प्र1.
नीचे दिए गए स्थानों में श्रीकृष्ण से जुड़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए— (केंद्र में ‘श्रीकृष्ण’ और एक स्थान पर ‘मुरली’ पहले से दिया गया है।)
उत्तर
पुस्तक में बीच के गोले में श्रीकृष्ण लिखा है और एक गोले में मुरली भरा हुआ है। बाक़ी गोलों में पाठ से चुनकर ये शब्द भरे जा सकते हैं —
| गोले में लिखिए | पाठ की पंक्ति | श्रीकृष्ण से क्या संबंध |
|---|---|---|
| मुरली | “अधर सुधा रस मुरली राजति” | उनके होंठों की बाँसुरी (दिया हुआ उदाहरण) |
| नंदलाल | “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” | उनका नाम — नंद के पुत्र |
| वैजंती माल | “उर वैजंती माल” | उनके गले-छाती का हार |
| क्षुद्र घंटिका | “क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित” | उनकी कमर की छोटी घंटियाँ |
| नूपुर | “नूपुर शब्द रसाल” | उनके पैरों का घुँघरूदार गहना |
| गोपाल | “भक्त वछल गोपाल” | उनका नाम — गायों का पालन करने वाले |
| गिरधरनागर | “मीरा के प्रभु गिरधरनागर” | उनका नाम — गोवर्धन पर्वत धारण करने वाले |
| हरि | “भनक सुनी हरि आवन की” | उनका नाम — दुख हरने वाले |
और भी भरे जा सकते हैं: ‘साँवरि सूरति’, ‘विशाल नैना’, ‘मोहनि मूरति’ और ‘भक्त वछल’ — ये भी पाठ में श्रीकृष्ण के लिए ही आए हैं। जितने गोले हों, उतने शब्द चुन लीजिए; बाक़ी सूची अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए।
ध्यान दें: इस गतिविधि से एक बड़ी बात पता चलती है — इतने छोटे-से पद में मीरा ने श्रीकृष्ण के लिए चार अलग-अलग नाम (नंदलाल, गोपाल, हरि, गिरधरनागर) और चार आभूषण/वस्तुएँ (मुरली, वैजंती माल, क्षुद्र घंटिका, नूपुर) रख दी हैं।