मल्हार अध्याय 7 वर्षा से जुड़े गीत

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“बागों में गीत सुंदर, गाती हैं मालिनें अब” / “गाते हैं गीत कैसे, लेते किसान मनहर।” • हमारे देश में वर्षा के आने पर अनेक गीत और लोकगीत गाए जाते हैं। अपने समूह के साथ मिलकर वर्षा से जुड़े गीत व लोकगीत ढूँढ़िए और लिखिए। इस कार्य के लिए आप अपने परिजनों, शिक्षकों, इंटरनेट और पुस्तकालय की भी सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

वर्षा भारत के लोकजीवन का सबसे बड़ा गीत-विषय है। खोज इस तरह कीजिए —

  1. घर से शुरू कीजिए: दादी, नानी या माँ से पूछिए — “सावन में आप क्या गाती थीं?” उनके शब्द ज्यों-के-त्यों लिख लीजिए।
  2. अपनी भाषा में ढूँढ़िए: हर क्षेत्र के अपने वर्षा-गीत हैं।
  3. पुस्तकालय और इंटरनेट: ‘सावन के गीत’, ‘कजरी’, ‘मल्हार’ खोजिए। जो भी लें, गीत के साथ उसका क्षेत्र और भाषा ज़रूर लिखिए।
गीत-प्रकारक्षेत्र / भाषापहचान
कजरी (कजली)पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार — भोजपुरीसावन में स्त्रियों द्वारा गाया जाने वाला गीत — “बरसे बदरिया सावन की…”
झूला / हिंडोला गीतब्रज, अवधहरियाली तीज पर झूला झूलते समय के गीत
राग मल्हार / मियाँ की मल्हारशास्त्रीय संगीत, पूरे भारत मेंवर्षा ऋतु का राग — इसी से आपकी पुस्तक का नाम मल्हार पड़ा है
बारहमासाअवधी, ब्रज, राजस्थानीबारह महीनों का वर्णन, जिसमें सावन-भादों का हिस्सा सबसे प्रसिद्ध है
रोपनी / रोपाई गीतबिहार, छत्तीसगढ़, पूर्वांचलधान की रोपाई करते समय खेत में गाया जाने वाला श्रमगीत
तीज गीतराजस्थान, हरियाणाहरियाली तीज और सावन के मेलों के गीत
करमा / सुआछत्तीसगढ़, झारखंडवर्षा और फ़सल से जुड़े सामूहिक नृत्य-गीत
Tip: गीत लिखते समय चार बातें ज़रूर दर्ज कीजिए — (1) गीत के बोल, (2) किससे सुना, (3) कब गाया जाता है, (4) कठिन शब्दों के अर्थ। यही एक अच्छे संकलन की पहचान है।
प्र2.
• सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को संकलित करके वर्षा-गीतों की एक पुस्तिका भी तैयार कीजिए।
उत्तर

पुस्तिका (छोटी किताब) बनाने का तरीका —

  1. सामग्री जुटाइए: हर समूह अपने गीत साफ़ अक्षरों में एक-एक पन्ने पर लिखकर दे।
  2. क्रम तय कीजिए: गीतों को भाषा या क्षेत्र के अनुसार बाँटिए — जैसे ‘भोजपुरी कजरी’, ‘छत्तीसगढ़ी करमा’, ‘राजस्थानी तीज’।
  3. पन्ना कैसा हो: ऊपर गीत का नाम, नीचे बोल, किनारे पर एक छोटा चित्र, और सबसे नीचे — “यह गीत हमें ______ जी ने सुनाया।”
  4. शुरू और अंत: पहले पन्ने पर आवरण-चित्र और पुस्तिका का नाम; दूसरे पन्ने पर अनुक्रमणिका; अंतिम पन्ने पर सब सहयोगियों के नाम और आभार।
  5. जोड़िए और सजाइए: पन्नों को सिलकर या रिबन से बाँधकर पुस्तिका बना लीजिए। मुखपृष्ठ पर बादल, मोर और झूले का चित्र बना दीजिए।

पुस्तिका के नाम के सुझाव: ‘बरसे बदरिया’, ‘सावन की सरगम’, ‘हमारे गाँव के वर्षा-गीत’, ‘मल्हार: कक्षा 7 का गीत-संग्रह’।

आगे का काम: तैयार पुस्तिका को विद्यालय के पुस्तकालय में रख दीजिए और प्रार्थना-सभा में उसमें से एक गीत गाकर सुनाइए। जो गीत बुज़ुर्गों से मिले हैं, वे अगली पीढ़ी तक इसी तरह पहुँचते हैं।
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