प्र1.
“अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥ क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल॥” इन पंक्तियों में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आए हैं, जिनसे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न होती हैं। उन वस्तुओं के नाम पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए।
उत्तर
वे तीन वस्तुएँ हैं — मुरली, क्षुद्र घंटिका और नूपुर। पुस्तक में इन्हीं तीन शब्दों के नीचे रेखा खींचिए।
| वस्तु | क्या है | कैसी ध्वनि | पद का प्रमाण |
|---|---|---|---|
| मुरली | बाँसुरी — बाँस का फूँककर बजने वाला वाद्य | सुरीली, लंबी तान | “अधर सुधा रस मुरली राजति” — होंठों से अमृत जैसा रस बरसाती है |
| क्षुद्र घंटिका | कमर में बँधी छोटी-छोटी घंटियाँ | छन-छन, हिलने पर बजने वाली | “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित” |
| नूपुर | पैरों का घुँघरूदार गहना, पायल | रुनझुन — मीठी, चलने पर बजने वाली | “नूपुर शब्द रसाल” — ‘शब्द’ यानी आवाज़, ‘रसाल’ यानी मीठी |
‘वैजंती माल’ क्यों नहीं: माला भी श्रीकृष्ण पर सजी है, पर वह बजती नहीं — उससे कोई ध्वनि नहीं निकलती। इसलिए वह इन तीन में नहीं गिनी जाएगी।
ध्यान दीजिए: मीरा ने केवल श्रीकृष्ण का चित्र नहीं खींचा, उनकी आवाज़ भी सुना दी है — मुरली की तान, घंटियों की छनक और नूपुर की रुनझुन। इसीलिए यह पद पढ़ते हुए दृश्य के साथ संगीत भी सुनाई देने लगता है।