मल्हार अध्याय 10 खोजबीन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपने पढ़ा कि मीरा श्रीकृष्ण की आराधना करती थीं। आपने कक्षा 6 की पुस्तक मल्हार में पढ़ा था कि सूरदास भी श्रीकृष्ण के भक्त थे। अपने समूह के साथ मिलकर सूरदास की कुछ रचनाएँ ढूँढ़कर कक्षा में सुनाइए। इसके लिए आप पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।
उत्तर

सूरदास के बारे में संक्षेप में: सूरदास (लगभग 1478–1583) ब्रजभाषा के सबसे बड़े कवि माने जाते हैं। वे दृष्टिहीन थे, फिर भी उन्होंने बाल-कृष्ण के ऐसे चित्र खींचे जैसे सब कुछ आँखों से देखा हो। उनका सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘सूरसागर’। वे वल्लभाचार्य के शिष्य और ‘अष्टछाप’ के कवियों में सबसे प्रमुख थे।

कक्षा में सुनाने के लिए कुछ प्रसिद्ध पद —

पद की पहली पंक्तिकिस विषय पर
“मैया मोरी मैं नहिं माखन खायो”माखन चुराकर भी मना कर देने वाले बाल-कृष्ण का भोलापन
“मैया कबहिं बढ़ैगी चोटी”बालक कृष्ण की ज़िद — मेरी चुटिया कब बड़ी होगी
“अब मैं नाच्यो बहुत गुपाल”विनय का पद — अब मुझे इस संसार-नृत्य से मुक्त कीजिए
“चरन कमल बंदौ हरि राई”प्रभु के चरणों की वंदना
“ऊधौ, मोहि ब्रज बिसरत नाहीं”भ्रमरगीत — गोपियों का उद्धव से संवाद

मीरा और सूरदास — मिलती-जुलती और अलग बातें:

बिंदुमीरासूरदास
आराध्यश्रीकृष्ण (गिरधर नागर)श्रीकृष्ण (बाल-गोपाल)
भावप्रेम और समर्पण — प्रभु मेरे अपने हैंवात्सल्य — प्रभु मेरे बालक हैं
भाषाराजस्थानी मिश्रित ब्रजशुद्ध ब्रजभाषा
छाप“मीरा के प्रभु…”“सूरदास प्रभु…”
रूपपद — गाए जाने वाले भजनपद — गाए जाने वाले भजन
प्रस्तुति का तरीका: समूह के हर साथी को एक-एक पद बाँट दीजिए। पहले पद गाकर या पढ़कर सुनाइए, फिर उसका अर्थ दो-तीन वाक्यों में बताइए, और अंत में कक्षा से पूछिए — “इसमें कौन-सा भाव है, वात्सल्य या विनय?”
क्या यह उपयोगी रहा? त्रुटि बताएँ