मल्हार अध्याय 10 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “बरसे बदरिया सावन की” 1. इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है। जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? वर्णन कीजिए।
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। अच्छे उत्तर में दिखने, सुनने, सूँघने और छूने — चारों तरह के बदलाव आने चाहिए, और वे आपके ही गाँव/नगर के हों।

वर्णन में ये बातें आ सकती हैं:

  • आकाश: धूप कम, काले-भूरे बादल; दिन में भी अँधेरा-सा; बिजली चमकना, बादल गरजना।
  • तापमान: गरमी की तपन टूट जाती है, हवा ठंडी और नम हो जाती है।
  • धरती: सूखे खेत हरे हो जाते हैं, गड्ढों में पानी भर जाता है, नदी-नाले भर उठते हैं, रास्तों में कीचड़ हो जाता है।
  • पेड़-पौधे: धूल धुल जाती है और पत्ते चमकने लगते हैं; नई घास और मशरूम उग आते हैं।
  • जीव-जंतु: मेंढकों की टर्र-टर्र, झींगुरों की आवाज़, मोर का नाचना, केंचुए और बरसाती कीड़े निकल आना।
  • गंध: पहली बारिश पर गीली मिट्टी की सोंधी महक — जिसे ‘सौंधी सुगंध’ कहते हैं।
  • लोगों का जीवन: किसान बुआई में जुट जाते हैं, छाते-बरसाती निकल आती हैं, बच्चे कागज़ की नाव चलाते हैं, झूले पड़ जाते हैं।

नमूना उत्तर:

“हमारे गाँव में सावन आते ही सबसे पहले आकाश बदलता है। जून की चौड़ी धूप ग़ायब हो जाती है और दोपहर में भी बादल इतने घने हो जाते हैं कि लगता है साँझ हो गई। पहली बारिश गिरते ही गीली मिट्टी की सोंधी महक पूरे घर में भर जाती है। खेत, जो अब तक फटी हुई धरती की तरह दिखते थे, दो-चार दिन में हरे हो जाते हैं और पिता जी धान की रोपाई में लग जाते हैं। पीपल के पत्तों की धूल धुल जाती है और वे नए जैसे चमकने लगते हैं। रात में मेंढकों की टर्र-टर्र और झींगुरों की आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि नींद में भी सुनाई देती रहती है। पगडंडियाँ कीचड़ से भर जाती हैं, फिर भी हम चप्पल हाथ में लेकर स्कूल जाते हैं — क्योंकि सावन में भीगने का अपना ही आनंद है।”

Tip: ‘बहुत अच्छा लगता है’ जैसे वाक्य से बचिए। उसकी जगह वह चीज़ लिखिए जिसे देखकर अच्छा लगा — यही अच्छा वर्णन कहलाता है।
प्र2.
2. सावन की ऋतु में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? इन ध्वनियों को सुनकर आपके मन में कौन-कौन सी भावनाएँ उठती हैं? आप कैसा अनुभव करते हैं? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए। (उदाहरण के लिए — बिजली के कड़कने या बूँदों के टपकने की ध्वनियाँ।)
उत्तर

सावन की ध्वनियाँ और उनसे जागने वाले भाव —

ध्वनिकैसी सुनाई देती हैमन में क्या भाव उठता है
बादलों का गरजनागड़गड़ — गहरी, दूर से आती हुईपहले हल्का डर, फिर उत्सुकता कि अब बारिश आएगी
बिजली का कड़कनाकड़ाक — अचानक और तेज़चौंक जाना; छोटे भाई-बहन का दौड़कर पास आ जाना
छत या टीन पर बूँदों का टपकनाटप-टप, फिर लगातार झरझरमन शांत हो जाता है, नींद आने लगती है
तेज़ हवा और पत्तों की सरसराहटसरसर, साँय-साँयठंडक और ताज़गी का अनुभव
मेंढकों की टर्र-टर्ररात भर, एक साथ कईहँसी आती है; लगता है वे भी बारिश का उत्सव मना रहे हैं
मोर की ‘पीहू-पीहू’ और पपीहे की पुकारदूर खेतों से आती हुईमन उमंग से भर जाता है
नाली-नाले में पानी का बहनाकल-कल, छपाकबाहर निकलकर कागज़ की नाव चलाने का मन करता है
झूले की चरमराहट और सावन के गीतलय में, बार-बारत्योहार जैसा उत्साह

नमूना उत्तर: “मुझे सबसे अच्छी लगती है छत पर बूँदों के टपकने की आवाज़। शुरू में टप… टप… अलग-अलग सुनाई देती है, फिर इतनी बूँदें गिरने लगती हैं कि एक लगातार झरझर बन जाती है। उस समय पढ़ाई में मन नहीं लगता, बस खिड़की के पास बैठकर सुनते रहने का मन करता है। पर बिजली का कड़कना मुझे आज भी थोड़ा डरा देता है — तब दादी कहती हैं, ‘डरो मत, यह तो बादलों की आपस की बात है।’”

पद से जोड़िए: मीरा ने भी इसी अनुभव को दो शब्दों में बाँध दिया है — “भनक सुनी हरि आवन की”। भनक यानी वह हल्की-सी आवाज़ जो पूरी तरह सुनाई तो नहीं देती, पर मन को बता जाती है कि कुछ होने वाला है।
प्र3.
3. वर्षा ऋतु में आपको कौन-कौन सी गतिविधियाँ करने या खेल खेलने में आनंद आता है?
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। कुछ गतिविधियाँ जो बच्चों को वर्षा में सबसे अधिक भाती हैं —

  • कागज़ की नाव बनाकर बहते पानी में छोड़ना और उसके पीछे दौड़ना।
  • बारिश में भीगना और आँगन के पानी में छपाक-छपाक कूदना।
  • झूला झूलना — सावन में पेड़ों पर झूले डालना और झूला-गीत गाना।
  • बरसात रुकने पर इंद्रधनुष खोजना और उसके रंग गिनना।
  • छत या बरामदे से बैठकर गरम पकौड़े और चाय के साथ बारिश देखना।
  • कीचड़ में फुटबॉल या कबड्डी खेलना।
  • पानी की बूँदों से भीगे पत्तों-फूलों के चित्र बनाना या तसवीरें उतारना।
  • घर के भीतर अंताक्षरी, पहेलियाँ, कहानी-कहना — जब बाहर जाना संभव न हो।

नमूना उत्तर: “मुझे वर्षा में सबसे अधिक आनंद कागज़ की नाव चलाने में आता है। हम तीन-चार साथी अपनी-अपनी नाव एक साथ छोड़ते हैं और गली के मोड़ तक दौड़ते हुए देखते हैं कि किसकी नाव सबसे आगे पहुँचती है। बारिश थमने पर हम कीचड़ वाले मैदान में कबड्डी खेलते हैं — गिरने पर चोट भी नहीं लगती, बस कपड़े ख़राब हो जाते हैं।”

ध्यान रखने योग्य: बहते नाले, भरे गड्ढे और नदी के किनारे से दूर रहिए, और बिजली कड़कते समय पेड़ के नीचे या खुले मैदान में मत खड़े होइए। भीगने के बाद तुरंत सिर पोंछकर सूखे कपड़े पहन लीजिए।
प्र4.
4. सावन के महीने में हमारे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं। आपके घर, परिसर या गाँव में सावन में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते हैं? किसी एक के विषय में अपने अनुभव बताइए।
उत्तर

सावन (श्रावण) में देश भर में अनेक त्योहार आते हैं —

त्योहारकहाँ विशेष रूप सेक्या होता है
हरियाली तीजराजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेशझूले पड़ते हैं, स्त्रियाँ हरे वस्त्र पहनकर तीज-गीत गाती हैं
रक्षाबंधनपूरे देश मेंबहनें भाइयों को राखी बाँधती हैं
नाग पंचमीउत्तर और पश्चिम भारतनाग-देवता की पूजा, दूध-लावा चढ़ाना
कजरी / झूला उत्सवपूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहारकजरी गीत गाए जाते हैं
ओणमकेरलपुष्प-रंगोली (पूक्कलम), नौका-दौड़, ओणसद्य
बोनालु / श्रावण सोमवारतेलंगाना / पूरे देशदेवी-पूजा; सोमवार को शिव-आराधना और कांवड़-यात्रा
गुरु पूर्णिमापूरे देश में (आषाढ़ के अंत/सावन के आरंभ में)गुरुजनों का सम्मान

नमूना उत्तर (रक्षाबंधन के अनुभव पर):

“हमारे घर में सावन का सबसे बड़ा त्योहार रक्षाबंधन है। उस दिन माँ सुबह जल्दी उठकर खीर और सेवइयाँ बनाती हैं। दीदी बाज़ार से पिछले सप्ताह ही राखी ले आई थीं और उसे तुलसी के चौरे पर रख दिया था। पूजा के बाद वे मेरे माथे पर तिलक लगाकर, अक्षत छिड़ककर मेरी कलाई पर राखी बाँधती हैं और मैं उन्हें कुछ उपहार देता हूँ — पिछले वर्ष मैंने अपनी बचत से उनके लिए एक रंग-पेटी ली थी। मुझे यह त्योहार इसलिए अच्छा लगता है कि इस दिन हम दोनों की सारी लड़ाइयाँ अपने आप ख़त्म हो जाती हैं।”

Tip: अनुभव लिखते समय एक ही त्योहार चुनिए और उसका पूरा दिन क्रम से लिखिए — सुबह क्या हुआ, फिर क्या, और अंत में आपको कैसा लगा। दस त्योहारों की सूची से एक त्योहार की सच्ची कहानी कहीं अच्छी लगती है।
प्र5.
(ख) “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” — इस पद में मीरा श्रीकृष्ण को ‘संतों को सुख देने वाला’ और ‘भक्तों का पालन करने वाला’ कहती हैं। 1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्ति है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए।
उत्तर

यह आपके अपने जीवन का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — वह व्यक्ति कौन है, वह किस-किस तरह सहायता करता है और कोई एक सच्ची घटना जो यह बात सिद्ध करे।

नमूना उत्तर:

“मेरे जीवन में वह व्यक्ति मेरी नानी हैं। वे हमारे साथ ही रहती हैं। जब भी मैं किसी बात से उदास होता हूँ, वे बिना पूछे ही समझ जाती हैं और मुझे अपने पास बिठाकर कोई पुरानी कहानी सुनाने लगती हैं। पिछले वर्ष गणित की परीक्षा में मेरे अंक बहुत कम आए थे और मुझे लगा कि अब सब मुझ पर नाराज़ होंगे। नानी ने डाँटा नहीं। उन्होंने केवल इतना कहा — ‘एक परीक्षा से कोई बच्चा तय नहीं होता, बेटा।’ फिर उन्होंने रोज़ शाम को मेरे साथ बैठकर पहाड़े दोहराने शुरू कर दिए, हालाँकि वे स्वयं कभी विद्यालय नहीं गईं। अगली परीक्षा में मेरे अंक बहुत अच्छे आए। नानी के पास ऐसी कोई डिग्री नहीं है, पर मुझे लगता है कि हिम्मत बँधाना सबसे बड़ी सहायता है, और वह वे सबसे अच्छी तरह करती हैं।”

पद से जोड़िए: मीरा जिन दो गुणों के कारण श्रीकृष्ण को अपना मानती हैं, वे हैं — सुख देना और साथ निभाना। हमारे आस-पास के लोग भी इन्हीं दो गुणों से हमारे ‘अपने’ बनते हैं।
Tip: केवल ‘मेरे पिता जी बहुत अच्छे हैं’ लिखना अधूरा उत्तर है। एक घटना लिखिए — घटना ही ‘अच्छे हैं’ को सिद्ध करती है।
प्र6.
2. कवयित्री ने पाठ में ‘नूपुर’ और ‘क्षुद्र घंटिका’ जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया है। किसी का वर्णन करने के लिए हम केवल बड़ी-बड़ी ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बता सकते हैं। आप भी अपने आस-पास के किसी व्यक्ति या वस्तु का वर्णन करते हुए उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दीजिए और उन्हें लिखिए।
उत्तर

पहले देखिए मीरा ने क्या किया — उन्होंने यह नहीं लिखा कि “श्रीकृष्ण बहुत सुंदर हैं”। उन्होंने छोटी-छोटी चीज़ें गिना दीं — कमर की नन्ही घंटियाँ, पैरों के नूपुर की आवाज़, गले की माला। इन्हीं छोटी चीज़ों से पूरा चित्र बन गया।

वर्णन लिखने का तरीका:

  1. व्यक्ति या वस्तु चुनिए और दो मिनट उसे सचमुच ध्यान से देखिए
  2. पाँच छोटी बातें नोट कीजिए — कोई आवाज़, कोई गंध, कोई आदत, कोई निशान, कोई रंग।
  3. बड़े-बड़े विशेषण (‘बहुत सुंदर’, ‘बहुत अच्छा’) हटा दीजिए और उनकी जगह ये पाँच बातें रख दीजिए।

नमूना उत्तर 1 — व्यक्ति (दादा जी):

“दादा जी की छड़ी की नोक पर पीतल की एक छोटी-सी टोपी लगी है — घर में सबसे पहले उसी की ठक-ठक सुनाई देती है, फिर दादा जी दिखाई देते हैं। उनके चश्मे की एक डंडी टूटकर धागे से बँधी है, पर वे नया चश्मा नहीं लेते। जेब में हमेशा दो इलायची रहती हैं, एक अपने लिए और एक मेरे लिए। अख़बार पढ़ते समय वे हर बड़ी खबर के नीचे पेंसिल से लकीर खींच देते हैं, और शाम को वही लकीरें दिखाकर हमें समझाते हैं।”

नमूना उत्तर 2 — वस्तु (मेरी पुरानी साइकिल):

“मेरी साइकिल का रंग कभी नीला था, अब हैंडल के पास से उतरकर उसमें से लोहा झाँकने लगा है। घंटी दबाने पर पूरी ‘टन्न’ नहीं बजती, आधी-सी आवाज़ आती है, पर मुझे वही आवाज़ पसंद है। पीछे के कैरियर में एक जगह रबर बैंड बँधा है, जहाँ मैं टिफ़िन फँसाता हूँ। चेन थोड़ी ढीली है, इसलिए मोड़ पर वह हल्की-सी खटकती है — इसी खटके से माँ जान जाती हैं कि मैं स्कूल से लौट आया हूँ।”

Try This: अपने लिखे वर्णन में से ‘सुंदर’, ‘अच्छा’ और ‘बहुत’ — ये तीन शब्द काट दीजिए। यदि उसके बाद भी वर्णन से चित्र बनता है, तो आपका वर्णन सफल है।
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