मल्हार अध्याय 10 कविता का सौंदर्य

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“बरसे बदरिया सावन की।” इस पंक्ति में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी? इस पंक्ति में ‘बरसे’ और ‘बदरिया’ दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों ‘ब’ वर्ण से शुरू हो रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो इस पंक्ति में ‘ब’ वर्ण की आवृत्ति हो रही है। इस कारण यह पंक्ति और भी अधिक सुंदर बन गई है। पाठ में से इस प्रकार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
उत्तर

एक ही वर्ण की इस आवृत्ति को अनुप्रास अलंकार कहते हैं। पाठ में इसके अनेक उदाहरण हैं —

पंक्तिजो शब्द साथ आएदोहराया गया वर्ण
“बसो मेरे नैनन में नंदलाल”ैनन, ंदलाल
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति”ोहनि, ूरति
“मोहनि मूरति साँवरि सूरति”ाँवरि, ूरति
“अधर सुधा रस मुरली राजति”स, मुली, ाजति
“क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित”घंटिका, टितट
“मीरा के प्रभु संतन सुखदाई”ंतन, सुखदाई
“सावन की, सावन की मन भावन की”ावन, ावन
“सावन में उमग्यो मेरो मनवा”ेरो, नवा
“उमड़ घुमड़ चहूँ दिश से आया”मड़, घुमड़म-ड़ की आवृत्ति
“दामिन दम कै झर लावन की”दामिन,
“नन्हीं नन्हीं बूँदन मेहा बरसे”न्हीं, न्हीं
“शीतल पवन सोहावन की”ीतल, ोहावनश/स
“आनंद मंगल गावन की”मंल, ावन
ऐसा करने से क्या होता है: एक ही वर्ण बार-बार सुनाई देने से पंक्ति में संगीत जैसी लय बन जाती है और वह जल्दी याद हो जाती है। इसीलिए भजन, लोकगीत और कहावतें अनुप्रास से भरी होती हैं — “काला अक्षर भैंस बराबर”, “तन-मन-धन”।
Try This: अपने नाम के पहले वर्ण से शुरू होने वाले तीन शब्द जोड़कर एक पंक्ति बनाइए — जैसे ‘वि की ोटी ोज़ सीली’। यही अनुप्रास है।
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