मल्हार अध्याय 7 वर्षा के दृश्य

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) वर्षा के उन दृश्यों की सूची बनाइए जिनका उल्लेख इस कविता में नहीं किया गया है। जैसे आकाश में इंद्रधनुष।
उत्तर

पहले देख लीजिए कि कविता में क्या-क्या है — बादल, बिजली, गरज, पानी, झरने, ठंडी हवा, डालियाँ, मालिनें, ताल, जलचर, पपीहे, मोर, मेंढक, गुलाब, हंस, किसान। अब इनके अलावा के दृश्य —

वर्गकविता में न आए दृश्य
आकाश मेंइंद्रधनुष; बारिश के बाद निकलती धूप; बादलों के पीछे से झाँकता सूरज; ओलों का गिरना; कुहरे जैसी झीनी फुहार।
धरती परभीगी मिट्टी की सोंधी महक; कीचड़ और भरे हुए गड्ढे; नदी में उफान और बाढ़; खेत की मेड़ पर बहता पानी; उगते हुए नए अंकुर; ज़मीन से निकलते केंचुए।
जीव-जंतुछाया ढूँढ़ते कुत्ते-बिल्ली; बिल छोड़कर भागती चींटियाँ; पत्ते पर बैठी लाल मखमली बीरबहूटी; भीगकर सिकुड़ी चिड़िया; बरसात में उड़ते जुगनू; मक्खी-मच्छर का बढ़ना।
मनुष्यछाता और बरसाती लिए चलते लोग; कागज़ की नाव चलाते बच्चे; भुट्टे और पकौड़े की दुकानें; टपकती छत पर तिरपाल डालते लोग; रुके हुए वाहन और बंद रास्ते; तीज-हरियाली जैसे त्योहार और झूले।
कवि ने ये क्यों छोड़ दिए: ‘वर्षा-बहार’ का उद्देश्य वर्षा का उत्सव दिखाना है। इसलिए कवि ने कीचड़, बाढ़, मच्छर और रुके हुए काम — ये असुविधा वाले दृश्य जान-बूझकर नहीं लिए। कविता में केवल वही रखा गया जो सुंदर और आनंददायक है।
प्र2.
(ख) वर्षा के समय आकाश में बिजली पहले दिखाई देती है या बिजली कड़कने की ध्वनि पहले सुनाई देती है या दोनों साथ-साथ दिखाई-सुनाई देती है? क्यों? पता कीजिए।
उत्तर

बिजली की चमक पहले दिखाई देती है, गरज उसके बाद सुनाई देती है। चमक और गरज पैदा तो एक ही क्षण में होती हैं, पर हम तक अलग-अलग समय पर पहुँचती हैं।

प्रकाश की चाल ≈ 3,00,000 किलोमीटर प्रति सेकंड
ध्वनि की चाल (हवा में) ≈ 330 मीटर प्रति सेकंड (लगभग ⅓ किलोमीटर प्रति सेकंड)

अर्थात प्रकाश ध्वनि से लगभग नौ लाख गुना तेज़ चलता है।

इसलिए — बिजली की चमक लगभग उसी क्षण आँखों तक पहुँच जाती है, जबकि उसकी आवाज़ को उतनी दूरी तय करने में कई सेकंड लग जाते हैं। यही कारण है कि पहले चमक दिखती है और कुछ देर बाद ‘गड़गड़’ सुनाई देती है।

Check it yourself — बादल कितनी दूर है? चमक दिखते ही मन-ही-मन गिनना शुरू कीजिए — एक, दो, तीन… जैसे ही गरज सुनाई दे, गिनती रोक दीजिए।
दूरी (किलोमीटर में) ≈ सेकंडों की संख्या ÷ 3
यदि 9 सेकंड लगे तो बादल लगभग 3 किलोमीटर दूर है। यदि चमक और गरज लगभग साथ-साथ हों, तो बिजली बहुत पास है — तुरंत पक्के घर के भीतर चले जाइए।
एक बात और: ‘गड़गड़ाहट’ लंबी इसलिए सुनाई देती है क्योंकि बिजली की लकीर कई किलोमीटर लंबी होती है। उसके अलग-अलग हिस्सों से चली ध्वनि हम तक अलग-अलग समय पर पहुँचती है, और पहाड़ों-बादलों से टकराकर लौटती भी है।
प्र3.
(ग) आपने वर्षा से पहले और वर्षा के बाद किसी पेड़ या पौधे को ध्यान से अवश्य देखा होगा। आपको कौन-कौन से अंतर दिखाई दिए?
उत्तर
क्या देखावर्षा से पहलेवर्षा के बाद
पत्तों का रंगधूल जमी हुई, फीका-मटमैला हराधुले हुए, गहरे हरे और चमकते हुए
पत्तों की दशामुरझाए, किनारे से मुड़े हुए, कुछ सूखकर गिरेतने हुए, ताज़े; नई कोंपलें फूटी हुई
तना और छालसूखी, दरारों वाली छालगीली, गहरे रंग की; उस पर हरी काई जम जाती है
जड़ के पास की ज़मीनसख़्त, फटी हुई, धूल भरीनरम, गीली; चारों ओर घास और छोटे-छोटे अंकुर
फूल-फलकम, जल्दी झड़ जाने वालेनई कलियाँ और फूल; कई पेड़ों पर फल लगना शुरू
आस-पास का जीवनसूनापनचींटी, केंचुआ, तितली, भौंरा, मकड़ी के जाले, पक्षियों का कलरव, तने पर उगते छोटे कुकुरमुत्ते
गंधधूल की गंधभीगी मिट्टी और पत्तों की सोंधी महक
ऐसा क्यों होता है: पौधा जड़ों से पानी खींचकर पत्तों तक पहुँचाता है। सूखे में यह पानी कम पड़ जाता है, इसलिए पत्ते ढीले पड़ जाते हैं। वर्षा के बाद जड़ों को भरपूर पानी मिलता है, कोशिकाएँ भर जाती हैं और पत्ते फिर तन जाते हैं। साथ ही धुले पत्तों पर धूप ठीक से पड़ने लगती है, जिससे प्रकाश-संश्लेषण तेज़ हो जाता है और पौधा तेज़ी से बढ़ता है।
Try This: अपने आँगन या स्कूल के एक ही पेड़ को चुनिए। वर्षा से पहले उसका एक चित्र बनाइए और नीचे तारीख़ लिखिए। बारिश के दो दिन बाद उसी पेड़ का दूसरा चित्र बनाइए। दोनों चित्रों को साथ रखकर अंतर लिखिए — यह सबसे अच्छा उत्तर बनेगा।
प्र4.
(घ) “चलते हैं हंस कहीं पर, बाँधे कतार सुंदर” — कविता में हंसों के कतार में अर्थात पंक्तिबद्ध रूप से चलने का वर्णन किया गया है। आपने किन-किन को और कब-कब पंक्तिबद्ध चलते हुए देखा है? (संकेत — चींटी, गाड़ियाँ, बच्चे आदि)
उत्तर
कौनकबपंक्ति क्यों बनाते हैं
चींटियाँबारिश से पहले, दाना या अंडे ले जाते समयआगे वाली चींटी गंध का निशान छोड़ती जाती है; पीछे वाली उसी पर चलती हैं, इससे कोई रास्ता नहीं भूलता।
प्रवासी पक्षी (हंस, सारस, बत्तख)ऋतु बदलने पर लंबी उड़ान के समय‘V’ आकार में उड़ने से पीछे वाले पक्षी को हवा का कम प्रतिरोध झेलना पड़ता है और शक्ति बचती है।
विद्यार्थीप्रार्थना-सभा में, कक्षा से बाहर निकलते समय, मध्याह्न भोजन की पंक्ति मेंभीड़ और धक्का-मुक्की न हो और सबका नंबर बारी-बारी आए।
गाड़ियाँव्यस्त सड़क, टोल नाके या लाल बत्ती परअनुशासन से दुर्घटना नहीं होती और यातायात चलता रहता है।
सैनिकपरेड और गणतंत्र दिवस के मार्च मेंएक साथ कदम मिलाकर चलना अनुशासन और एकता दिखाता है।
बत्तख के बच्चे / हाथियों का झुंडतालाब की ओर जाते समय / जंगल में चलते समयमाँ के पीछे-पीछे चलने से बच्चे खोते नहीं और सुरक्षित रहते हैं।
लोगमतदान की पंक्ति, टिकट खिड़की, बैंक, मंदिर के दर्शन में‘पहले आओ, पहले पाओ’ का न्याय बना रहता है।
सीखने की बात: कवि ने हंसों की कतार को ‘सुंदर’ कहा — यानी उसकी नज़र में अनुशासन भी एक सौंदर्य है। पंक्ति में चलने से समय भी बचता है, शक्ति भी और झगड़ा भी नहीं होता। प्रकृति यह बात हमसे पहले सीख चुकी है।
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