पहले चित्र में क्या-क्या दिखता है, यह देख लीजिए —
| चित्र में | क्या बताता है |
|---|---|
| केसरिया-नारंगी रंग का लंबा वस्त्र | यह संतों-साधुओं का रंग है — मीरा ने महल का वैभव छोड़कर संत का जीवन चुना |
| हाथों में दो तूँबों वाला तार-वाद्य (वीणा/तानपूरा) | वे गा-गाकर भजन करती थीं; संगीत ही उनकी भक्ति का रास्ता था |
| खुले, लंबे काले बाल — कोई भारी शृंगार नहीं | सादगी; राजसी ठाट-बाट का त्याग |
| झुकी हुई पलकें, चेहरे पर हल्की मुस्कान | ध्यान में डूबा, शांत और आनंदित मन |
| कान का एक आभूषण और माथे का छोटा टीका | राजकुल से आने की हल्की-सी झलक |
| गहरी नीली पृष्ठभूमि और सफ़ेद संगमरमर की जालीदार छत | काँगड़ा शैली की कोमल रंग-योजना; महल का परिवेश |
नमूना उत्तर (अनुच्छेद):
“इस चित्र में मीरा केसरिया वस्त्र पहने, हाथ में तूँबों वाली वीणा लिए बैठी हैं। उनके लंबे काले बाल खुले हैं और आँखें आधी झुकी हुई हैं — जैसे वे अपने चारों ओर की दुनिया को भूलकर किसी और ही धुन में डूबी हों। होंठों पर बहुत हल्की-सी मुस्कान है, जिससे लगता है कि वे इस समय पूरी तरह प्रसन्न हैं। उनके शरीर पर कोई भारी गहना नहीं है, केवल कान का एक आभूषण और माथे का छोटा-सा टीका है — यही उनके राजकुल से आने की एकमात्र निशानी है। पीछे गहरा नीला रंग है और नीचे सफ़ेद संगमरमर की जालीदार छत दिखाई देती है, यानी वे किसी महल की छत पर बैठी हैं। पर उनका मन महल में नहीं है; वह वीणा के तारों और अपने गिरधर के साथ है। चित्र देखकर वही मीरा सामने आ जाती हैं जिनके बारे में पाठ में पढ़ा — एक राजकुमारी, जिसने महल छोड़कर भजन और सत्संग का जीवन चुन लिया।”