प्र1.
पुस्तक के अंत में दिए गए भारत के भौतिक मानचित्र को देखिए और नदियों के प्रवाह की दिशा पर ध्यान दीजिए।
उत्तर
प्रत्येक नीली रेखा को उद्गम से समुद्र तक देखिए और एक स्पष्ट पैटर्न उभर आता है। भारत की नदियाँ तीन वर्गों में बँट जाती हैं —
| वर्ग | नदियाँ | दिशा और मिलन-स्थल |
|---|---|---|
| हिमालयी नदियाँ | गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र | दक्षिण, फिर पूर्व की ओर मैदानों को पार करती हुई बंगाल की खाड़ी में |
| सिंधु और उसकी सहायक नदियाँ | पश्चिम/दक्षिण-पश्चिम की ओर अरब सागर में | |
| पूर्व की ओर बहने वाली प्रायद्वीपीय नदियाँ | महानदी, गोदावरी, कृष्णा, कावेरी | पश्चिमी घाट के पास से निकलकर संपूर्ण पठार को पश्चिम से पूर्व पार करती हुई बंगाल की खाड़ी में; डेल्टा बनाती हैं |
| पश्चिम की ओर बहने वाली प्रायद्वीपीय नदियाँ | नर्मदा, ताप्ती | पूर्व से पश्चिम बहकर अरब सागर में; ये डेल्टा नहीं, मुहाने बनाती हैं |
अधिकांश प्रायद्वीपीय नदियाँ पूर्व की ओर क्यों बहती हैं: यह पठार ढालू है — पश्चिमी घाट की ओर ऊँचा और पूर्व की ओर धीरे-धीरे नीचा। जल सदैव ढाल की ओर बहता है, इसलिए वह पठार पार करके बंगाल की खाड़ी तक पहुँचता है। नर्मदा और ताप्ती अपवाद हैं, क्योंकि वे भ्रंश घाटियों (लंबी दरारनुमा घाटियों) में होकर पश्चिम की ओर बहती हैं।
स्वयं जाँचिए: मंद ढाल पर लंबी दूरी तय करने वाली नदी अपने अवसाद धीरे-धीरे जमाती है और डेल्टा बनाती है; छोटी और तेज़ नदी शीघ्र समुद्र में पहुँचकर मुहाना बनाती है। इसीलिए पूर्वी तट पर डेल्टा और पश्चिमी तट पर मुहाने मिलते हैं।