मल्हार अध्याय 7 कविता का सौंदर्य

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इनमें कुछ शब्द हटा दिए गए हैं और साथ में मिलते-जुलते अर्थ वाले शब्द भी दिए गए हैं। इनमें से प्रत्येक शब्द से वह पंक्ति पूरी करके देखिए। जो शब्द उस पंक्ति में जँच रहे हैं उन पर घेरा बनाइए। ________ बहार सब के, मन को लुभा रही है (बारिश, बरसात, बरखा, वृष्टि) / ________ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही है (आकाश, गगन, अंबर, व्योम) / बिजली चमक रही है, ________ गरज रहे हैं (मेघ, जलधर, घन, जलद) / ________ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैं (जल, नीर, सलिल, तोय)
उत्तर

पहले याद रखिए कि कविता में मूल शब्द क्या थे — वर्षा, नभ, बादल, पानी। अब हर पंक्ति में दिए गए विकल्पों को रखकर देखिए कि कौन-सा शब्द मात्राओं की लय में भी बैठता है और अर्थ में भी।

पंक्तिमूल शब्दजो शब्द जँचते हैं (घेरा बनाइए)कारण
________ बहार सब के, मन को लुभा रही हैवर्षाबरखा, बरसात‘बरखा’ दो मात्राओं में ‘वर्षा’ जैसा ही चलता है और लोकगीतों का शब्द होने से ‘बहार’ के साथ सुंदर लगता है। ‘बरसात’ भी चल जाता है। ‘बारिश’ बोलचाल का शब्द है, कविता की लय में कुछ भारी पड़ता है; ‘वृष्टि’ बहुत शास्त्रीय है और ‘बहार’ के साथ मेल नहीं खाता।
________ में छटा अनूठी, घनघोर छा रही हैनभगगन, अंबरदोनों ‘नभ’ के पर्याय हैं और लय में बैठ जाते हैं। ‘आकाश’ में एक मात्रा अधिक होने से पंक्ति लंबी हो जाती है; ‘व्योम’ कठिन शब्द है, बच्चों की कविता में कम जँचता है।
बिजली चमक रही है, ________ गरज रहे हैंबादलमेघ, घन‘मेघ’ और ‘घन’ दोनों बादल के प्रसिद्ध पर्याय हैं और बहुवचन ‘गरज रहे हैं’ के साथ ठीक बैठते हैं। ‘जलधर’ और ‘जलद’ अर्थ में तो सही हैं (जल को धारण करने वाला), पर बोलने में भारी लगते हैं।
________ बरस रहा है, झरने भी ये बहे हैंपानीनीर, जल‘नीर’ ‘पानी’ की तरह ही सहज और कोमल है। ‘जल’ भी चलेगा, पर एक मात्रा कम होने से लय थोड़ी ढीली पड़ती है। ‘सलिल’ और ‘तोय’ अर्थ तो पानी ही है, पर ये शब्द आज कम बोले जाते हैं।
यहाँ सीखने की बात: पर्यायवाची शब्दों का अर्थ एक होते हुए भी उनका रंग अलग-अलग होता है। ‘बरखा’ लोकगीत का शब्द है, ‘वृष्टि’ शास्त्र का, ‘बारिश’ रोज़ की बोलचाल का। कविता में शब्द केवल अर्थ से नहीं, लय, ध्वनि और भाव से भी चुना जाता है।
कोई एक उत्तर सही-ग़लत नहीं: यह गतिविधि उत्तर ढूँढ़ने की नहीं, कान से परखने की है। जो शब्द रखकर आपको पंक्ति सबसे मीठी लगे, उस पर घेरा बनाइए — बस कारण बता पाइए।
प्र2.
(ख) अपने समूह में विमर्श करके पता लगाइए कि कौन-से शब्द रिक्त स्थानों में सबसे अधिक साथियों को जँच रहे हैं और क्यों?
उत्तर

यह समूह-सर्वेक्षण की गतिविधि है। इसे व्यवस्थित ढंग से करने का तरीका —

  1. चारों पंक्तियों के लिए एक तालिका बनाइए, जिसमें हर विकल्प के सामने एक खाना हो।
  2. समूह के हर सदस्य से पूछकर उसके चुने हुए शब्द के आगे एक निशान (।) लगाइए।
  3. अंत में गिनिए कि किस शब्द को सबसे अधिक निशान मिले।
  4. फिर पूछिए — क्यों? केवल संख्या लिखना अधूरा उत्तर है; कारण लिखना ही असली काम है।

नमूना उत्तर: “हमारे समूह में आठ सदस्य थे। पहली पंक्ति में पाँच साथियों ने बरखा चुना, दो ने बरसात और एक ने बारिश। कारण यह बताया गया कि ‘बरखा-बहार’ बोलने में एक साथ बहता है और लोकगीतों में यही शब्द सुनने को मिलता है। दूसरी पंक्ति में छह साथियों ने गगन चुना, क्योंकि ‘गगन में छटा’ बोलते ही पंक्ति गाने जैसी लगती है। तीसरी पंक्ति में सात साथियों ने मेघ चुना, क्योंकि ‘मेघ गरजना’ मुहावरे की तरह पहले से सुना हुआ है। चौथी पंक्ति में चार ने नीर और तीन ने जल चुना; एक साथी ने कहा कि ‘जल बरस रहा है’ में पंक्ति छोटी पड़ जाती है।”

निष्कर्ष: जिन शब्दों को अधिक साथी चुनते हैं, वे प्राय: वही होते हैं जो पहले से सुने हुए हों — गीतों, कहावतों या कहानियों में। इसका अर्थ यह है कि भाषा केवल शब्दकोश से नहीं, कानों से भी सीखी जाती है।
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