क्यू.आर. कोड स्कैन करना | जमा पैसा एक क्षण में चला जाना |
| सोशल मीडिया | बिना जाँचे कोई ख़बर या तस्वीर आगे भेज देना | अफ़वाह फैलना, किसी निर्दोष को बदनामी, कभी-कभी क़ानूनी मुसीबत |
| परीक्षा | प्रश्न पूरा पढ़े बिना उत्तर लिखना शुरू कर देना | पूरा उत्तर ग़लत; समय भी गया और अंक भी |
| गुस्से में बोलना | बिना सोचे कड़वी बात कह देना | रिश्ता टूटना — कही हुई बात लौटती नहीं |
| कोई चीज़ खरीदना | “आज ही आख़िरी दिन” देखकर तुरंत पैसा दे देना | ख़राब या नक़ली सामान, बचत का नुकसान |
| दवा लेना | बिना डॉक्टर से पूछे कोई भी गोली खा लेना | तबीयत और बिगड़ना |
| किसी पर आरोप लगाना | बिना पूरी बात जाने किसी को दोषी कह देना | निर्दोष को चोट और अपने मन में स्थायी पछतावा |
पहचान का सूत्र: कोई भी काम करने से पहले स्वयं से एक प्रश्न पूछिए — “क्या यह वापस लिया जा सकता है?” यदि उत्तर ‘नहीं’ है, तो वहाँ रुककर सोचना अनिवार्य है। यही गिरिधर की “बिना बिचारे” वाली चेतावनी का आज का रूप है।