प्र1.
नीचे स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलती-जुलती पंक्तियों को रेखा खींचकर मिलाइए— स्तंभ 1 — 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की 5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | स्तंभ 2 — 1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। 2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। 3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। 4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। 5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं।
उत्तर
सही मिलान —
| स्तंभ 1 (पद की पंक्ति) | मिलान | स्तंभ 2 (अर्थ) | पहचान का सूत्र |
|---|---|---|---|
| 1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल | → 2 | होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है। | अधर = होंठ, मुरली = बाँसुरी, उर = सीना |
| 2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल | → 5 | कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं। | क्षुद्र = छोटी, कटितट = कमर, नूपुर = पायल |
| 3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल | → 4 | हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो। | संतन सुखदाई, भक्त वछल — दोनों शब्द ज्यों के त्यों |
| 4. सावन में उमग्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हरि आवन की | → 3 | सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं, क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है। | उमग्यो = उमंग, भनक = आहट/चर्चा |
| 5. उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया, दामिन दमकै झर लावन की | → 1 | चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है। | चहूँ दिश = चारों दिशा, दामिन = बिजली, झर = झड़ी |
Tip: ऐसे मिलान में सबसे आसान जोड़ी पहले बना लीजिए — यहाँ 3 → 4 सबसे आसान है, क्योंकि दोनों में ‘मीरा के प्रभु’, ‘संतों’ और ‘भक्तों’ शब्द साफ़ दिखते हैं। बाक़ी अपने आप कम होते जाएँगे।