प्र1.
कविता में से चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर बातचीत कीजिए और इन्हें इनके सही भावों से मिलाइए। इनके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। — संदर्भ: 1. चिड़िया की बोली, 2. सोने की कड़ियाँ, 3. निर्भय विचरण, 4. मुक्ति-मंत्र, 5. दिनभर काम। भाव: 1. बंधन और लालच, 2. श्रम और संतोष, 3. बंधन से मुक्ति, 4. स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन, 5. प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश।
उत्तर
सही मिलान इस प्रकार है —
| संदर्भ | सही भाव | कविता की वह पंक्ति जिससे यह मिलान बनता है |
|---|---|---|
| 1. चिड़िया की बोली | 5. प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश | “बोली में संदेश सुनाती है?” … “प्रेम-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है!” |
| 2. सोने की कड़ियाँ | 1. बंधन और लालच | “तुम देखो हमको, फिर अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ो” — कड़ी यानी ज़ंजीर, और वह ‘सोने’ की है, यानी धन का लालच ही बंधन बन गया है। |
| 3. निर्भय विचरण | 4. स्वतंत्रता और निर्बाध जीवन | “सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं” — जहाँ सीमा ही नहीं, वहाँ रुकावट भी नहीं। |
| 4. मुक्ति-मंत्र | 3. बंधन से मुक्ति | “वह जग के बंदी मानव को मुक्ति-मंत्र बतलाती है!” — ‘बंदी’ शब्द ही बता देता है कि किससे मुक्ति चाहिए। |
| 5. दिनभर काम | 2. श्रम और संतोष | “दिन भर करते काम, रात में पेड़ों पर सो जाते हैं” और “जो मिलता है अपने श्रम से, उतना भर ले लेते हैं” — मेहनत भी, और उतने में ही संतोष भी। |
मिलान का तरीका: पहले हर संदर्भ को कविता में ढूँढ़िए और उसकी पूरी पंक्ति पढ़िए। पंक्ति में जो शब्द सबसे भारी है — ‘बंदी’, ‘सोने’, ‘सीमा-हीन’, ‘श्रम’ — वही भाव की ओर उँगली उठा देता है।
ध्यान रखिए: 2 और 4 आपस में उलझ सकते हैं, क्योंकि दोनों बंधन से जुड़े हैं। अंतर यह है — ‘सोने की कड़ियाँ’ बंधन स्वयं है, और ‘मुक्ति-मंत्र’ उस बंधन से छूटने का उपाय है।