मल्हार अध्याय 10 पंक्तियों पर चर्चा

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए। (क) “नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥”
उत्तर

अर्थ: नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेह (वर्षा) बरस रहा है और उसके साथ ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है।

‘नन्हीं नन्हीं’ = बहुत छोटी-छोटी
‘बूँदन’ = बूँदों के रूप में
‘मेहा’ = मेह, वर्षा
‘शीतल’ = ठंडी   ‘सोहावन’ = सुहावनी, भली लगने वाली

भाव: यह मूसलाधार, डराने वाली बारिश नहीं है। बूँदें छोटी हैं, हवा ठंडी है — पूरा दृश्य कोमल और सुखद है। गरमी से तपी धरती और तपे मन, दोनों को यह फुहार ठंडक दे रही है। मीरा के लिए यह ठंडक बाहर की भी है और भीतर की भी — क्योंकि उन्हें ‘हरि आवन की भनक’ सुनाई दे चुकी है।

भाषा का सौंदर्य: ‘नन्हीं नन्हीं’ में एक ही शब्द दो बार आया है — इसे पुनरुक्ति कहते हैं; इससे बूँदों का लगातार गिरना आँखों के सामने आ जाता है। साथ ही ‘न्हीं न्हीं’ में ‘न’ की और ‘ावन… ीतल… ोहावन’ में ‘स’ की आवृत्ति है — यह अनुप्रास है।
प्र2.
(ख) “मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥”
उत्तर

अर्थ: मीरा के प्रभु (श्रीकृष्ण) संतों को सुख देने वाले हैं और भक्तों से वत्सल भाव यानी माता-पिता जैसा स्नेह रखने वाले गोपाल हैं।

शब्दअर्थक्या बताता है
संतन सुखदाईसंतों को सुख देने वालेजो सच्चे मन से उन्हें भजता है, उसे वे शांति देते हैं।
भक्त वछलभक्तवत्सल — भक्तों पर वैसा ही स्नेह जैसा गाय का बछड़े परभक्त की योग्यता नहीं, उसका प्रेम देखते हैं।
गोपालगायों का पालन करने वालेवे राजा नहीं, ग्वाले हैं — साधारण लोगों के अपने।

भाव: पहली चार पंक्तियों में मीरा ने श्रीकृष्ण का रूप बताया था — मूरत, सूरत, नैन, मुरली, माला, घंटिका, नूपुर। अंतिम पंक्ति में वे उनका स्वभाव बताती हैं। यही पद का निष्कर्ष है — श्रीकृष्ण केवल सुंदर नहीं, दयालु भी हैं, इसीलिए मीरा निश्चिंत होकर उनसे प्रार्थना कर पाती हैं।

ध्यान दें: ‘वछल’ संस्कृत के वत्सल शब्द का ब्रज रूप है और ‘वत्स’ का अर्थ है बछड़ा। गाय अपने बछड़े को देखकर जैसे दौड़ पड़ती है, वैसे ही प्रभु अपने भक्त की ओर — यह चित्र इसी एक शब्द में छिपा है।
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