प्र1.
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए— (क) पहले पद में श्रीकृष्ण के बारे में क्या-क्या बताया गया है?
उत्तर
पहले पद में मीरा ने श्रीकृष्ण का सिर से पाँव तक चित्र खींचा है। पद में जो-जो बात आई है, वह क्रम से यह है —
| क्रम | पद की पंक्ति | श्रीकृष्ण के बारे में क्या बताया |
|---|---|---|
| 1 | “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” | वे नंदलाल हैं — नंद बाबा के लाल। |
| 2 | “मोहनि मूरति साँवरि सूरति” | उनकी मूरत मन मोह लेने वाली है और सूरत साँवली है। |
| 3 | “नैना बने विशाल” | उनकी आँखें बड़ी-बड़ी हैं। |
| 4 | “अधर सुधा रस मुरली राजति” | होंठों पर मुरली सुशोभित है, जिससे अमृत जैसा मीठा रस बरसता है। |
| 5 | “उर वैजंती माल” | छाती पर वैजयंती माला पड़ी है। |
| 6 | “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित” | कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा दे रही हैं। |
| 7 | “नूपुर शब्द रसाल” | पैरों के नूपुर मीठी ध्वनि कर रहे हैं। |
| 8 | “संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल” | वे संतों को सुख देने वाले, भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं। |
ध्यान देने की बात: पहले सात बिंदु श्रीकृष्ण का बाहरी रूप बताते हैं और आठवाँ उनका भीतरी स्वभाव। मीरा वर्णन ऊपर से नीचे की ओर करती हैं — पहले चेहरा और आँखें, फिर होंठ, फिर छाती, फिर कमर, फिर पाँव। इसी क्रम के कारण पूरा चित्र आँखों के सामने बन जाता है।