प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए— (क) “मैंने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं।”
उत्तर
भाव: बच्चा बीमारी को कोई मजबूरी नहीं, बल्कि एक ऐसा काम मान रहा है जिसे वह जब चाहे “कर” सकता है — जैसे कोई खेल चुनता हो। “चलो बीमार पड़ जाते हैं” कहने का ढंग वैसा ही है जैसे कोई कहे “चलो पतंग उड़ाते हैं।”
क्यों उसे “आज का दिन बिलकुल ठीक” लगा: उस दिन उसका स्कूल जाने का मन नहीं था, गृहकार्य भी नहीं किया था और सजा मिलना तय था। यानी बहाने का लाभ उस दिन सबसे ज्यादा था।
भाषा का कमाल: यहाँ लेखक ने हास्य पैदा किया है — बीमारी अपने आप आती है, कोई उसे तय करके नहीं ले सकता। इस उल्टी बात को सहज बोलचाल के ढंग में कहकर लेखक बच्चे के भोलेपन पर हँसी ले आता है। यही आगे की पूरी कहानी की नींव भी है।
सीख: बच्चा यह नहीं सोच पाया कि बीमारी के साथ जो “ठाठ” वह देख रहा था, उसके साथ तकलीफ भी आती है। कल्पना में हमें केवल अच्छी बातें दिखती हैं, कीमत नहीं दिखती।