प्र1.
“वन में जितने पंछी हैं, खंजन, कपोत, चातक, कोकिल; काक, हंस, शुक आदि वास करते सब आपस में हिलमिल!” 1. वन में सारे पक्षी एक साथ रह रहे हैं, हमारे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं। आप विचार कीजिए कि हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है?
उत्तर
पशु-पक्षी हमारे परिवेश की शोभा भर नहीं, उसकी ज़रूरत हैं। वे कई ऐसे काम करते हैं जो कोई मशीन नहीं कर सकती।
| वे क्या करते हैं | हमें क्या लाभ होता है |
|---|---|
| फूलों का परागण (मधुमक्खी, तितली, सूर्यपक्षी) | फल और बीज बनते हैं; परागण न हो तो आम, अमरूद, सरसों — कुछ भी न मिले। |
| बीजों का बिखराव (तोता, कोयल, बुलबुल) | पक्षी बीट के साथ बीज दूर-दूर गिराते हैं और अपने आप नए पेड़ उग आते हैं। |
| कीड़ों को खाना (गौरैया, कठफोड़वा, बगुला) | फ़सल को नुक़सान पहुँचाने वाले कीड़े क़ाबू में रहते हैं; कीटनाशक कम लगाना पड़ता है। |
| सफ़ाई करना (कौआ, चील, गिद्ध) | मरे हुए जीव और जूठन साफ़ हो जाती है, जिससे बीमारियाँ नहीं फैलतीं। |
| मिट्टी उपजाऊ बनाना (केंचुआ, चींटी, गोबर) | ज़मीन भुरभुरी और उपजाऊ बनी रहती है। |
| दूध, ऊन, खाद और खेती में सहायता (गाय, भैंस, भेड़, बैल) | भोजन, वस्त्र और खेती — तीनों में सीधा योगदान। |
| प्रकृति का संकेत देना | पपीहा-मोर वर्षा की सूचना देते हैं; पक्षियों का अचानक चुप हो जाना ख़तरे का संकेत होता है। |
| मन को सुख देना | सुबह की चहचहाहट, तितली का रंग, गाय का बछड़े को चाटना — ये दृश्य मन को शांत करते हैं। |
सबसे बड़ा कारण — खाद्य शृंखला: प्रकृति एक जाल की तरह है। एक धागा टूटे तो पूरा जाल ढीला पड़ जाता है। यदि पक्षी घट जाएँ तो कीड़े बढ़ेंगे, फ़सल घटेगी और अंत में भूखे हम ही रहेंगे। इसीलिए उनका रहना हमारे अपने ही हित में है।
याद कीजिए: हमारे देश में गिद्धों की संख्या घटने से मरे हुए पशुओं का ढेर बढ़ गया और उससे बीमारियाँ फैलने लगीं — यह इस बात का सबसे स्पष्ट उदाहरण है कि एक पक्षी के जाने से पूरा परिवेश हिल जाता है।