मल्हार अध्याय 10 शब्दों के रूप

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल।” इस पंक्ति में ‘साँवरि’ शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर ‘साँवली’ शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैं, जिन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं। इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं, उस तरह से लिखिए। • नैनन • सोभित • भक्त वछल • बदरिया • मेरो मनवा • आवन • दिश • मेहा
उत्तर

पद के शब्द और आज की खड़ी बोली में उनके रूप —

पद का शब्दआज हम जिस रूप में बोलते-लिखते हैंक्या बदला
नैनननयनों में / आँखों में‘नैन’ का बहुवचन ‘नैनन’ ब्रज का रूप है; खड़ी बोली में ‘नयनों’।
सोभितशोभित (शोभा पा रहा)ब्रज में ‘श’ प्रायः ‘स’ हो जाता है — शोभित → सोभित।
भक्त वछलभक्तवत्सलसंस्कृत ‘वत्सल’ बोलचाल में घिसकर ‘वछल’ हो गया।
बदरियाबदली / बादल‘बदरा’ में -इया प्रत्यय जुड़कर प्यार-भरा छोटा रूप बना।
मेरो मनवामेरा मनब्रज में ‘मेरा’ = ‘मेरो’; ‘मन’ में -वा जुड़कर ‘मनवा’।
आवनआना / आगमन‘आवन’ क्रिया का पुराना भाववाचक रूप है।
दिशदिशाअंत का ‘आ’ लोप हो गया — दिशा → दिश।
मेहामेह / वर्षा / बारिश‘मेघ’ से बना ‘मेह’, और लय के लिए ‘मेहा’।
ऐसा क्यों होता है: मीरा ने ये पद ब्रज और राजस्थानी मिली-जुली भाषा में रचे थे, जो उस समय की गाने-बजाने की भाषा थी। हमारी आज की हिंदी खड़ी बोली है। इसलिए अर्थ वही रहता है, केवल शब्द का रूप बदल जाता है। ये पुराने रूप ग़लत नहीं हैं — इन्हीं से पंक्ति में लय और मिठास आती है। “मेरा मन” गाकर देखिए और फिर “मेरो मनवा” — अंतर तुरंत समझ आ जाएगा।
Try This: पद में ऐसे और शब्द ढूँढ़िए — मूरति (मूर्ति), सूरति (सूरत), राजति (राजती/सुशोभित), चहूँ (चारों), उमग्यो (उमड़ पड़ा), दमकै (दमककर), गावन (गाना), लावन (लाना)।
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