मल्हार अध्याय 8 मिलकर करें मिलान

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ शब्द एवं शब्द समूह नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही संदर्भों या अवधारणाओं से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। शब्द — 1. कर्नाटक संगीत शैली, 2. घराना, 3. शास्त्रीय संगीत, 4. हिंदुस्तानी संगीत शैली, 5. कनछेदन, 6. लोक नृत्य। संदर्भ या अवधारणा — 1. भारत की प्राचीन गायन-वादन गीत-नृत्य अभिनय परंपरा का अभिन्न अंग है। इसमें शब्दों की अपेक्षा सुरों का महत्व होता है। इसमें नियमों की प्रधानता होती है। 2. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारत के राज्यों में प्रचलित है। इसमें स्वर शैली की प्रधानता होती है। जल तरंगम, वीणा, मृदंग, मंडोलिन वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। 3. हिंदू धर्म के 16 संस्कारों में एक है, यह कान में सोने या चाँदी का तार पहनाने से संबंधित है। 4. हिंदुस्तानी संगीत में कलाकारों का एक समुदाय या कुटुंब, जो संगीत नृत्य की विशिष्ट शैली साझा करते हैं। संगीत या नृत्य की परंपरा, जिसमें सिद्धांत और शैली पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रशिक्षण के द्वारा आगे बढ़ती है। 5. किसी क्षेत्र विशेष में लोक द्वारा किए जाने वाले पारंपरिक नृत्य। लोक नृत्य, क्षेत्र विशेष की संस्कृति एवं रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं। ये विशेष रूप से फसल कटाई, उत्सवों आदि के अवसर पर किए जाते हैं। 6. भारतीय शास्त्रीय संगीत की एक शैली, जो मुख्य रूप से उत्तर भारत के राज्यों में प्रचलित है। तबला, सारंगी, सितार, संतूर वाद्ययंत्रों से संगत दी जाती है। इसके प्रमुख रागों की संख्या छह है।
उत्तर

सही मिलान:

शब्दसही संदर्भपहचान की कुंजी
1. कर्नाटक संगीत शैली2‘दक्षिण भारत’ + जल तरंगम, वीणा, मृदंग, मंडोलिन
2. घराना4‘समुदाय या कुटुंब’ + ‘पीढ़ी-दर-पीढ़ी’
3. शास्त्रीय संगीत1‘प्राचीन परंपरा’ + ‘नियमों की प्रधानता’ (शास्त्र = नियम)
4. हिंदुस्तानी संगीत शैली6‘उत्तर भारत’ + तबला, सारंगी, सितार, संतूर
5. कनछेदन3‘कान में सोने या चाँदी का तार’ — 16 संस्कारों में से एक
6. लोक नृत्य5‘फसल कटाई, उत्सवों’ + ‘रीति-रिवाजों को दर्शाते हैं’
मिलान कैसे करें: हर विवरण में एक संकेत-शब्द छिपा होता है। ‘दक्षिण भारत’ मिलते ही कर्नाटक शैली तय हो जाती है और ‘उत्तर भारत’ मिलते ही हिंदुस्तानी। ‘कुटुंब/पीढ़ी-दर-पीढ़ी’ घराने का ही अर्थ है, क्योंकि घराना परिवार से बनता है। ‘कान’ शब्द ही कनछेदन का अर्थ खोल देता है (कन = कान, छेदन = छेदना)।
जोड़ने योग्य बात: पाठ में बिरजू महाराज ने ‘लखनऊ घराने’, ‘जयपुर घराने’ और ‘बनारस घराने’ का उल्लेख किया है — ये तीनों कथक के घराने हैं। इससे स्पष्ट होता है कि ‘घराना’ केवल गायन का नहीं, नृत्य का भी होता है।
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