यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है। अच्छे उत्तर में दिखने, सुनने, सूँघने और छूने — चारों तरह के बदलाव आने चाहिए, और वे आपके ही गाँव/नगर के हों।
वर्णन में ये बातें आ सकती हैं:
- आकाश: धूप कम, काले-भूरे बादल; दिन में भी अँधेरा-सा; बिजली चमकना, बादल गरजना।
- तापमान: गरमी की तपन टूट जाती है, हवा ठंडी और नम हो जाती है।
- धरती: सूखे खेत हरे हो जाते हैं, गड्ढों में पानी भर जाता है, नदी-नाले भर उठते हैं, रास्तों में कीचड़ हो जाता है।
- पेड़-पौधे: धूल धुल जाती है और पत्ते चमकने लगते हैं; नई घास और मशरूम उग आते हैं।
- जीव-जंतु: मेंढकों की टर्र-टर्र, झींगुरों की आवाज़, मोर का नाचना, केंचुए और बरसाती कीड़े निकल आना।
- गंध: पहली बारिश पर गीली मिट्टी की सोंधी महक — जिसे ‘सौंधी सुगंध’ कहते हैं।
- लोगों का जीवन: किसान बुआई में जुट जाते हैं, छाते-बरसाती निकल आती हैं, बच्चे कागज़ की नाव चलाते हैं, झूले पड़ जाते हैं।
नमूना उत्तर:
“हमारे गाँव में सावन आते ही सबसे पहले आकाश बदलता है। जून की चौड़ी धूप ग़ायब हो जाती है और दोपहर में भी बादल इतने घने हो जाते हैं कि लगता है साँझ हो गई। पहली बारिश गिरते ही गीली मिट्टी की सोंधी महक पूरे घर में भर जाती है। खेत, जो अब तक फटी हुई धरती की तरह दिखते थे, दो-चार दिन में हरे हो जाते हैं और पिता जी धान की रोपाई में लग जाते हैं। पीपल के पत्तों की धूल धुल जाती है और वे नए जैसे चमकने लगते हैं। रात में मेंढकों की टर्र-टर्र और झींगुरों की आवाज़ इतनी तेज़ होती है कि नींद में भी सुनाई देती रहती है। पगडंडियाँ कीचड़ से भर जाती हैं, फिर भी हम चप्पल हाथ में लेकर स्कूल जाते हैं — क्योंकि सावन में भीगने का अपना ही आनंद है।”