मल्हार अध्याय 10 अनुमान और कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए— (क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृष्ण के आने का संदेश सुनाया है। आपको क्या लगता है कि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
उत्तर

यह कल्पना का प्रश्न है, इसलिए उत्तर एक नहीं। पर अच्छा उत्तर पद से जुड़ा होना चाहिए — बादलों की भाषा वैसी ही हो जैसी पद में उनकी हरकत है: उमड़ना-घुमड़ना, गरजना, दामिनी का दमकना और बूँदों का टपकना

क्या कहा होगा — बादल गरजकर वही खबर लाए जो मीरा सुनना चाहती थीं — “तुम्हारे गिरधर आ रहे हैं”।

कैसे कहा होगा — शब्दों से नहीं, संकेतों से — गड़गड़ाहट से आवाज़ दी, बिजली चमकाकर रोशनी की, और नन्हीं बूँदें भेजकर मीरा को छू लिया। इसीलिए मीरा कहती हैं “भनक सुनी हरि आवन की” — भनक यानी हल्की-सी, अधूरी-सी आहट।

नमूना उत्तर (बादलों की बात):

“मीरा! सुनो — हम आषाढ़ के पार से आ रहे हैं।
चारों दिशाओं से उमड़-घुमड़कर हम इसलिए आए हैं कि तुम्हें एक खबर देनी है।
यह देखो, दामिनी को दमका दिया है — यह हमारा दीपक है, हमने तुम्हारे प्रभु के आने की राह जगमगा दी है।
इन नन्हीं-नन्हीं बूँदों को गिना करो — ये हमारे बोल हैं।
और यह जो शीतल पवन तुम्हें छूकर गई — यह उन्हीं की ओर से भेजा हुआ संदेश है।
तैयार हो जाओ मीरा, तुम्हारे गिरधर नागर आ रहे हैं!
चर्चा के लिए: बादलों को संदेशवाहक बनाना हिंदी-संस्कृत काव्य की बहुत पुरानी परंपरा है। कालिदास के मेघदूत में एक यक्ष बादल के हाथों अपनी पत्नी को संदेश भेजता है। अपने समूह में सोचिए — बादल के अलावा और कौन-कौन संदेश ला सकता है? हवा? नदी? कोई पक्षी?
प्र2.
(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?
उत्तर

यह आपकी अपनी कल्पना का प्रश्न है। अच्छे उत्तर में दो चीज़ें होनी चाहिए — (1) कुछ कहने की बातें (आदर, प्रशंसा, अपने मन की बात) और (2) कुछ पूछने के प्रश्न, जो पाठ में पढ़ी बातों से निकले हों।

नमूना उत्तर — जो मैं कहूँगा/कहूँगी:

  • “आपके पद आज पाँच सौ वर्ष बाद भी गाए जाते हैं — हमारी कक्षा ने भी आज ‘बरसे बदरिया सावन की’ गाया।”
  • “मुझे सबसे अच्छी पंक्ति लगी — ‘नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे’, क्योंकि यह पढ़ते ही बारिश की खुशबू याद आ जाती है।”
  • “आपने महल छोड़कर जो रास्ता चुना, उसके लिए बहुत साहस चाहिए था।”

नमूना उत्तर — जो मैं पूछूँगा/पूछूँगी:

  1. राजकुमारी होते हुए भी आपने महल छोड़कर संतों का जीवन क्यों चुना?
  2. आपके पद अपने आप बन जाते थे या आप उन्हें सोच-समझकर लिखती थीं?
  3. तीर्थ-यात्राओं में आपको सबसे अधिक कौन-सी जगह भाई?
  4. सावन के बादलों में आपको श्रीकृष्ण के आने की भनक कैसे सुनाई दी?
  5. जब लोगों ने आपका विरोध किया, तब आपने हिम्मत कैसे बनाए रखी?
  6. आप श्रीकृष्ण को ‘गिरधर नागर’ ही अधिक क्यों कहती हैं?
Tip: ऐसे प्रश्न मत बनाइए जिनका उत्तर ‘हाँ’ या ‘नहीं’ में आ जाए। ‘क्यों’, ‘कैसे’ और ‘क्या-क्या’ से शुरू होने वाले प्रश्न बातचीत को आगे बढ़ाते हैं।
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