प्र1.
रेत के टीले का आकार कैसा होता है? पर्वत चट्टानों से बने होते हैं और उनका आकार स्थिर होता है। आपको क्यों लगता है कि रेत के टीलों का आकार भी इनके समान होता है, जबकि वे केवल रेत से बने होते हैं?
उत्तर
रेत का टीला पहाड़ी जैसी आकृति होता है — जिस ओर से पवन आती है उधर लंबा और मंद ढाल, ऊपर तीखा शिखर, और आड़ वाली ओर छोटा किंतु खड़ा ढाल। ऊपर से देखने पर अनेक टीले अर्धचंद्राकार दिखते हैं।
रेत पहाड़ी का आकार क्यों ले लेती है: यहाँ वही काम पवन करती है जो पर्वत में चट्टान और समय करते हैं —
- पवन रेत के कणों को मंद ढाल पर लुढ़काती और उछालती हुई ऊपर ले जाती है।
- शिखर पर पहुँचकर कण दूसरी ओर की शांत हवा में गिरते हैं और खड़े ढाल पर जम जाते हैं।
- रेत एक निश्चित तीव्रता (लगभग 30–34°) से अधिक खड़ी नहीं रह सकती, फिसल जाती है। इसलिए टीला उसी स्थिर आकृति तक बनकर रुक जाता है।
मुख्य अंतर: पर्वत का आकार स्थिर होता है — वह ठोस चट्टान है और करोड़ों वर्षों में ही बदलता है। टीले का आकार स्थिर नहीं, दोहराया जाने वाला है। पवन एक ओर से कण हटाकर दूसरी ओर जमाती रहती है, इसलिए पूरा टीला अपनी आकृति बनाए रखते हुए धीरे-धीरे खिसकता रहता है। यह ठीक वैसे ही है जैसे किसी पंक्ति का आकार वही रहता है, यद्यपि उसमें खड़े लोग बदलते रहते हैं।
यह कीजिए: किसी थाली में सूखी रेत की पतली परत बिछाकर उस पर एक ओर से धीरे-धीरे लगातार फूँक मारिए। एक छोटा-सा टीला बन जाएगा — आपकी ओर मंद ढाल और पीछे खड़ी ढाल, ठीक थार के 150 मीटर ऊँचे टीले जैसा।