मल्हार अध्याय 9 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए। कुछ प्रश्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं। 1. कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षियों के जीवन में नहीं पाया जाता है? • प्रेम-प्रीति • मिल-जुलकर रहना • लोभ और पाप • निर्भय विचरण
उत्तर

सटीक उत्तर है — लोभ और पाप। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

विकल्पसही / ग़लतकविता का प्रमाण
प्रेम-प्रीतिपक्षियों में है“चिड़िया बैठी प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है!”
मिल-जुलकर रहनापक्षियों में है“करते सब आपस में हिलमिल!”, “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे”
लोभ और पापपक्षियों में नहीं है ★उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं
निर्भय विचरणपक्षियों में है“सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं”
क्यों: प्रश्न में ‘नहीं पाया जाता है’ पूछा गया है, इसलिए हमें वह गुण चुनना है जो पक्षियों में नहीं है। बाकी तीनों गुण कविता में पक्षियों की विशेषता के रूप में गिनाए गए हैं; केवल लोभ और पाप ही ऐसे हैं जिनका कवि ने साफ़ शब्दों में निषेध किया है।
ध्यान दीजिए: ऐसे प्रश्नों में सबसे पहले ‘नहीं’ शब्द पर घेरा लगा लीजिए। अकसर विद्यार्थी जल्दबाज़ी में सही गुण चुन लेते हैं और उत्तर उलट जाता है।
प्र2.
2. “सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं” कविता की यह पंक्ति किन भावों की ओर संकेत करती है? • असमानता और विभाजन • प्रतिस्पर्धा और संघर्ष • समानता और एकता • स्वार्थ और ईर्ष्या
उत्तर

सटीक उत्तर है — समानता और एकता। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

‘सब’ = कोई छूटा नहीं, कोई ऊँचा-नीचा नहीं → समानता
‘मिल-जुलकर’ = साथ रहना, साथ खाना → एकता
अर्थ — पक्षियों में न भेदभाव है, न बँटवारा; वे एक परिवार की तरह रहते हैं।
विकल्पक्यों नहीं
असमानता और विभाजनपंक्ति में ‘सब’ शब्द दो बार आया है — यह तो बँटवारे का ठीक उल्टा है।
प्रतिस्पर्धा और संघर्षपक्षी एक-दूसरे से होड़ नहीं करते; कविता में उनका आपस में लड़ना कहीं नहीं है।
स्वार्थ और ईर्ष्याअगले ही पद में लिखा है — “बच जाता जो, औरों के हित, उसे छोड़ वे देते हैं!” यह स्वार्थ नहीं, त्याग है।
क्यों: जंगल में खंजन, कपोत, चातक, कोकिल, काक, हंस, शुक — सब अलग-अलग जाति के पक्षी हैं, फिर भी ‘हिलमिल’ कर रहते हैं। कवि इसी दृश्य से मनुष्य को जाति, धर्म और वर्ग के भेद भुलाने का इशारा कर रहा है।
प्र3.
3. “वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में” कविता में पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं? • आकाश में उड़ते रहना • बंधन में रहना • स्वच्छंद रहना • संचय करना
उत्तर

सटीक उत्तर है — स्वच्छंद रहना। इसके सामने तारा (★) बनाइए।

पक्षियों का प्रश्न — “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?
पक्षियों का सुझाव — “तुम देखो हमको, फिर अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ो
निष्कर्ष — वे मनुष्य से स्वच्छंद, यानी बंधन-मुक्त जीवन जीने को कहते हैं।
विकल्पनिर्णयकारण
आकाश में उड़ते रहनाअंशतः स्वीकार्ययदि इसे ‘सीमा-हीन गगन में निर्भय विचरण’ के प्रतीक के रूप में लिया जाए तो यह भी चुना जा सकता है — प्रश्न में कहा भी गया है कि एक से अधिक उत्तर हो सकते हैं। पर शब्दशः मनुष्य उड़ नहीं सकता, इसलिए यह मुख्य उत्तर नहीं है।
बंधन में रहनाग़लतपक्षी तो बेड़ी तोड़ने को कह रहे हैं, बंधन में रहने को नहीं।
स्वच्छंद रहनासही ★‘स्वच्छंद’ शब्द कविता में ज्यों-का-त्यों आया है — “हम स्वच्छंद और क्यों तुमने…”।
संचय करनाग़लतपक्षी संचय करते ही नहीं — “जो मिलता है अपने श्रम से, उतना भर ले लेते हैं”।
टिप: ‘स्वच्छंद’ का अर्थ ‘मनमानी’ नहीं है। यहाँ इसका अर्थ है — लोभ, संग्रह और द्रोह के बंधनों से मुक्त होकर सहज जीवन जीना।
प्र4.
(ख) अब अपने मित्रों के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह समूह-चर्चा की गतिविधि है। चर्चा में हर विद्यार्थी को अपने चुने हुए विकल्प के लिए कविता की एक पंक्ति प्रमाण के रूप में बोलनी चाहिए — यही इस गतिविधि का असली कौशल है।

चर्चा का तरीका:

  1. पहले हर सदस्य अपना उत्तर पढ़े।
  2. फिर कविता खोलकर वह पंक्ति दिखाए जिससे उत्तर सिद्ध होता है।
  3. यदि किसी का उत्तर अलग है तो उसकी पंक्ति भी सुनी जाए — दोनों में कौन-सी अधिक सीधी है, यह समूह मिलकर तय करे।

नमूना उत्तर:

प्रश्नमैंने यह चुनाक्योंकि कविता कहती है
1लोभ और पाप“उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं” — यह सीधा-सीधा निषेध है, इसलिए संदेह की गुंजाइश ही नहीं।
2समानता और एकता“सब मिल-जुलकर” में ‘सब’ समानता बताता है और ‘मिल-जुलकर’ एकता। बाकी तीनों विकल्प इसके उल्टे भाव हैं।
3स्वच्छंद रहना“हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग में?” — यहाँ पक्षी अपने स्वच्छंद जीवन की तुलना मनुष्य की बेड़ी से कर रहे हैं।
क्यों यह ज़रूरी है: उत्तर सही होना आधा काम है; उत्तर का कारण बता पाना पूरा काम है। पाठ से प्रमाण देने की यही आदत आगे हर विषय में काम आती है।
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