कक्षा ७ हिंदी अध्याय 10 मीरा के पद के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
पाठ में मीरा के दो पद हैं। पहला — “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — श्रीकृष्ण से प्रार्थना है कि वे मीरा की आँखों में ही बस जाएँ। दूसरा — “बरसे बदरिया सावन की” — सावन की झड़ी और उसके साथ जागी उमंग का गीत है। पहले पद में श्रीकृष्ण का सिर से पाँव तक का चित्र खिंचता है — मोहनी मूरत, साँवली सूरत, विशाल नैन, होंठों पर अमृत बरसाती मुरली, छाती पर वैजयंती माला, कमर पर क्षुद्र घंटिका और पैरों में मधुर बोलते नूपुर। अंत में मीरा उन्हें ‘संतन सुखदाई’ और ‘भक्त वछल’ कहती हैं। दूसरे पद में वर्षा और भक्ति एक हो जाती हैं। बादल चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर आते हैं, दामिनी (बिजली) दमकती है, नन्हीं-नन्हीं बूँदें गिरती हैं और शीतल पवन बहती है — और इसी झड़ी में मीरा को ‘हरि आवन की भनक’ सुनाई देती है। इसलिए पद का भाव प्रसन्नता और उमंग है, विरह नहीं। दोनों पदों में मीरा ने अंतिम पंक्ति में अपना नाम जोड़ा है — “मीरा के
त्वरित पुनरावृत्ति
| शब्द | अर्थ | पद की पंक्ति | अपने वाक्य में प्रयोग |
|---|---|---|---|
| नंदलाल | नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण | “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” | मंदिर में नंदलाल की झाँकी सजाई गई थी। |
| नैनन | नयनों में, आँखों में | “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” | माँ का चेहरा आज भी मेरे नैनों में बसा है। |
| मोहनि | मोहने वाली, मन हर लेने वाली | “मोहनि मूरति साँवरि सूरति” | बच्चे की मोहनी हँसी ने सबका मन मोह लिया। |
| मूरति | मूर्ति, रूप, स्वरूप | “मोहनि मूरति साँवरि सूरति” | कुम्हार ने मिट्टी की सुंदर मूरति बनाई। |
| साँवरि सूरति | साँवली सूरत, साँवला चेहरा | “मोहनि मूरति साँवरि सूरति” | उसकी साँवरी सूरत में एक अलग ही तेज है। |
| अधर | होंठ | “अधर सुधा रस मुरली राजति” | गीत सुनते-सुनते उसके अधरों पर मुस्कान आ गई। |
| सुधा | अमृत | “अधर सुधा रस मुरली राजति” | दादी की बातें कानों में सुधा घोल देती हैं। |
| राजति | सुशोभित होती है, शोभा देती है | “अधर सुधा रस मुरली राजति” | मंच पर तिरंगा राजता हुआ बहुत भला लगा। |
| उर | हृदय, छाती | “उर वैजंती माल” | उसके उर में देश-प्रेम भरा हुआ है। |
| वैजंती माल | वैजयंती पौधे के बीजों से बनने वाली माला | “उर वैजंती माल” | मूर्ति के गले में वैजयंती माला पहनाई गई। |
| क्षुद्र घंटिका | छोटी-छोटी घंटियाँ, घुँघरू | “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित” | नर्तकी की क्षुद्र घंटिकाएँ छनछना उठीं। |
| कटितट | कमर, कमर का भाग | “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित” | कटितट पर बँधा पटका हवा में लहरा रहा था। |
| नूपुर | पैरों में पहनने का घुँघरूदार गहना, पायल | “नूपुर शब्द रसाल” | आँगन में नूपुर की झंकार गूँज उठी। |
| रसाल | रसीला, मीठा, मधुर | “नूपुर शब्द रसाल” | बाँसुरी की रसाल तान सबको बाँध लेती है। |
| भक्त वछल | भक्तवत्सल — भक्तों से स्नेह करने वाला | “भक्त वछल गोपाल” | भक्त वत्सल प्रभु अपने भक्तों को नहीं भूलते। |
| बदरिया | बदली, बादल | “बरसे बदरिया सावन की” | दोपहर होते ही काली बदरिया घिर आई। |
| उमग्यो | उमंग से भर गया | “सावन में उमग्यो मेरो मनवा” | पहली बूँद पड़ते ही मन उमग उठा। |
| भनक | धीमी, अस्पष्ट आहट या खबर | “भनक सुनी हरि आवन की” | मेले की भनक लगते ही बच्चे दौड़ पड़े। |
| दामिन | दामिनी, बिजली | “दामिन दम कै झर लावन की” | दामिनी चमकी और सारा आकाश जगमगा उठा। |
| मेहा | मेह, वर्षा, बारिश | “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे” | रात भर मेह बरसता रहा। |
| सोहावन | सुहावनी, अच्छी लगने वाली | “शीतल पवन सोहावन की” | सावन की शाम बड़ी सोहावनी लगती है। |
| गिरधरनागर | गोवर्धन पर्वत को धारण करने वाले चतुर श्रीकृष्ण | “मीरा के प्रभु गिरधरनागर” | मीरा ने अपना सब कुछ गिरधर नागर को सौंप दिया। |
अभ्यास
- मेरी समझ से
- मिलकर करें मिलान
- पंक्तियों पर चर्चा
- सोच-विचार के लिए
- कविता की रचना
- अनुमान और कल्पना से
- शब्दों के रूप
- शब्द से जुड़े शब्द
- पंक्ति से पंक्ति
- कविता का सौंदर्य
- रूप बदलकर
- मुहावरे
- सबकी प्रस्तुति
- आपकी बात
- विशेषताएँ
- मधुर ध्वनियाँ
- चित्र करते हैं बातें
- सावन से जुड़े गीत
- खोजबीन
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए
- पढ़ने के लिए