मल्हार अध्याय 10 मीरा के पद के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-05

इस अध्याय के बारे में

पाठ में मीरा के दो पद हैं। पहला — “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — श्रीकृष्ण से प्रार्थना है कि वे मीरा की आँखों में ही बस जाएँ। दूसरा — “बरसे बदरिया सावन की” — सावन की झड़ी और उसके साथ जागी उमंग का गीत है। पहले पद में श्रीकृष्ण का सिर से पाँव तक का चित्र खिंचता है — मोहनी मूरत, साँवली सूरत, विशाल नैन, होंठों पर अमृत बरसाती मुरली, छाती पर वैजयंती माला, कमर पर क्षुद्र घंटिका और पैरों में मधुर बोलते नूपुर। अंत में मीरा उन्हें ‘संतन सुखदाई’ और ‘भक्त वछल’ कहती हैं। दूसरे पद में वर्षा और भक्ति एक हो जाती हैं। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, दामिनी (बिजली) दमकती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन बहती है — और इसी झड़ी में मीरा को ‘हरि आवन की भनक’ सुनाई देती है। इसलिए पद का भाव प्रसन्नता और उमंग है, विरह नहीं। दोनों पदों में मीरा ने अंतिम पंक्ति में अपना नाम जोड़ा है — “मीरा के

  1. मेरी समझ से
  2. मिलकर करें मिलान
  3. पंक्तियों पर चर्चा
  4. सोच-विचार के लिए
  5. कविता की रचना
  6. अनुमान और कल्पना से
  7. शब्दों के रूप
  8. शब्द से जुड़े शब्द
  9. पंक्ति से पंक्ति
  10. कविता का सौंदर्य
  11. रूप बदलकर
  12. मुहावरे
  13. सबकी प्रस्तुति
  14. आपकी बात
  15. विशेषताएँ
  16. मधुर ध्वनियाँ
  17. चित्र करते हैं बातें
  18. सावन से जुड़े गीत
  19. खोजबीन
  20. आज की पहेली
  21. खोजबीन के लिए
  22. पढ़ने के लिए
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