प्र1.
अपने परिजनों, मित्रों, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से सावन में गाए जाने वाले गीतों को ढूँढ़िए और किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत, कविता आदि लिख सकते हैं। कक्षा के सभी समूहों द्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तिका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए।
उत्तर
यह समूह में करने की परियोजना है। इसे इन चरणों में कीजिए —
- खोज: घर की दादी-नानी, माँ, बुआ या मोहल्ले की स्त्रियों से पूछिए — “सावन में आप कौन-सा गीत गाती थीं?” प्रायः सबसे अच्छे लोकगीत यहीं मिलते हैं।
- लिखना: गीत को सुनते ही लिख लीजिए, बाद में याद करके नहीं। जो शब्द समझ में न आए, उसे वैसे ही लिखकर बाद में अर्थ पूछ लीजिए।
- ब्योरा: गीत के नीचे लिखिए — कौन-सी भाषा/बोली, किससे सीखा, किस अवसर पर गाया जाता है।
- पुस्तिका: सब समूहों के गीत क्रम से लगाकर एक आवरण-पृष्ठ बनाइए (जैसे ‘सावन के गीत — कक्षा 7’), सूची पृष्ठ जोड़िए और उसे कक्षा-पुस्तकालय में रख दीजिए।
कहाँ-कहाँ से गीत मिल सकते हैं:
| प्रकार | उदाहरण | कहाँ के |
|---|---|---|
| कजरी | “रिमझिम बरसे बदरिया…” | पूर्वी उत्तर प्रदेश (मिर्ज़ापुर, बनारस), बिहार |
| तीज/झूला गीत | “सावन आयो झूलण को…” | राजस्थान, हरियाणा |
| मल्हार | राग मल्हार में गाए जाने वाले वर्षा-गीत | शास्त्रीय संगीत — पूरे देश में |
| भक्ति-पद | मीरा का “बरसे बदरिया सावन की” (इसी पाठ से) | राजस्थान |
| बालगीत | “पानी बरसा छम-छम-छम…” | बच्चों की ज़बानी, पूरे देश में |
नमूना प्रविष्टि:
गीत: “रिमझिम रिमझिम बरसे पनिया, भीगे मोरी अँगनइया…”
प्रकार: कजरी (लोकगीत) | बोली: भोजपुरी
किससे सीखा: नानी से | कब गाया जाता है: सावन में झूला डालते समय, स्त्रियों द्वारा समूह में।
गीत: “रिमझिम रिमझिम बरसे पनिया, भीगे मोरी अँगनइया…”
प्रकार: कजरी (लोकगीत) | बोली: भोजपुरी
किससे सीखा: नानी से | कब गाया जाता है: सावन में झूला डालते समय, स्त्रियों द्वारा समूह में।
यह काम क्यों: लोकगीत किसी किताब में नहीं, लोगों की स्मृति में रहते हैं। यदि हम उन्हें लिख न लें तो एक पीढ़ी बाद वे लुप्त हो जाते हैं। आपकी यह पुस्तिका सचमुच एक संग्रह-कार्य है।