प्र1.
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों की सहायता से आप भारतीय नृत्य, संगीत और बिरजू महाराज के बारे में जान-समझ सकते हैं— • भारतीय शास्त्रीय संगीत में नृत्य संगत • कथक परिचय भाग 7 • पंडित बिरजू महाराज
उत्तर
पुस्तक में तीन विषयों की इंटरनेट कड़ियाँ (QR कोड सहित) दी गई हैं। इन्हें देखते समय केवल वीडियो चलाकर छोड़ मत दीजिए — साथ में नोट बनाइए। नीचे बताया गया है कि हर कड़ी में क्या देखना-सुनना है:
| कड़ी | क्या देखिए-सुनिए | अपनी कॉपी में क्या लिखिए |
|---|---|---|
| भारतीय शास्त्रीय संगीत में नृत्य संगत | तबला, सारंगी, हारमोनियम और पखावज नृत्य के साथ कैसे बजते हैं; ‘लहरा’ कैसा सुनाई देता है। | कौन-कौन से वाद्य दिखे, कौन-सी ताल बजी, संगतकार और नर्तक के बीच संकेत कैसे चलते हैं। |
| कथक परिचय भाग 7 | तत्कार, चक्कर, आमद, तोड़ा, टुकड़ा और हस्तक — कथक के मूल अंग। | पाँच कथक शब्द और उनका अर्थ; ‘जुगलबंदी’ का एक उदाहरण। |
| पंडित बिरजू महाराज | उनकी प्रस्तुतियाँ, हाव-भाव, गर्दन और उँगलियों की कोमल गति — जिनकी चर्चा पाठ में हुई है। | पाठ की कौन-सी बात वीडियो में सचमुच दिखी (जैसे ‘चिराग की लौ के समान’ गर्दन का हिलना)। |
खोजबीन का सही तरीका: कड़ी खोलने से पहले तीन प्रश्न लिख लीजिए जिनका उत्तर आप ढूँढ़ना चाहते हैं। देखने के बाद उन तीन प्रश्नों के उत्तर लिखिए और यह भी लिखिए कि कोई नया प्रश्न मन में आया या नहीं। इसी तरह जानकारी टिकाऊ बनती है।
और कहाँ खोजें: संगीत नाटक अकादमी और भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की वेबसाइटें, आकाशवाणी के अभिलेखागार, तथा अपने शहर की सार्वजनिक लाइब्रेरी। इंटरनेट पर देखते समय शिक्षक या घर के बड़ों की उपस्थिति में ही खोज कीजिए और स्रोत का नाम अपनी कॉपी में अवश्य लिखिए।