प्र1.
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” / “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” • हमारे देश में वर्षा के आने पर अनेक गीत और लोकगीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढ़िए और लिखिए। इस कार्य के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, इंटरनेट और पुस्तकालय की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर
वर्षा भारत के लोकजीवन का सबसे बड़ा गीत-विषय है। खोज इस तरह कीजिए —
- घर से शुरू कीजिए: दादी, नानी या माँ से पूछिए — “सावन में आप क्या गाती थीं?” उनके शब्द ज्यों-के-त्यों लिख लीजिए।
- अपनी भाषा में ढूँढ़िए: हर क्षेत्र के अपने वर्षा-गीत हैं।
- पुस्तकालय और इंटरनेट: ‘सावन के गीत’, ‘कजरी’, ‘मल्हार’ खोजिए। जो भी लें, गीत के साथ उसका क्षेत्र और भाषा ज़रूर लिखिए।
| गीत-प्रकार | क्षेत्र / भाषा | पहचान |
|---|---|---|
| कजरी (कजली) | पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार — भोजपुरी | सावन में स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत — “बरसे बदरिया सावन की…” |
| झूला / हिंडोला गीत | ब्रज, अवध | हरियाली तीज पर झूला झूलते समय के गीत |
| राग मल्हार / मियाँ की मल्हार | शास्त्रीय संगीत, पूरे भारत में | वर्षा ऋतु का राग — इसी से आपकी पुस्तक का नाम मल्हार पड़ा है |
| बारहमासा | अवधी, ब्रज, राजस्थानी | बारह महीनों का वर्णन, जिसमें सावन-भादों का हिस्सा सबसे प्रसिद्ध है |
| रोपनी / रोपाई गीत | बिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वांचल | धान की रोपाई करते समय खेत में गाया जाने वाला श्रमगीत |
| तीज गीत | राजस्थान, हरियाणा | हरियाली तीज और सावन के मेलों के गीत |
| करमा / सुआ | छत्तीसगढ़, झारखंड | वर्षा और फ़सल से जुड़े सामूहिक नृत्य-गीत |
Tip: गीत लिखते समय चार बातें ज़रूर दर्ज कीजिए — (1) गीत के बोल, (2) किससे सुना, (3) कब गाया जाता है, (4) कठिन शब्दों के अर्थ। यही एक अच्छे संकलन की पहचान है।