मल्हार अध्याय 9 साझी समझ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप इंटरनेट या किसी अन्य माध्यम की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी एकत्रित कीजिए और प्रवासी पक्षियों पर लेख लिखिए।
उत्तर

लेख को चार भागों में बाँटिए — भूमिका, प्रवास क्यों, कौन-कौन आते हैं, और संकट व बचाव। लेख के साथ एक चित्र या नक़्शा लगा दें तो और अच्छा लगेगा।

नमूना लेख — प्रवासी पक्षी: बिना पासपोर्ट के यात्री

भूमिका — हर वर्ष जाड़ों में हमारी झीलों पर कुछ अनजाने मेहमान उतरते हैं। ये हज़ारों किलोमीटर उड़कर आते हैं, कुछ महीने रहते हैं और गरमी आते ही लौट जाते हैं। इन्हें प्रवासी पक्षी कहते हैं।

प्रवास क्यों — पक्षी घूमने के शौक़ से नहीं उड़ते। उत्तर के देशों में जाड़ों में झीलें जम जाती हैं और कीड़े-मकोड़े ख़त्म हो जाते हैं। भोजन और गरमाहट की खोज में वे दक्षिण की ओर आ जाते हैं। गरमियों में वहाँ दिन लंबे और भोजन भरपूर होता है, इसलिए वे बच्चे पालने वापस लौट जाते हैं।

प्रमुख प्रवासी पक्षी और उनके ठिकाने —

पक्षीकहाँ से आता हैभारत में कहाँ दिखता हैरोचक बात
साइबेरियन सारस (कुरजाँ)साइबेरियाकेवलादेव, भरतपुर (राजस्थान)कभी हर जाड़े में आता था; अब बहुत दुर्लभ हो गया है।
डेमोइज़ेल क्रेन (कुरजाँ)मंगोलिया, मध्य एशियाखींचन, जोधपुर (राजस्थान)हिमालय के ऊपर से उड़कर आता है; खींचन गाँव के लोग हर सुबह इन्हें दाना डालते हैं।
बार-हेडेड गूज़ (धारीदार हंस)मध्य एशियाचंबल, चिल्का, पोंग बाँधदुनिया के सबसे ऊँचे उड़ने वाले पक्षियों में — हिमालय के शिखरों के ऊपर से निकल जाता है।
फ़्लेमिंगो (राजहंस)ईरान, कच्छ का रनमुंबई की खाड़ी, चिल्का, सांभर झीलगुलाबी रंग इसे अपने भोजन (शैवाल और झींगे) से मिलता है।
अबाबील (स्वैलो)यूरोप, मध्य एशियापूरे भारत मेंयही पक्षी गद्यांश में भी गिनाया गया है; यह दल बनाकर उड़ता है।
आर्कटिक टर्नआर्कटिक (ध्रुवीय क्षेत्र)समुद्री तटों पर कभी-कभारपूरी दुनिया में सबसे लंबी प्रवास-यात्रा — आर्कटिक से अंटार्कटिका तक, हर साल आना-जाना।

रास्ता कैसे याद रहता है — वैज्ञानिक बताते हैं कि पक्षी सूर्य और तारों की स्थिति, पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र और नदी-पहाड़ जैसी ज़मीनी निशानियों से दिशा पहचानते हैं। बच्चे पहली बार भी अकेले सही जगह पहुँच जाते हैं — यह आज भी विज्ञान के लिए अचरज की बात है।

संकट और बचाव — आर्द्रभूमियों (wetlands) का सूखना, शिकार, बिजली के तार, ऊँची इमारतों की काँच-दीवारें और रात की तेज़ रोशनी इनके सबसे बड़े दुश्मन हैं। झीलों को बचाना, शिकार रोकना, रात में अनावश्यक रोशनी बंद करना और इन्हें भोजन-स्थल पर परेशान न करना — यही इनकी सबसे बड़ी सहायता है।

निष्कर्ष — प्रवासी पक्षी हमें याद दिलाते हैं कि प्रकृति सीमाओं को नहीं मानती। जिस आकाश को कवि ने ‘सीमा-हीन’ कहा है, उसे ये पक्षी हर साल सच कर दिखाते हैं।

खोज करते समय: जानकारी विश्वसनीय स्रोतों से लीजिए — भारतीय वन्यजीव संस्थान, बॉम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी की वेबसाइट, या पुस्तकालय में सलीम अली की पुस्तकें। लेख के अंत में अपने स्रोत भी लिखिए — यह अच्छे लेखन की पहचान है।
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