भावार्थ: पीपल की डाली पर बैठी चिड़िया केवल गाती नहीं, वह हमें प्रेम से रहने का ढंग सिखाती है। ‘रीति’ का अर्थ है — तरीका, चलन। यानी प्रेम कोई भाषण देकर सिखाने की चीज़ नहीं, जीकर दिखाने की चीज़ है — और चिड़िया वही कर रही है।
काव्य-सौंदर्य:
- मानवीकरण — चिड़िया को शिक्षक बना दिया गया है; वह ‘सिखलाती’ है, जो मनुष्य का काम है।
- अनुप्रास — ‘प्रेम-प्रीति’ में ‘प्र’ की और ‘प्रीति… रीति’ में मिलती-जुलती ध्वनियों की आवृत्ति पंक्ति को गीत जैसा बना देती है।
- ‘हमें’ शब्द पर ध्यान दीजिए — कवि स्वयं को भी सीखने वालों में गिन रहा है।