मल्हार अध्याय 7 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) वर्षा के समय आपके क्षेत्र में क्या-क्या परिवर्तन आते हैं?
उत्तर

यह अपने अनुभव से लिखने का प्रश्न है। उत्तर में प्रकृति, लोगों के काम और जीवन-शैली — तीनों तरह के परिवर्तन आने चाहिए।

किसमें परिवर्तनक्या-क्या बदलता है
प्रकृति मेंसूखी ज़मीन पर घास उग आती है; पेड़ धुलकर चमकने लगते हैं; तालाब और नाले भर जाते हैं; कीड़े-मकोड़े, केंचुए और मेंढक निकल आते हैं; मोर, पपीहा और कोयल की आवाज़ें बढ़ जाती हैं।
खेती मेंखेत जोते जाते हैं; धान की रोपाई शुरू होती है; बैल-ट्रैक्टर दिन भर चलते हैं; किसान सबसे व्यस्त हो जाता है।
रास्तों और घरों मेंकच्ची सड़कें कीचड़ हो जाती हैं; गड्ढों में पानी भर जाता है; छत टपकने लगती है; कपड़े सूखने में दो-दो दिन लगते हैं।
बाज़ार और खान-पान मेंभुट्टे, पकौड़े और गरम चाय की दुकानें बढ़ जाती हैं; आम और जामुन आते हैं; हरी सब्जियाँ सस्ती हो जाती हैं।
जीवन मेंछाता-बरसाती निकल आती है; बच्चे कागज़ की नाव चलाते हैं; तीज-हरियाली जैसे त्योहार मनाए जाते हैं; मच्छर बढ़ने से बीमारियों का डर भी रहता है।

नमूना उत्तर: “हमारे गाँव में वर्षा आते ही सबसे पहला बदलाव आवाज़ का होता है। जो मैदान गरमी में सूना पड़ा रहता था, वहाँ रात भर मेंढक टर्र-टर्र करते हैं। पीछे वाला ताल, जो जून तक सूखा था, दो ही दिन में लबालब भर जाता है। कच्चा रास्ता कीचड़ हो जाता है, इसलिए हम स्कूल घूमकर पक्की सड़क से जाते हैं। खेतों में रोपाई शुरू हो जाती है और शाम को औरतें गीत गाती हुई लौटती हैं। नीम और पीपल के पत्ते धुलकर इतने चमकते हैं जैसे किसी ने रगड़कर साफ़ कर दिए हों।”

Tip: ‘बहुत परिवर्तन आते हैं’ लिखकर मत छोड़िए। एक ऐसी बात लिखिए जो केवल आपके क्षेत्र में होती है — कोई ताल, कोई नदी, कोई त्योहार, कोई पेड़। यही आपके उत्तर को सबसे अलग बनाएगी।
प्र2.
(ख) बारिश के चलते स्कूल आने-जाने के समय के अनुभव बताइए। किसी रोचक घटना को भी साझा कीजिए।
उत्तर

यह अपना निजी अनुभव सुनाने का प्रश्न है। इसे कहानी की तरह सुनाइए — समय, जगह, कौन-कौन थे, फिर क्या हुआ, अंत में आपको कैसा लगा।

अच्छे उत्तर में क्या हो —

  • एक ही घटना, विस्तार से — दस घटनाएँ जल्दी-जल्दी नहीं।
  • कोई एक चित्र जो याद रह जाए — भीगा बस्ता, टपकती छत, कीचड़ में फिसलना।
  • अंत में एक पंक्ति — उस दिन क्या सीखा या कैसा लगा।

नमूना उत्तर:

“पिछले सावन की बात है। सुबह निकलते समय आकाश साफ़ था, इसलिए मैं छाता घर ही छोड़ आया। छुट्टी के समय ऐसी झड़ी लगी कि स्कूल के बरामदे से बाहर पैर रखना मुश्किल हो गया। हम चार दोस्तों ने तय किया कि भीगते हुए ही चलेंगे। रास्ते के गड्ढों में इतना पानी भर गया था कि वे छोटे-छोटे तालाब लग रहे थे। मेरे मित्र रोहित ने अपनी कॉपी का एक पन्ना फाड़कर नाव बनाई और पानी में छोड़ दी — वह बहती हुई नाली तक चली गई और हम सब तालियाँ बजाने लगे। तभी एक बात हुई जो मैं कभी नहीं भूलूँगा — सामने की गली से एक बुज़ुर्ग दादी छाता लिए आ रही थीं। उन्होंने हमें भीगते देखकर अपना छाता मेरी छोटी बहन के सिर पर कर दिया और खुद भीगती हुई हमें घर तक छोड़ गईं। उस दिन बारिश तो याद रही ही, दादी की वह बात उससे भी अधिक याद रह गई।”

सुरक्षा की बात: बहते पानी, भरे हुए नाले या बिजली के खंभे के पास खेलना ख़तरनाक है। अनुभव सुनाते समय यह भी बताइए कि आपने क्या सावधानी रखी।
प्र3.
(ग) वर्षा ऋतु में आपको क्या-क्या करना अच्छा लगता है और क्या-क्या नहीं कर पाते हैं?
उत्तर

दोनों पक्ष अलग-अलग लिखिए — तभी उत्तर पूरा होगा।

जो करना अच्छा लगता हैजो नहीं कर पाते
बरामदे में बैठकर बारिश देखना और गरम पकौड़े-चाय का आनंद लेनामैदान में क्रिकेट या कबड्डी खेलना — मैदान गीला और फिसलन भरा रहता है
कागज़ की नाव बनाकर बहते पानी में छोड़नासाइकिल से दूर तक जाना — कीचड़ में पहिया फँस जाता है
पहली बारिश में जान-बूझकर भीगना और मिट्टी की सोंधी महक लेनाधूप में कपड़े और अनाज सुखाना
छत से पानी की धार के नीचे हाथ रखना; इंद्रधनुष खोजनाशाम को देर तक बाहर खेलना — जल्दी अँधेरा हो जाता है
घर पर बैठकर कहानी की किताब पढ़ना या चित्र बनानानानी के गाँव या पिकनिक पर जाना — रास्ते बंद हो जाते हैं

नमूना उत्तर: “मुझे वर्षा में सबसे अच्छा लगता है छत पर जाकर पानी की धार के नीचे हथेली रखना और नीचे गली में बहते पानी में कागज़ की नाव छोड़ना। शाम को माँ जब पकौड़े बनाती हैं, तो पूरा घर एक साथ बैठकर खाता है — यह बात केवल बारिश के दिनों में ही होती है। पर मैं शाम को मैदान में क्रिकेट नहीं खेल पाता, क्योंकि मैदान में पानी भरा रहता है। साइकिल भी नहीं चला पाता, क्योंकि कच्चे रास्ते पर कीचड़ जम जाता है।”

प्र4.
(घ) बारिश के मौसम में आपके आस-पड़ोस के पशु-पक्षी अपनी सुरक्षा कैसे करते हैं? उन्हें कौन-कौन सी समस्याएँ होती हैं?
उत्तर
जीवसुरक्षा कैसे करते हैंक्या समस्याएँ होती हैं
गाय, भैंस, बकरीपेड़ के नीचे, बरामदे में या गोशाला में खड़े हो जाते हैं; शरीर हिलाकर पानी झाड़ते हैं।लगातार गीले रहने से खुरों में घाव और चर्म-रोग; ठंड लग जाना; भीगा चारा खाने से बीमारी।
कुत्ते और बिल्लियाँसीढ़ियों के नीचे, खड़ी गाड़ी के नीचे या दुकान के छज्जे में दुबक जाते हैं।भीगने से ठंड और काँपना; भोजन न मिलना; पिल्लों का बह जाना।
चिड़िया, गौरैया, कबूतरघने पेड़ के भीतरी हिस्से में, छज्जे या रोशनदान में छिप जाते हैं; पंख शरीर से चिपका लेते हैं।तेज़ हवा-पानी से घोंसले गिर जाना; अंडे और चूज़ों का नष्ट होना; उड़ने में कठिनाई।
चींटियाँ और कीड़ेअंडे मुँह में दबाकर पंक्ति बाँधकर ऊँची और सूखी जगह पर चले जाते हैं; बिल का मुँह बंद कर देते हैं।बिल में पानी भर जाना; पूरी बस्ती का बह जाना।
साँप और बिच्छूबिल भरने पर बाहर निकलकर सूखी जगह — घर, अनाज की कोठरी, लकड़ी के ढेर — में शरण लेते हैं।मनुष्य के सामने आ जाने पर दोनों के लिए ख़तरा।
हम क्या कर सकते हैं: छत या आँगन में एक ओर सूखी जगह बना दीजिए; घोंसले वाले पेड़ की डाल न काटिए; गली के कुत्ते-बिल्ली को बरसात में बरामदे में जगह दीजिए; मिट्टी के सकोरे में पानी रखते समय ध्यान रखिए कि उसमें बरसाती पानी भरकर मच्छर न पनपें।
कविता से जोड़िए: कविता में मोर, मेंढक और पपीहे केवल खुश दिखाए गए हैं। पर सच यह है कि उसी बारिश में चिड़िया का घोंसला गिर भी सकता है। एक ही ऋतु किसी के लिए उत्सव और किसी के लिए संकट हो सकती है — यह देख पाना ही असली समझ है।
प्र5.
(ङ) अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा ऋतु पर आधारित एक कविता की रचना कीजिए। उसमें अपने घर और आस-पड़ोस से जुड़ी हुई बातें सम्मिलित कीजिए।
उत्तर

कविता बनाने का तरीका —

  1. पहले समूह में बैठकर वर्षा से जुड़े 15–20 शब्द एक कागज़ पर लिख लीजिए (छत, नाली, नीम, कीचड़, छाता, पकौड़े, मेंढक, ताल…)।
  2. उनमें से तुक मिलने वाली जोड़ियाँ छाँटिए — छत–रात, ताल–हाल, नाव–गाँव, धार–बहार
  3. ‘वर्षा-बहार’ की तरह हर पद दो पंक्तियों का रखिए और पंक्ति के बीच में एक विराम दीजिए।
  4. हर पद में एक दृश्य रखिए — पूरी कविता में उपदेश नहीं, चित्र होने चाहिए।
  5. अंत में एक पंक्ति ऐसी रखिए जो पूरी कविता का निष्कर्ष हो — जैसे मूल कविता में “सारे जगत की शोभा…”।

नमूना उत्तर:

मेरे मुहल्ले की बरसात

काले-काले बादल आए, नीम की डाली झूमी
पहली बूँद गिरी माटी पर, सोंधी खुशबू घूमी।

छत से गिरती धार निराली, नीचे भरा है आँगन
कागज़ की नावें दौड़ीं, बच्चों का हुआ मन-भावन।

पीछे वाला सूखा पोखर, भर आया है सारा
मेंढक टर्र-टर्र गाते, लगता गीत हो प्यारा।

दादी चूल्हे पर बैठीं, पकौड़े हैं छन रहे
सारे बच्चे गोल बैठे, किस्से हैं सुन रहे।

खेतों में हल चल पड़े हैं, गाता जाए किसान
पानी आया तो लौटी, मेरे गाँव की मुसकान।
Tip: कविता में वही बातें रखिए जो आपने सचमुच देखी हैं — अपनी गली का नाम, अपने पेड़ का नाम, अपने पड़ोसी का काम। सुनी-सुनाई बातों से बनी कविता फीकी लगती है।
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