प्र1.
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जीव-जगत के बारे में और भी जान-समझ सकते हैं— • हमारा पर्यावरण • वह चिड़िया जो
उत्तर
पुस्तक में इन दोनों शीर्षकों के साथ क्यू-आर कोड / इंटरनेट कड़ियाँ दी गई हैं। इन्हें शिक्षक या अभिभावक की देखरेख में खोलिए और जो देखें-पढ़ें, उसे अपनी कॉपी में नोट कीजिए।
| कड़ी | यह किस बारे में है | देखने-पढ़ने के बाद क्या कीजिए |
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| हमारा पर्यावरण | पर्यावरण, उसमें पशु-पक्षियों की भूमिका, और मनुष्य के कामों से होने वाला नुक़सान | पाँच नए तथ्य लिखिए और अपने गाँव/मुहल्ले से जुड़ी दो समस्याएँ चुनकर उनके उपाय सुझाइए। |
| वह चिड़िया जो | केदारनाथ अग्रवाल की प्रसिद्ध कविता ‘वह चिड़िया जो’ — जिसमें भी एक चिड़िया के स्वभाव और स्वतंत्रता का चित्र है | दोनों कविताओं की तुलना कीजिए — देखिए कि दोनों कवि चिड़िया में क्या-क्या गुण देखते हैं। |
तुलना का नमूना:
| बिंदु | ‘चिड़िया’ — आरसी प्रसाद सिंह | ‘वह चिड़िया जो’ — केदारनाथ अग्रवाल |
|---|---|---|
| चिड़िया क्या करती है | मनुष्य को प्रेम, एकता और स्वतंत्रता का संदेश देती है | जुंडी के दाने रुचि से खाती है और नदी में तैरती है |
| मुख्य गुण | निर्लोभ, निर्भय, मिलनसार | छोटी, संतोषी, जल-थल में समान रूप से प्रसन्न |
| साझा भाव | दोनों कविताओं में चिड़िया थोड़े में संतुष्ट, स्वतंत्र और जीवन से भरपूर है — दोनों कवि उसे मनुष्य के लिए आदर्श मानते हैं। | |
सुरक्षित खोजबीन: केवल पुस्तक में दी गई कड़ियों या विश्वसनीय शैक्षिक वेबसाइटों का ही प्रयोग कीजिए, और इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारी कभी साझा मत कीजिए।
आगे बढ़िए: पक्षियों पर हिंदी में और भी सुंदर रचनाएँ हैं — महादेवी वर्मा की ‘गिल्लू’ और ‘नीलकंठ’, तथा सलीम अली की पुस्तकें। पुस्तकालय से लेकर पढ़िए और कक्षा में सुनाइए।