अर्थ: नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेह (वर्षा) बरस रहा है और उसके साथ ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है।
‘बूँदन’ = बूँदों के रूप में
‘मेहा’ = मेह, वर्षा
‘शीतल’ = ठंडी ‘सोहावन’ = सुहावनी, भली लगने वाली
भाव: यह मूसलाधार, डराने वाली बारिश नहीं है। बूँदें छोटी हैं, हवा ठंडी है — पूरा दृश्य कोमल और सुखद है। गरमी से तपी धरती और तपे मन, दोनों को यह फुहार ठंडक दे रही है। मीरा के लिए यह ठंडक बाहर की भी है और भीतर की भी — क्योंकि उन्हें ‘हरि आवन की भनक’ सुनाई दे चुकी है।