मल्हार अध्याय 10 रूप बदलकर

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए। उदाहरण के लिए— ‘सावन के बादल बरस रहे हैं..’ या ‘सावन की बदरिया बरसती है...’ आदि।
उत्तर

इस काम को करने का तरीका —

  1. पद की हर पंक्ति का अर्थ अपने शब्दों में एक वाक्य में लिखिए।
  2. अब पंक्तियों के टुकड़े हटा दीजिए और उन वाक्यों को जोड़कर एक बहती हुई गद्य-पंक्ति बना दीजिए।
  3. पुराने रूप बदल दीजिए — ‘मनवा’ की जगह ‘मन’, ‘मेहा’ की जगह ‘वर्षा’, ‘दिश’ की जगह ‘दिशा’।
  4. ‘और’, ‘क्योंकि’, ‘तभी’, ‘इसलिए’ जैसे जोड़ने वाले शब्द लगाइए — गद्य में ये ही लय का काम करते हैं।

नमूना उत्तर 1 — “बरसे बदरिया सावन की” का अनुच्छेद:

सावन की बदरिया बरस रही है। यह सावन का महीना है, जो सबके मन को भा जाता है। इस महीने में मेरा मन उमंग से भर उठा है, क्योंकि मैंने अपने प्रभु के आने की हल्की-सी आहट सुन ली है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़कर चले आए हैं, बीच-बीच में बिजली दमक जाती है और वर्षा की झड़ी लग गई है। नन्हीं-नन्हीं बूँदों के रूप में मेह बरस रहा है और उसके साथ ठंडी, सुहावनी हवा बह रही है। मीरा के प्रभु तो गिरधर नागर हैं — इसीलिए आज चारों ओर आनंद और मंगल के गीत गाए जा रहे हैं।

नमूना उत्तर 2 — “बसो मेरे नैनन में नंदलाल” का अनुच्छेद:

हे नंदलाल! आप आकर मेरी आँखों में ही बस जाइए। आपकी मूरत मन मोह लेने वाली है, सूरत साँवली है और आँखें बड़ी-बड़ी हैं। आपके होंठों पर वह मुरली सजी है जिससे अमृत जैसा मीठा रस बरसता है, और छाती पर वैजयंती की माला झूल रही है। कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ शोभा दे रही हैं और पैरों के नूपुर बहुत मधुर ध्वनि कर रहे हैं। मीरा के प्रभु ऐसे ही हैं — संतों को सुख देने वाले और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल।

Check it yourself: अनुच्छेद लिखने के बाद उसे ज़ोर से पढ़िए। यदि कहीं पंक्ति अटकती है तो वहाँ जोड़ने वाला शब्द छूट गया है। और यह ध्यान रखिए कि गद्य में तुक मिलाने की कोई ज़रूरत नहीं होती।
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