प्र1.
“जग में होत हँसाय” (क) कभी-कभी लोग दूसरों की गलतियों पर ही नहीं, उनके किसी भी कार्य पर हँस देते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर ऐसी कुछ स्थितियों की सूची बनाइए, जब किसी को आप पर या आपको किसी पर हँसी आई हो।
उत्तर
यह समूह-गतिविधि है। सूची दो भागों में बनाइए — जब मुझ पर हँसी आई और जब मुझे किसी पर हँसी आई। नीचे नमूना सूची दी गई है; आप अपने अनुभव जोड़िए।
| जब किसी को मुझ पर हँसी आई | जब मुझे किसी पर हँसी आई |
|---|---|
| कक्षा में ज़ोर से पढ़ते हुए एक शब्द ग़लत बोल दिया। | मित्र दौड़ते-दौड़ते फिसलकर गिर पड़ा। |
| खेल में गेंद पकड़ते-पकड़ते छूट गई। | किसी का जूता उलटे पैर में पहना हुआ था। |
| नया कुरता थोड़ा बड़ा था और सब देखने लगे। | किसी ने अध्यापिका का नाम ग़लत बोल दिया। |
| मंच पर कविता सुनाते समय एक पंक्ति भूल गया। | बहन ने चाय में चीनी की जगह नमक डाल दिया। |
| गणित के प्रश्न का उत्तर बिलकुल उलटा निकला। | छोटा भाई बड़ों की नकल उतार रहा था। |
देखने की बात: ऊपर की सूची में एक बात साफ़ दिखती है — हम दूसरों पर जिन बातों पर हँसते हैं, वही बातें अपने साथ होने पर बुरी लगती हैं। यही इस गतिविधि का असली उद्देश्य है।