मल्हार अध्याय 10 विशेषताएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” (क) इस पंक्ति में कवयित्री ने श्रीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?
उत्तर

यह आपकी अपनी पसंद का प्रश्न है — पर उत्तर पाठ में आई बातों से जुड़ा होना चाहिए। पाठ में श्रीकृष्ण की जो-जो बातें आई हैं, उनमें से चुनिए —

बातपाठ में कहाँक्यों आकर्षित करती है
मुरली“अधर सुधा रस मुरली राजति”एक साधारण बाँस की पोरी से ऐसी धुन निकलती है कि सब उसकी ओर खिंचे चले आते हैं
साँवला रूप“साँवरि सूरति”सुंदरता केवल गोरे रंग में नहीं होती — यह पंक्ति यही सिखाती है
विशाल नैन“नैना बने विशाल”बड़ी और शांत आँखें अपनापन जगाती हैं
भक्तों से स्नेह“भक्त वछल गोपाल”वे भक्त की योग्यता नहीं, उसका प्रेम देखते हैं
संतों को सुख देना“संतन सुखदाई”बड़ा होकर भी सबके पास रहना, दूर न हो जाना
गिरधर होना“मीरा के प्रभु गिरधरनागर”पर्वत उठाकर गाँव के लोगों और पशुओं की रक्षा की — साहस और सेवा दोनों

नमूना उत्तर: “मुझे श्रीकृष्ण की दो बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया। पहली — उनकी मुरली। वे कोई अस्त्र-शस्त्र नहीं, बाँस की एक पोरी लेकर चलते हैं और उसी से सबका मन जीत लेते हैं। दूसरी — ‘भक्त वछल’ होना। मीरा एक साधारण भक्त थीं, पर उनके पद कहते हैं कि प्रभु ने उन्हें कभी दूर नहीं किया। मुझे यह बात अच्छी लगती है कि वे बड़े होकर भी छोटे-से भक्त को नहीं भूलते।”

प्र2.
(ख) किसी व्यक्ति या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों? अपने जीवन से जुड़े किसी व्यक्ति या वस्तु के उदाहरण से बताइए।
उत्तर

इस प्रश्न में तीन बातें ज़रूरी हैं — गुण का नाम, क्यों वह गुण अच्छा लगता है, और अपने जीवन का एक उदाहरण

ऐसे गुण जिन्हें चुना जा सकता है: सच्चाई, दूसरों की सहायता करना, धैर्य, हिम्मत, दूसरों की बात ध्यान से सुनना, अपने काम में मन लगाना, वादा निभाना, नम्रता, हार के बाद फिर खड़े हो जाना।

नमूना उत्तर 1 — व्यक्ति (गुण: दूसरों की बात ध्यान से सुनना):

“मुझे लोगों में सबसे अच्छा गुण यह लगता है कि वे दूसरों की बात बीच में काटे बिना सुनें। मेरी मित्र सलमा में यह गुण है। जब मैं कोई बात कहता हूँ तो वह अपना मोबाइल या किताब नीचे रख देती है और मेरी ओर देखकर पूरी बात सुनती है। एक बार मैं खेल में हारकर बहुत निराश था। बाक़ी साथी सलाह देने लगे कि मुझे क्या करना चाहिए था, पर सलमा ने केवल इतना कहा — ‘बता, हुआ क्या था?’ और चुपचाप सुनती रही। बात कहते-कहते मेरा मन अपने आप हल्का हो गया। तभी से मुझे लगता है कि सुनना भी एक बड़ी सहायता है।”

नमूना उत्तर 2 — वस्तु (गुण: सादगी और उपयोगिता):

“वस्तुओं में मुझे वह गुण भाता है कि वे सादी हों और सचमुच काम आएँ। हमारे घर में एक मिट्टी का घड़ा है। उसमें न कोई बटन है, न बिजली लगती है, फिर भी गरमी में उसका पानी फ्रिज से अधिक मीठा लगता है। मुझे यह बात अच्छी लगती है कि जो चीज़ जितनी सादी होती है, वह उतनी ही टिकाऊ होती है।”

Tip: गुण चुनते समय ऐसा गुण चुनिए जिसका आपके पास कोई सच्चा उदाहरण हो। उदाहरण के बिना गुण की तारीफ़ अधूरी रह जाती है।
प्र3.
(ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह्य तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह्य विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं, लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्ति के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर

पहले अंतर समझ लीजिए —

बाह्य विशेषताएँआंतरिक विशेषताएँ
कैसे पता चलती हैंदेखने से, पहली ही मुलाक़ात मेंव्यवहार से, समय के साथ
उदाहरणकद, रंग, बाल, आवाज़, चाल, हँसी, चश्माईमानदारी, धैर्य, दया, हिम्मत, मेहनत, ग़ुस्सा, शर्मीलापन
पाठ से“साँवरि सूरति”, “नैना बने विशाल”“संतन सुखदाई”, “भक्त वछल”

नमूना उत्तर:

मेरी बाह्य विशेषताएँ —

  1. मेरे बाल घुँघराले हैं और माथे पर बाईं ओर बचपन की एक छोटी-सी चोट का निशान है।
  2. मैं कक्षा में सबसे लंबा हूँ, इसलिए प्रार्थना-सभा की पंक्ति में हमेशा सबसे पीछे खड़ा होता हूँ।

मेरी आंतरिक विशेषताएँ —

  1. धैर्य: कोई सवाल एक बार में हल न हो तो मैं उसे छोड़ता नहीं, तीन-चार बार करके देखता हूँ।
  2. सहायता का भाव: जिस साथी की कॉपी छूट जाती है, मैं अपनी कॉपी बाँटकर उसके साथ लिख लेता हूँ।
ध्यान देने की बात: बाह्य विशेषताएँ हमारी अपनी चुनी हुई नहीं होतीं — कद, रंग, नाक-नक़्श जन्म से मिलते हैं। आंतरिक विशेषताएँ हम स्वयं बनाते हैं, अपनी आदतों से। इसीलिए किसी को उसके रंग-रूप पर नहीं, उसके व्यवहार पर परखना चाहिए। मीरा ने भी पहले श्रीकृष्ण का रूप कहा, पर पद समाप्त उनके स्वभाव पर किया।
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