मल्हार अध्याय 10 कविता की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई” / “मीरा के प्रभु गिरधरनागर” — इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों में मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपने नाम को सम्मिलित कर दिया करते थे। आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़ देते हैं। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी। (जैसे— कविता में छोटी-छोटी पंक्तियाँ हैं। श्रीकृष्ण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है आदि।) (क) इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए।
उत्तर

ध्यान से पढ़ने पर इस पाठ की ये विशेषताएँ मिलती हैं —

विशेषतापाठ से उदाहरण
अंत में कवयित्री का नाम (छाप/भणिता)मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”, “मीरा के प्रभु गिरधरनागर”
छोटी-छोटी पंक्तियाँ — हर पद पाँच पंक्तियों कादोनों पद पाँच-पाँच पंक्तियों के हैं
श्रीकृष्ण के लिए अनेक नामनंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधरनागर, प्रभु
गाए जाने योग्य लय — हर पंक्ति के अंत में एक ही तुकपहले पद में — नंदलाल, विशाल, माल, रसाल, गोपाल; दूसरे पद में — सावन की, भावन की, आवन की, लावन की, सोहावन की, गावन की
टेक (स्थायी) पंक्ति — जो बार-बार दोहराई जा सकती है“बसो मेरे नैनन में नंदलाल”, “बरसे बदरिया सावन की”
ब्रज-राजस्थानी मिश्रित भाषानैनन, मूरति, साँवरि, सोभित, बदरिया, मनवा, आवन, दिश, मेहा
अनुप्रास — एक ही वर्ण की आवृत्तिरसे दरिया”, “ोहनि ूरति”, “ाँवरि ूरति”, “ामिन म”
पुनरुक्ति“नन्हीं नन्हीं”, “सावन की, सावन की”, “उमड़ घुमड़”
ऊपर से नीचे की ओर रूप-वर्णनसूरत → नैन → अधर → उर → कटितट → नूपुर
सीधी प्रार्थना, बीच में कोई कथा नहीं“बसो मेरे नैनन में…” — पहली ही पंक्ति में निवेदन
दृश्य और ध्वनि दोनों का चित्रणदृश्य — साँवरि सूरति, दामिन; ध्वनि — मुरली, नूपुर शब्द, भनक
जानने योग्य: रचना के अंत में कवि द्वारा अपना नाम जोड़ने को छाप या भणिता कहते हैं। कबीर ‘कहत कबीर’, सूरदास ‘सूरदास प्रभु’ और तुलसीदास ‘तुलसीदास’ लिखते थे। उस समय रचनाएँ छपती नहीं थीं, गाकर आगे बढ़ती थीं — नाम जुड़ा रहने से यह पता चलता रहता था कि पद किसका है।
प्र2.
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
उत्तर

यह कक्षा में करने की गतिविधि है। इसे इस तरह कीजिए —

  1. समूह की सूची को एक चार्ट पेपर पर बड़े अक्षरों में लिखिए — एक पंक्ति में एक विशेषता, और उसके आगे पद से उदाहरण।
  2. समूह से एक साथी सूची पढ़कर सुनाए और दूसरा साथी बोर्ड पर उदाहरण वाली पंक्ति लिख दे।
  3. दूसरे समूहों से पूछिए — “क्या आपकी सूची में कोई ऐसी विशेषता है जो हमारी सूची में नहीं है?” उसे अपनी सूची में जोड़ लीजिए।
  4. अंत में सबकी विशेषताओं को मिलाकर कक्षा की एक साझी सूची बनाइए और उसे कक्षा की दीवार पर लगा दीजिए।
नमूना प्रस्तुति की पहली दो पंक्तियाँ: “हमारे समूह को इस पाठ की सबसे बड़ी विशेषता यह लगी कि मीरा ने अपना नाम कविता के भीतर ही रख दिया है — ‘मीरा के प्रभु’। दूसरी विशेषता यह लगी कि दोनों पदों में हर पंक्ति का अंत एक ही तुक पर होता है, इसीलिए ये पद गाने में इतने मीठे लगते हैं।”
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