प्र1.
आदिवासी समुदाय मुख्य रूप से झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, तेलंगाना और गुजरात राज्यों में बड़े पैमाने पर फैले हुए हैं। इस पुस्तक के अंत में दिए गए राजनीतिक मानचित्र में इन राज्यों की स्थिति का पता लगाइए और इन्हें भौतिक मानचित्र से जोड़ने का प्रयास कीजिए।
उत्तर
प्रत्येक राज्य को पहले राजनीतिक मानचित्र पर खोजिए, फिर भौतिक मानचित्र पर उसी स्थान को देखिए। लगभग हर राज्य का वह भाग वनाच्छादित पठार या पहाड़ी क्षेत्र निकलता है, खुला मैदान नहीं।
| राज्य | भौतिक मानचित्र पर वहाँ क्या है |
|---|---|
| झारखंड | छोटानागपुर पठार — वनाच्छादित, पहाड़ी, खनिजों से समृद्ध |
| पश्चिम बंगाल | पश्चिमी भाग छोटानागपुर की ऊँची भूमि से मिलता है; उत्तर हिमालय को छूता है |
| ओडिशा | पूर्वी घाट तथा तटीय मैदान के पीछे की वनाच्छादित पहाड़ियाँ |
| छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश | मध्य भारत का पठार — सतपुड़ा, मैकल तथा बस्तर की घने वनों वाली पहाड़ियाँ |
| महाराष्ट्र | पश्चिमी घाट और उनके पीछे दक्कन का पठार |
| तेलंगाना | दक्कन का पठार और पूर्वी घाट |
| गुजरात | पूर्वी पहाड़ी पट्टी, जहाँ अरावली, सतपुड़ा और पश्चिमी घाट मिलते हैं |
| असम | ब्रह्मपुत्र घाटी, जिसके दोनों ओर पहाड़ियाँ हैं |
अध्याय में बताई गई जनजातियाँ — संथाल, गोंड, बैगा, भील और कोरकु — इसी वन पट्टी में रहती हैं। इनकी अपनी विशिष्ट भाषाएँ, परंपराएँ और जीवन-शैलियाँ हैं, जो प्रकृति से घनिष्ठ रूप से जुड़ी हैं।
दोनों मानचित्र मिलकर क्या बताते हैं: गुजरात से लेकर झारखंड और ओडिशा तक एक चौड़ी वनाच्छादित पठारी पट्टी तिरछी फैली है। राजनीतिक सीमाएँ इसे काटती हैं, किंतु वन और पहाड़ियाँ निरंतर हैं — इसीलिए ये समुदाय इतने अलग-अलग राज्यों में मिलते हैं।