प्र1.
“खान पान सन्मान” इस पंक्ति के तीनों शब्दों में केवल एक मात्रा का बार-बार उपयोग किया गया है। (आ की मात्रा) ऐसे ही दो वाक्य नीचे दिए गए हैं जिसमें केवल एक मात्रा का उपयोग किया गया है— नीली नदी धीमी थी। चींटी चीनी जीम गई। अब आप इसी प्रकार के वाक्य अलग-अलग मात्राओं के लिए बनाइए। ध्यान रहे, आपके वाक्यों का कोई न कोई अर्थ होना चाहिए। आप एक वाक्य में केवल एक मात्रा को बार-बार या बिना मात्रा वाले शब्दों का ही उपयोग कर सकते हैं। (मात्रा — आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ)
उत्तर
नियम दो हैं — (1) वाक्य में केवल एक ही मात्रा आए, (2) बाक़ी शब्द बिना मात्रा वाले हों, और वाक्य का कोई अर्थ ज़रूर निकले। नमूना तालिका —
| मात्रा | वाक्य | जाँच |
|---|---|---|
| आ ( ा ) | काका बाजार जाकर आम लाया। | का-का, बा-जा-र, जा-क-र, आ-म, ला-या — सब में केवल ‘ा’ या बिना मात्रा। |
| इ ( ि ) | किशन, इस चिट पर दिन लिख। | कि-श-न, इ-स, चि-ट, प-र, दि-न, लि-ख — केवल ‘ि’। |
| ई ( ी ) | तीली गीली थी। | ती-ली, गी-ली, थी — केवल ‘ी’। |
| उ ( ु ) | मुकुल, तुम गुड़ चुन। | मु-कु-ल, तु-म, गु-ड़, चु-न — केवल ‘ु’। |
| ऊ ( ू ) | तू फूल छू, धूल न छू। | तू, फू-ल, छू, धू-ल, न — केवल ‘ू’। |
| ऋ ( ृ ) | मृग तृण चर। | मृ-ग, तृ-ण, च-र — केवल ‘ृ’। (यह सबसे कठिन मात्रा है, क्योंकि ‘ऋ’ वाले शब्द कम हैं।) |
| ए ( े ) | मेरे बेटे ने खेत में बेर देखे। | मे-रे, बे-टे, ने, खे-त, में, बे-र, दे-खे — केवल ‘े’। |
| ऐ ( ै ) | बैल पैदल सैर पर है। | बै-ल, पै-द-ल, सै-र, प-र, है — केवल ‘ै’। |
| ओ ( ो ) | मोर बोल, कोयल सो। | मो-र, बो-ल, को-य-ल, सो — केवल ‘ो’। |
| औ ( ौ ) | मौन रह, चौक पर न दौड़। | मौ-न, र-ह, चौ-क, प-र, न, दौ-ड़ — केवल ‘ौ’। |
वाक्य बनाने की तरकीब:
- पहले उस मात्रा वाले दस शब्द कागज़ पर लिख डालिए — जैसे ‘ो’ के लिए मोर, बोल, ढोल, खोल, चोर, गोल, दो, सो, तोड़, कोयल।
- फिर उनमें से दो-तीन जोड़कर वाक्य बनाइए। बीच में बिना मात्रा वाले शब्द (न, पर, कर, चल, रह, तब, अब) रखने से वाक्य आसानी से बन जाता है।
- क्रिया चुनते समय आज्ञा-रूप (चुन, लिख, बोल, दौड़) सबसे काम आता है, क्योंकि इनमें अकसर अलग मात्रा नहीं जुड़ती।
- अनुस्वार (ं) और चंद्रबिंदु (ँ) मात्रा नहीं हैं — पुस्तक के अपने उदाहरण “चींटी चीनी जीम गई” में भी ‘ीं’ आया है।
यह पहेली सिखाती क्या है: कवि शब्द केवल अर्थ के लिए नहीं, ध्वनि के लिए भी चुनता है। “खान पान सन्मान राग रंग” में एक ही मात्रा के दोहराव से पंक्ति में ढोल-सी लय आ जाती है — इसीलिए वह याद भी जल्दी हो जाती है।